उतरकाशी जिले के बड़कोट तहसील स्थित नौगांव ब्लॉक के योग ग्राम व पाण्डवों के नाम से प्रसिद्ध सरनौल गांव में हर वर्ष ज्येष्ठ मास 22 गते को मां रेणुका का प्रसिद्ध पौराणिक मेला आयोजित किया जाता है ।रवांई क्षेत्र यमुना घाटी का सांस्कृतिक हृदय माना जाता है यहां के मेले सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि लोक संस्कृति बोली भाषा और सामाजिक एकता के जीवंत प्रतीक है। आपको बताते चलें कि
यह मेला पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति से सराबोर इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर देवी मां रेणुका के दर्शन करते हुए और मन्नतें मांगी जाती है मेले के मुख्य आकर्षण और भक्तों की जनसैलाब सरनौल और आसपास के कई गांवों (पांडव गांव के रूप में प्रसिद्ध) के भक्त सुबह से ही मंदिर परिसर में एकत्र होते हैं।श्रद्धालुओं ने मां रेणुका को पारंपरिक चादर और श्रीफल भेंट चढ़ाते हुए पांच गांव की आराध्य देवी मां रेणुका की विधिवत पूजा-अर्चना की गई मंदिर में पश्वाओं (धार्मिक प्रतिनिधि) के फरसों पर चलने की अनूठी और चमत्कारी परंपरा भी देखने को मिलती हैं जिसे देख पूरा परिसर मां के जयकारों से गूंज उठता है।धार्मिक अनुष्ठानों के समापन पर पारंपरिक डोली नृत्य, तांदी और रासो जैसे लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दी गई। मेलों के दौरान स्थानीय पारंपरिक परिधान।पकवान, और ‘रंणसिंगे’ व ढोल की गूंज इस क्षेत्र के मेलों को एक अलग ही पहचान देती है।इस अवसर पर हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे।