पुरोला उतरकाशी
आचार्य लोकेश बडोनी मधुर
शरद पूर्णिमा, 25 अक्टूबर 2026 (रविवार): सनातन धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं, ब्रज क्षेत्र में यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से भी जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है। इसी विश्वास के कारण इस रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा प्रचलित है।

इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि रात्रि में जागरण कर भगवान का स्मरण करने से सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाएं और परंपराएं हैं। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह लगभग 11:55 बजे प्रारंभ होकर 26 अक्टूबर को सुबह लगभग 9:41 बजे समाप्त होगी। शरद पूर्णिमा का मुख्य रात्रि पूजन 25 अक्टूबर को किया जाएगा। 26 अक्टूबर की सुबह पूर्णिमा तिथि के दौरान स्नान-दान किया जा सकता है।

इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि रात्रि में जागरण कर भगवान का स्मरण करने से सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाएं और परंपराएं हैं। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह लगभग 11:55 बजे प्रारंभ होकर 26 अक्टूबर को सुबह लगभग 9:41 बजे समाप्त होगी। शरद पूर्णिमा का मुख्य रात्रि पूजन 25 अक्टूबर को किया जाएगा। 26 अक्टूबर की सुबह पूर्णिमा तिथि के दौरान स्नान-दान किया जा सकता है।
