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देहरादून 9 सितम्बर 2026 –हिमालय दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर हर वर्ष उत्तरांचल उत्थान परिषद के तत्वाधान में महादेवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय देहरादून के संयुक्त तत्वाधान में “हिमालय : सतत विकास, चुनौतियां व समाधान” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया गया। महादेवी कन्या पाठशाला (स्नातकोत्तर) महाविद्यालय देहरादून के प्राचार्य प्रोफेसर ममता सिंह की अध्यक्षता में आयोजित विचार गोष्ठी कार्यक्रम का संचालन उत्तरांचल उत्थान परिषद के बरिष्ठ सदस्य प्रोफेसर देवी दत्त चौनियाल ने किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि विगत कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों के देशों एवं भारत के हिमालयी राज्यों में आपदाओं एवं हाल में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की भयंकर त्रासदी में जान – माल के नुकसान व भयंकर तबाही हिमालय क्षेत्र के देशों के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के अस्तित्व के लिए बहुत बड़े खतरे एवं गम्भीर संकट की चेतावनी है। उन्होंने कहा कि हिमालय न केवल विभिन्न नदियों के उद्गम का प्रमुख जल स्रोत है बल्कि मानव, जलीय एवं वन्य जीव-जन्तुओं सहित समस्त प्राणियों का प्राण है। विशाल हिमालय मात्र एक पहाड़ नहीं बल्कि देश की प्राकृतिक सुरक्षा दीवार उत्तरी व हिमालय क्षेत्र में बसे लोगों के जीवन, विशिष्ट सभ्यता एवं संस्कृति का आधार है।*हिमालय क्षेत्र में जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के प्रचुर भण्डार हैं। भारत के हिमालयी राज्यों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां के निवासियों को प्रतिवर्ष विभिन्न प्रकार की आपदाओं के संकटों से जूझना पड़ता है। उत्तराखण्ड के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के मध्य नजर सीमा क्षेत्र तक सुगम आवागमन के लिए सड़कों का निर्माण, उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होटल एवं रीजार्ट, विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के निर्माण कार्यों के दौरान जमीनों एवं पेड़ों का कटान होता है। लेकिन हिमालय में आपदाओं की हलचलों के दृष्टिगत यह अत्यंत आवश्यक है कि केवल सरकार ही नहीं बल्कि हिमालय से जूड़े समस्त नीति-नियंता, भू-वैज्ञानिक, पर्यावरणविद एवं आमजन सहित सभी हितधारक सतत विकास के साथ-साथ हिमालय को बचाने के समस्त प्रयासों में भागीदारी निभाएं। आपने संबोधन में उत्तरांचल उत्थान परिषद की ओर से प्रतिवर्ष हिमालय दिवस कार्यक्रम सहित अन्य विभिन्न सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए उत्थान परिषद एवं समस्त कार्यकर्ताओं को साधुवाद दिया। मुख्य अतिथि विधान सभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी के द्वारा इस अवसर पर महा विद्यालय की छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण की पोस्टर प्रतियोगिता में सफल छात्रओं को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार के प्रतीक चिह्न व प्रमाण पत्र भी वितरित किए गये। विचार गोष्ठी के शुभारंभ में परिषद के महामंत्री राजेश थपलियाल ने उत्तरांचल उत्थान परिषद के कर्ताओं के साथ कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि एवं अन्य सभी अतिथियों का परिचय व सभी अतिथियों का बैज अलंकरण, स्मृति चिन्ह भेंट एवं शाल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। अपने स्वागत संबोधन में महामंत्री राजेश थपलियाल ने उत्थान परिषद के द्वारा विभिन्न जनपदों के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित संस्कार केन्द्रों, विभिन्न सेवा प्रकल्पों एवं उत्तरांचल उत्थान परिषद के द्वारा लाइब्रेरी एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी दी गई। उन्होंने उत्तरांचल उत्थान परिषद के विभिन्न सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों का उल्लेख करते हुए हिमालय दिवस के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तरांचल उत्थान परिषद की ओर से प्रतिवर्ष किये जाने वाले कार्यक्रमों की सूची में हिमालय दिवस एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। कार्यक्रम में महादेवी कन्या पाठशाला (स्नातकोत्तर) यहां विद्यालय देहरादून की वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा० मीनाक्षी शर्मा ने महाविद्यालय की ओर से स्वागत संबोधन के द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया।्विचार गोष्ठी में उपस्थित विशिष्ट अतिथि पूर्व नौ सेना एडमिरल श्री कृपा नौटियाल ने अपने व्याख्यान में कहा कि उत्तराखण्ड के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों क्षेत्रों में पर्यावरण एवं जल संरक्षण हेतु कतिपय परम्परागत एवं कतिपय अभिनव प्रयोगों के सकारात्मक परिणामों को समझाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न हिमालयी राज्यों की भांति उत्तराखण्ड राज्य में भी समय-समय पर विभिन्न प्रकार की आपदायें आती रही हैं। लेकिन वर्षों पूर्व की तुलना में आज दैवीय आपदाओं से अत्यधिक जानमाल का नुक़सान क्यों हो रहा है ?, इन कारणों पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जहां समय-समय पर आकाश एवं पृथ्वी पर प्राकृतिक हलचल होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन अनेक जगहों पर मानव की कतिपय गलतियों के कारण भी ऐसी प्राकृतिक हलचलें भयंकर आपदाओं का कारण बनती हैं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में पर्यावरण एवं जल संरक्षण के पहलुओं का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। पर्यावरण एवं जल संरक्षण की अनदेखी करना सभी हिमालयी राज्यों के अस्तित्व के लिए ख़तरनाक है। विचार गोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर डी०डी० चौनियाल ने अपने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा हिमालय की संरचना एवं भूगर्भीय गतिविधियों पर पर प्रकाश डाला गया।कार्यक्रम के विशेषज्ञ वक्ता हिमालयी वाडिया भू-विज्ञान संस्थान देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा० जे० आर० पैरूमल ने अपने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के द्वारा हिमालय के विषय में हिमालय के निर्माण एवं विभिन्न भू-गर्भीय गतिविधियों के विषय में अब तक की गई खोजों के आधार पर अपना वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि हिमालय की विभिन्न पर्वत श्रृंखलाओं में एवं उनके नीचे समय समय पर भूकम्प एवं अन्य प्राकृतिक गतिविधियां होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में हमें इन खतरों से निपटने के लिए क्या करना चाहिए या क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए यह महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड में विगत कुछ वर्षों एवं हाल में भारी बारिश, ग्लेसियरों के खिसकने एवं बादल फटने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि पहाड़ी राज्यों की प्रकृति के अनुकूल सड़कों एवं उत्तरांचल उत्तरांचल उत्थान परिषद कार्यकारिणी एवं अन्य समस्त कार्यकर्ताओं कार्यों की सराहना की और साधुवाद दिया।कार्यक्रम के अन्त में महादेवी कन्या पाठशाला (स्नातकोत्तर) महा विद्यालय देहरादून की रसायन विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा० नीतू त्रिपाठी ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, अन्य अतिथियों एवं गोष्ठी कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों विचार गोष्ठी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त कर सभी को धन्यवाद दिया।बैठक में उत्तरांचल उत्थान परिषद की उपाध्यक्ष ऊषा रावत, धर्मानंद उनियाल, केंद्रीय कार्य कारिणी सदस्य एवं कार्यकर्ता सर्वश्री नरेश चन्द्र कुलाश्री, शम्भू प्रसाद सती, विपुल जोशी, मेजर(से०नि०) महावीर सिंह रावत एवं अन्य गणमान्य अतिथि उमा दत्त सेमवाल, पृथ्वी धर काला, संयुक्त नागरिक संगठन के श्री उमेश्वर सिंह रावत, श्री अवधेश शर्मा, गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पद्म सिंह थापा, राजीव अंसारी, प्रकाश नागिया आदि अन्य कार्यकर्ता एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रमुख व प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
देहरादून 9 सितम्बर 2026 –
हिमालय दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर हर वर्ष उत्तरांचल उत्थान परिषद के तत्वाधान में महादेवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय देहरादून के संयुक्त तत्वाधान में “हिमालय : सतत विकास, चुनौतियां व समाधान” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया गया। महादेवी कन्या पाठशाला (स्नातकोत्तर) महाविद्यालय देहरादून के प्राचार्य प्रोफेसर ममता सिंह की अध्यक्षता में आयोजित विचार गोष्ठी कार्यक्रम का संचालन उत्तरांचल उत्थान परिषद के बरिष्ठ सदस्य प्रोफेसर देवी दत्त चौनियाल ने किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि विगत कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों के देशों एवं भारत के हिमालयी राज्यों में आपदाओं एवं हाल में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की भयंकर त्रासदी में जान – माल के नुकसान व भयंकर तबाही हिमालय क्षेत्र के देशों के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के अस्तित्व के लिए बहुत बड़े खतरे एवं गम्भीर संकट की चेतावनी है। उन्होंने कहा कि हिमालय न केवल विभिन्न नदियों के उद्गम का प्रमुख जल स्रोत है बल्कि मानव, जलीय एवं वन्य जीव-जन्तुओं सहित समस्त प्राणियों का प्राण है। विशाल हिमालय मात्र एक पहाड़ नहीं बल्कि देश की प्राकृतिक सुरक्षा दीवार उत्तरी व हिमालय क्षेत्र में बसे लोगों के जीवन, विशिष्ट सभ्यता एवं संस्कृति का आधार है।*हिमालय क्षेत्र में जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के प्रचुर भण्डार हैं। भारत के हिमालयी राज्यों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां के निवासियों को प्रतिवर्ष विभिन्न प्रकार की आपदाओं के संकटों से जूझना पड़ता है। उत्तराखण्ड के सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के मध्य नजर सीमा क्षेत्र तक सुगम आवागमन के लिए सड़कों का निर्माण, उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होटल एवं रीजार्ट, विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के निर्माण कार्यों के दौरान जमीनों एवं पेड़ों का कटान होता है। लेकिन हिमालय में आपदाओं की हलचलों के दृष्टिगत यह अत्यंत आवश्यक है कि केवल सरकार ही नहीं बल्कि हिमालय से जूड़े समस्त नीति-नियंता, भू-वैज्ञानिक, पर्यावरणविद एवं आमजन सहित सभी हितधारक सतत विकास के साथ-साथ हिमालय को बचाने के समस्त प्रयासों में भागीदारी निभाएं। आपने संबोधन में उत्तरांचल उत्थान परिषद की ओर से प्रतिवर्ष हिमालय दिवस कार्यक्रम सहित अन्य विभिन्न सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए उत्थान परिषद एवं समस्त कार्यकर्ताओं को साधुवाद दिया। मुख्य अतिथि विधान सभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी के द्वारा इस अवसर पर महा विद्यालय की छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण की पोस्टर प्रतियोगिता में सफल छात्रओं को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार के प्रतीक चिह्न व प्रमाण पत्र भी वितरित किए गये। विचार गोष्ठी के शुभारंभ में परिषद के महामंत्री राजेश थपलियाल ने उत्तरांचल उत्थान परिषद के कर्ताओं के साथ कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि एवं अन्य सभी अतिथियों का परिचय व सभी अतिथियों का बैज अलंकरण, स्मृति चिन्ह भेंट एवं शाल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। अपने स्वागत संबोधन में महामंत्री राजेश थपलियाल ने उत्थान परिषद के द्वारा विभिन्न जनपदों के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित संस्कार केन्द्रों, विभिन्न सेवा प्रकल्पों एवं उत्तरांचल उत्थान परिषद के द्वारा लाइब्रेरी एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी दी गई। उन्होंने उत्तरांचल उत्थान परिषद के विभिन्न सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों का उल्लेख करते हुए हिमालय दिवस के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तरांचल उत्थान परिषद की ओर से प्रतिवर्ष किये जाने वाले कार्यक्रमों की सूची में हिमालय दिवस एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। कार्यक्रम में महादेवी कन्या पाठशाला (स्नातकोत्तर) यहां विद्यालय देहरादून की वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा० मीनाक्षी शर्मा ने महाविद्यालय की ओर से स्वागत संबोधन के द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया।

