By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
Notification Show More
Font ResizerAa
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Reading: मंजरी चतुर्वेदी की “तवायफ स्टोरी” ने मार्मिक पलों को छू लिया और मेहमानों के मन-हृदयों में दौड़ा दी “सिहरन”
Share
Font ResizerAa
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Search
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
उत्तराखंडदेहरादून

मंजरी चतुर्वेदी की “तवायफ स्टोरी” ने मार्मिक पलों को छू लिया और मेहमानों के मन-हृदयों में दौड़ा दी “सिहरन”

Lokesh Badoni
Last updated: October 27, 2026 12:28 pm
Lokesh Badoni Published October 27, 2026
Share
SHARE

देहरादून: रिच संस्था द्वारा नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित किए जा रहे विरासत महोत्सव-2026 में मंगलवार को सभी छात्र- छात्राओं का हुनर, हनक एवं आत्मविश्वास भरपूर रूप में विरासत साधना के सुसज्जित मंच पर दिखाई दिया I विरासत साधना द्वारा हिमालयन कल्चरल सेंटर में नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के कई विद्यार्थियों ने हर्षोल्लास और उमंग के साथ भाग लिया और कथक एवं भरतनाट्यम की भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में अपनी प्रतिभा का आकर्षित एवं भाव विभोर करने वाला प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में द टोंस ब्रिज स्कूल, चरण होली चाइल्ड स्कूल, गुरु स्मृति संगीत शिक्षा केंद्र, डीडीएन, पीवाईडीएस लर्निंग अकादमी, सेंट पैट्रिक एकेडमी, ऐन मेरी स्कूल, दून विश्वविद्यालय, समर वैली स्कूल, आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय, झंकार नृत्य केंद्र, माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल , सुरेंद्र संगीत विद्यालय समिति, हेरिटेज नॉर्थ कैंपस, नृत्य किंकिनी स्कूल ऑफ भरतनाट्यम डांस, आईटी चिल्ड्रन्स अकादमी, एडु विला इंस्टीट्यूट, दून प्रेसीडेंसी स्कूल, द ओबेरॉय स्कूल ऑफ इंटीग्रेटेड स्टडीज़, दून ब्लॉसम्स स्कूल और दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस सहित विभिन्न विद्यालयों एवं संस्थानों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कथक एवं भरतनाट्यम की आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता, अनुशासन, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और कलात्मक समृद्धि को प्रदर्शित किया। इन प्रस्तुतियों ने भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रति युवा पीढ़ी की रुचि और समर्पण को विरासत साधना के मंच पर दर्शाया।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण लतिका फाउंडेशन की सहभागिता रही, जो दिव्यांग बच्चों के साथ कार्य करने वाली संस्था है। संस्था के सात प्रतिभागियों ने गढ़वाली लोक नृत्य की सामूहिक प्रस्तुति दी, जिसके माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया। इस समूह प्रस्तुति में आदित्य पुंडीर, आशीष चार्ल्स, स्वयं सिंह, श्रुति पांडे, आस्था शर्मा, कश्वी, मयंक तथा कला ने भाग लिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को एक विशेष आयाम प्रदान किया और सांस्कृतिक गतिविधियों में समावेशिता, समान अवसरों और दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित भी किया।
कथक एवं भरतनाट्यम की प्रस्तुतियों के साथ गढ़वाली लोक नृत्य के समावेश ने कार्यक्रम को और अधिक विशेष बनाया। इस आयोजन ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं के साथ-साथ उत्तराखंड की क्षेत्रीय लोक संस्कृति को भी मंच प्रदान किया। विरासत साधना की इस पहल ने युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आत्मविश्वास विकसित करने और भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की सहभागिता ने कला एवं संस्कृति के प्रति विद्यार्थियों के उत्साह को प्रदर्शित किया।लतिका फाउंडेशन की भागीदारी ने कार्यक्रम में समावेशिता के महत्व को विशेष रूप से उजागर किया।
शास्त्रीय नृत्य, क्षेत्रीय लोक परंपराओं और समावेशी सहभागिता को एक मंच पर लाकर विरासत साधना ने भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि का उत्सव मनाया।
“सोल सूत्र” में दिखाई दी आकर्षक झलक…
श्रीलंका के ‘अलाप कोलंबो फोक डांस एन्सेम्बल’ की प्रस्तुति ने मचाई धूम
विरासत में थिरकी श्रीलंका के समृद्ध लोकनृत्य की अद्भुत कला, मेहमानों में फ़ैली महक
विरासत महोत्सव में श्रीलंका के अलाप कोलंबो फोक डांस एन्सेम्बल ने ‘सोल सूत्र’ के माध्यम से श्रीलंका की समृद्ध लोक नृत्य परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। डॉ. अंजलि मिश्रा के नेतृत्व में आई सात सदस्यीय टीम में चतुर, धेमी, तरुका, विश्मी, कसुनी, कुशानी और उपमनी शामिल रहे। टीम ने श्रीलंका की तीन पारंपरिक नृत्य शैलियों के माध्यम से वहां की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर दर्शाया। प्रस्तुति की शुरुआत कांडियन नृत्य से हुई, जिसे ‘वेस’ के नाम से भी जाना जाता है। यह पारंपरिक नृत्य शैली विशेष रूप से पुरुषों द्वारा प्रस्तुत की जाती है और अपनी ऊर्जावान भाव-भंगिमाओं तथा विशिष्ट शैली के लिए जानी जाती है।
प्रस्तुति का समापन लो कंट्री लोक नृत्य के साथ हुआ। इस नृत्य शैली ने कार्यक्रम को जीवंत और आकर्षक अंदाज में पूर्णता दी। ‘सोल सूत्र’ के माध्यम से कलाकारों ने श्रीलंका की लोक परंपराओं का उत्सव मनाते हुए दर्शकों को वहां की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराया।
शास्त्रीय संगीत में दुनिया की सरताज एन राजम ने जमा दी महफ़िल और लोगों को किया मग्न-मुग्ध
डॉ.एन राजम के वायलिन वादन से झूम उठा “विरासत”
विरासत की सांस्कृतिक संध्या में गूंजा डॉ.एन राजम के राग का जादू
विरासत की महफिल में देश-विदेश में विख्यात वायलिन वादक डॉ. एन राजम की प्रस्तुति आज काफी पसंदीदा और लोकप्रिय हुई I विरासत की इस आज की सांस्कृतिक संध्या में राजम के राग से निकले राग-रस से विरासत झूम उठा I इस प्रस्तुति में उनके सह-कलाकार वायलिन पर प्रशांत मिश्रा, तबले पर पंडित अभिषेक मिश्रा ने खूबसूरत संगत दी I कार्यक्रम की शुरुआत एक राग से हुई और तत्पश्चात उप-शास्त्रीय रचनाओं की गजब एवं शानदार प्रस्तुति का मनमोहक मंचन हुआ। डॉ. एन राजम ने मंच से स्वयं राग की घोषणा करके सभी शाही मेहमानों को ओत प्रोत कर दिया I
पद्म भूषण से सम्मानित एन राजम शास्त्रीय संगीत की एक ऐसी हस्ती हैं जिन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। वे एक भारतीय वायलिन वादक हैं, जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत करती हैं। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संगीत की प्रोफेसर थीं, बाद में विभागाध्यक्ष और विश्व विद्यालय के प्रदर्शन कला संकाय की डीन बनीं।
मुख्य बात यह है कि उन्हें संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप से सम्मानित किया गया, जो भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी द्वारा प्रदर्शन कलाओं में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। राजम को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और पद्म भूषण की प्रतिष्ठित उपाधियाँ प्राप्त हुईं। राजम ने अपने पिता के मार्गदर्शन में कर्नाटक संगीत का प्रारंभिक प्रशिक्षण लिया। उन्होंने मुसिरी सुब्रमण्यम अय्यर से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया और गायक ओंकारनाथ ठाकुर से राग विकास सीखा। अपने पिता ए नारायण अय्यर के मार्गदर्शन में राजम ने गायकी अंग (गायन शैली) विकसित की। राजम ने विश्व भर में और भारत के कई स्थानों पर आकर्षित करने वाली प्रस्तुतियाँ भी दी हैं। यही कारण है कि उनका नाम बतौर सम्मान के रूप में काफी अदब के साथ लिया जाता हैI
विश्व विख्यात मंजरी चतुर्वेदी की “चांदनी महफिल” और “तवायफ” देखने को जमे रहे विरासत के सभी मेहमान
विरासत महोत्सव-2026 में ‘चांदनी महफिल’ के तहत ‘द तवायफ स्टोरी’ की प्रस्तुति
विरासत महोत्सव-2026 में ‘चांदनी महफिल’ के अंतर्गत मंजरी चतुर्वेदी ने ‘द तवायफ स्टोरी’ के माध्यम से उन महिला कलाकारों की कहानियों को सामने रखा, जिन्हें इतिहास में वह स्थान नहीं मिल सका, जिसकी वे हकदार थीं। उनकी प्रस्तुति में उन गुमनाम कलाकारों की विरासत को याद किया गया, जिनके गीत और बंदिशें तो लोकप्रिय हुईं, लेकिन समय के साथ उनके नाम और योगदान इतिहास के पन्नों से ओझल हो गए।
मंजरी चतुर्वेदी ने मुख्तार बेगम, जद्दनबाई और नवाब जान जैसी पारंपरिक महिला कलाकारों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने इन कलाकारों की सांगीतिक विरासत और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में ‘आज जाने की ज़िद न करो’ जैसी लोकप्रिय रचना को भी उसके सांस्कृतिक महत्व और समाज तथा फिल्मों में उसकी पहुंच के संदर्भ में देखा गया। प्रस्तुति में इस बात को सामने लाया गया कि ऐसी कई रचनाएं व्यापक रूप से लोकप्रिय हुईं, लेकिन अपने पारंपरिक स्वरूप और उनसे जुड़ी मूल सांगीतिक विरासत से धीरे-धीरे दूर होती चली गईं।
‘द तवायफ स्टोरी’ के माध्यम से मंजरी चतुर्वेदी ने उन महिला कलाकारों के इतिहास, कला और योगदान को याद किया, जिनकी विरासत भारतीय संगीत और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही, लेकिन जिन्हें इतिहास में अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी।
मंजरी चतुर्वेदी एक भारतीय कथक नृत्यांगना हैं। वे लखनऊ घराना से संबंध रखती हैं। मंजरी ने अपने प्रारंभिक जीवन लखनऊ में व्यतीत किए। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से पर्यावरण विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अंतर्गत कथक केंद्र में कथक नृत्य की पेशेवर श्रेणी में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने प्रारंभिक प्रशिक्षण अर्जुन मिश्रा के मार्गदर्शन में लखनऊ घराना के कथक नृत्य में लिया। उन्होंने प्रतिमा बेदी के नृत्यग्राम में कलानिधि नारायण से अभिनय का भी अध्ययन किया। उन्होंने पंजाबी सूफी परंपराओं में बाबा बुल्ले शाह के योगदान का गहन अध्ययन किया। मौलाना रूमी और अमीर खुसरो का भी उन पर गहरा प्रभाव रहा। पिछले एक दशक में मंजरी चतुर्वेदी ने कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ सहयोग किया और प्रस्तुतियां दी हैं।
जबकि, चांदनी महफ़िल एक अंतरंग महफ़िल है I जहाँ संगीत, कविता, नृत्य और कथावाचन एक दूसरे में विलीन हो जाते हैं, जो सदियों पुराने नृत्य और संगीत, मौखिक परंपरा और पीढ़ियों से चली आ रही प्राचीन ज्ञान से प्रेरित हैं। इतिहास का एक अंश, उन महिलाओं की कहानियाँ बयां करता है जो मुख्यधारा में जगह नहीं बना पाईं, लेकिन भारतीय नृत्य और संगीत संस्कृति की नींव रही हैं, जो आज तक हम तक पहुंची है।
यह एक प्राचीन शैली है जिसे आश्चर्यजनक रूप से जीवंत किया गया है, ताकि आपको उन गुमनाम नामों की आत्मा की झलक मिल सके जो आज भी चमक रही हैं। चांदनी महफ़िल दर्शकों को एक पुराने जमाने के अंतरंग और परिष्कृत वातावरण में ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है I मोमबत्ती की रोशनी, झूमर, सुगंध, कला व बातचीत को समर्पित यह प्रस्तुति एक शाम की धीमी गति है I

You Might Also Like

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं रखती हैं व्रत चंद्रमा की पूजा कर करती हैं सुखी दांपत्य जीवन की कामना

डीआईटी विश्वविद्यालय में स्फूर्ति 2026–2.0 का भव्य समापन, देशभर की 100 से अधिक टीमों ने खेल महोत्सव में लिया हिस्सा

रंवाई जन एकता मंच के प्रत्याशी भजन लाल आर्य ने किया चुनाव लडने का ऐलान, क्षेत्र के विकास को बताया प्राथमिकता

….. तो एवी बेनर्जी की ठुमरी और शास्त्रीय संगीत की लय में बहती ग़ज़लों ने भी किया सभी को मदहोश

कार्स24 ने देहरादून में खोला अपना पहला कस्टमर हब

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • मंजरी चतुर्वेदी की “तवायफ स्टोरी” ने मार्मिक पलों को छू लिया और मेहमानों के मन-हृदयों में दौड़ा दी “सिहरन”
  • करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं रखती हैं व्रत चंद्रमा की पूजा कर करती हैं सुखी दांपत्य जीवन की कामना
  • डीआईटी विश्वविद्यालय में स्फूर्ति 2026–2.0 का भव्य समापन, देशभर की 100 से अधिक टीमों ने खेल महोत्सव में लिया हिस्सा
  • रंवाई जन एकता मंच के प्रत्याशी भजन लाल आर्य ने किया चुनाव लडने का ऐलान, क्षेत्र के विकास को बताया प्राथमिकता
  • ….. तो एवी बेनर्जी की ठुमरी और शास्त्रीय संगीत की लय में बहती ग़ज़लों ने भी किया सभी को मदहोश

Recent Comments

No comments to show.

Categories

  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • शिक्षा
"उत्तराखंड अब तक" हिंदी समाचार वेबसाइट है जो उत्तराखंड से संबंधित ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज, और संस्कृति को लेकर प्रस्तुत करती है।
Quick Link
  • उत्तराखंड
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Address: New Colony, Ranjawala, Dehradun – 248001
Phone: +91 9760762885
Email:
uttarakhandabtaknews@gmail.com
© Uttarakhand Ab Tak. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?