आचार्य लोकेश बडोनी मधूर
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आचार्य लोकेश बडोनी मधूरविजयादशमी पर मां दुर्गा की आराधना से मिलता है शक्ति, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दशहरापुरोला उतरकाशीदशहरा यानी विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में शक्ति, साहस, धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व संदेश देता है कि जब भी अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब दैवी शक्ति धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद महिषासुर का वध कर दुष्ट शक्तियों पर विजय प्राप्त की थी। इसी उपलक्ष्य में विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। वहीं, भगवान श्रीराम की रावण पर विजय भी इस पर्व के प्रमुख धार्मिक प्रसंगों में शामिल है। मां दुर्गा शक्ति, साहस, करुणा और नारी सामर्थ्य की प्रतीक हैं। उनके विभिन्न स्वरूप यह संदेश देते हैं कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होना, सत्य का साथ देना और समाज में धर्म एवं सद्भाव बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।दशहरा केवल रावण दहन या उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक विचारों को त्यागने का अवसर भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की विजय का विश्वास बनाए रखना चाहिए।दशहरे का पर्व समाज में प्रेम, एकता, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। मां दुर्गा की आराधना के साथ हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अन्याय का विरोध करेंगे, जरूरतमंदों की सहायता करेंगे और समाज में सकारात्मकता का प्रसार करेंगे।
