पुरोला उतरकाशी
साहित्य जगत व स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में ऐतिहासिक छाप छोड़ने वाले रंवाई के प्रसिद्ध साहित्यकार महाबीर रवांल्टा अपनी साढ़े 37 वर्ष की लंबी, प्रेरणादायी शासकीय सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए हैं। वे उपजिला चिकित्सालय पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद पर तैनात थे। उनके सेवानिवृत्ति अवसर पर चिकित्सालय में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जहाँ सभी ने उनके अद्वितीय योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भावुक विदाई दी। उत्तरकाशी जिले के सरनौल गांव में जन्मे महावीर रवांल्टा ने साहित्य की विभिन्न विद्याओं में कलम चलाते हुए देशभर की कई शिक्षण संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत वह सम्मानित महावीर रवांल्टा द्वारा रचनाओं का देशभर की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रशासन के साथ ही आकाशवाणी व दूरदर्शन से प्रसारण होता रहा है। आपके साहित्य पर अनेक विश्वविद्यालय में लघु शोध एवं शोध प्रबंध प्रस्तुत हो चुके हैं भाषा संस्थान के भाषा सर्वेक्षण उत्तराखंड पहाड़ नैनीताल के बहुभाषी शब्दकोश में रंवाल्टी भाषा पर कार्य करने के साथ ही रवांल्टी में लेखन और विभिन्न माध्यमों से प्रचारित और प्रकाशित करने की शुरुआत का श्रेय आपको ही जाता है । विदाई समारोह के बाद महाबीर रवांल्टा अपने गांव महर गांव पहुंचे, तो दृश्य बेहद भावुक और गौरवपूर्ण हो गया। उनके स्वागत में पूरा गांव उमड़ पड़ा और ग्रामीणों ने रवांल्टा का पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। डीप्टी सीएमओ डाक्टर रमेश आर्य ने कहा सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं पर सामाजिक सेवा से कभी सेवानिवृत नहीं हो सकते क्योंकि सेवा करना इनका स्वभाव है और स्वभाव कभी रिटायर नहीं होता स्वास्थ्य विभाग की असली पहचान इमारतों से नहीं आप जैसे कर्मयोगीयों से होती है, प्रभारी डॉ,मनोज असवाल ने चिकित्सालय प्रशासन की और से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-शांति से परिपूर्ण आगामी जीवन की कामना की। इस अवसर पर प्रभारी डॉ मनोज असवाल, डाक्टर कपिल तोमर, डाक्टर निलम सेमवाल, फार्मेसिस्ट एलम पंवार, सरोज आर्य उमा सेमवाल, सरोज बडोनी, ललीता नोटियाल, महिमा खत्री,जयमाल पंवार उपेन्द्र राणा, यशवीर चौहान, सेंकड़ों संख्या में लोग उपस्थित थे।