आचार्य लोकेश बडोनी मधुर
पुरोला उतरकाशी
में मनाया जाने वाला रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, स्नेह और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है।
प्राचीन परंपरा से जुड़ा इतिहास
रक्षाबंधन की परंपरा को लेकर भारतीय इतिहास और लोककथाओं में कई प्रसंग मिलते हैं। महाभारत से जुड़ी लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के बीच स्नेह एवं रक्षा के भाव को रक्षाबंधन की परंपरा से जोड़ा जाता है।
एक अन्य प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रसंग में चित्तौड़ की रानी कर्णावती द्वारा मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजे जाने की कथा सुनाई जाती है। हालांकि इस घटना के विवरण को लेकर इतिहासकारों में मतभेद भी पाए जाते हैं, इसलिए इसे प्रमाणित इतिहास के बजाय लोकप्रिय ऐतिहासिक परंपरा के रूप में देखा जाता है।
राष्ट्रीय एकता से भी जुड़ा पर्व
रक्षाबंधन ने सामाजिक और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी मजबूत किया है। वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने लोगों के बीच भाईचारे और एकता का संदेश देने के लिए राखी बांधने की परंपरा को प्रोत्साहित किया। इसने राखी को केवल पारिवारिक रिश्ते तक सीमित न रखकर सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में भी स्थापित किया।
आज भी कायम है परंपरा
आज रक्षाबंधन के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी सुरक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प लेते हैं। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके बदले हैं, लेकिन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास की भावना आज भी वही है।
रक्षाबंधन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची रक्षा केवल एक धागे से नहीं, बल्कि प्रेम, जिम्मेदारी, सम्मान और विश्वास से होती है
प्राचीन परंपरा से जुड़ा इतिहास
रक्षाबंधन की परंपरा को लेकर भारतीय इतिहास और लोककथाओं में कई प्रसंग मिलते हैं। महाभारत से जुड़ी लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के बीच स्नेह एवं रक्षा के भाव को रक्षाबंधन की परंपरा से जोड़ा जाता है।
एक अन्य प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रसंग में चित्तौड़ की रानी कर्णावती द्वारा मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजे जाने की कथा सुनाई जाती है। हालांकि इस घटना के विवरण को लेकर इतिहासकारों में मतभेद भी पाए जाते हैं, इसलिए इसे प्रमाणित इतिहास के बजाय लोकप्रिय ऐतिहासिक परंपरा के रूप में देखा जाता है।
राष्ट्रीय एकता से भी जुड़ा पर्व
रक्षाबंधन ने सामाजिक और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी मजबूत किया है। वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने लोगों के बीच भाईचारे और एकता का संदेश देने के लिए राखी बांधने की परंपरा को प्रोत्साहित किया। इसने राखी को केवल पारिवारिक रिश्ते तक सीमित न रखकर सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में भी स्थापित किया।
आज भी कायम है परंपरा
आज रक्षाबंधन के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी सुरक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प लेते हैं। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके बदले हैं, लेकिन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास की भावना आज भी वही है।
रक्षाबंधन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची रक्षा केवल एक धागे से नहीं, बल्कि प्रेम, जिम्मेदारी, सम्मान और विश्वास से होती है
