पुरोला उतरकाशी
3 मार्च यानी कल साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है यह एक खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा, जो सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा. इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी भारत में मान्य होगा चंद्र ग्रहण दोपहर को 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा. और शाम को 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा. इसका सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लागू हो जाएगा. यह चंद्र ग्रहण भारत के कई बड़े शहरों में दिखाई देने वाला है नई दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, पटना समेत भारत के कुछ प्रमुख शहरों में नजर आएगा।आपको बताते चलें कि चंंद्र ग्रहण के सूतक काल में तीन लोगों को खास छूट मिलती है. इस दौरान बच्चे, बुजुर्ग, पीड़ित और गर्भवती महिलाओं को खाने-पीने की विशेष छूट मिलती है. इन लोगों के लिए सूतक काल चंद्र ग्रहण समाप्त होने से साढ़े 3 घंटे पहले शुरू होगा. चूंकि यह ग्रहण शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा. इसलिए इनके लिए सूतक काल कल दोपहर 3 बजकर 16 मिनट पर आरंभ होगा चंद्र ग्रहण का सूतक काल कल सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा. सूतक लगने से पहले खान-पान से जुड़े कार्य पूरे कर लें. इस अवधि में सब्जी काटने, छीलने या पकाने का काम न करें. घर में रखे पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते पहले ही डाल दें. ताकि ग्रहण का प्रभाव खाने की चीजों पर न पड़े. तुलसी के पत्ते भी सूतक लगने से पहले ही तोड़कर रख लें. पूजा-पाठ या घर के मंदिर की साफ-सफाई सुबह जल्दी उठकर कर लें. अपना कोई भी जरूरी या बड़ा काम सूतक लगने से पहले कर लें तो बेहतर होगा साल का ये पहला चंद्र ग्रहण होली के संयोग में ही पड़ रहा है. होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा पर किया जाता है. लेकिन चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि नहीं मिल रही है. इसलिए लोग असमंजस में हैं कि वो 2 मार्च को होलिका दहन करें या 3 मार्च को. ऐसे में ज्योतिषविदों का सुझाव है कि होलिका दहन 2 और 3 मार्च दोनों दिन किया जा सकता है. 2 मार्च की मध्य रात्रि को भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन कर सकते हैं. इस समय पूर्णिमा भी रहेगी. इसके अलावा, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद भी होलिका दहन कर सकते हैं, क्योंकि इस दिन भद्रा नहीं है. लेकिन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा नहीं मिल रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू होने के बाद गर्भवती महिलाओं के खास सावधानी बरतनी चाहिए. इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित रहेंगे. इस दौरान खान-पान से भी परहेज किया जाता है. घर में पहले से पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं, ताकि खाने पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव न पड़ सके. इस दौरान कोई भी जोखिमभरा कार्य न करने की सलाह दी जाती है।