हरिद्वार मातृ आंचल विद्यापीठ में राज्यमंत्री ने बांटे 70 निःशुल्क ट्रैक
हरिद्वार।
मातृ आंचल कन्या विद्यापीठ, हरिद्वार में मस्ती की पाठशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री एवं हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के उपाध्यक्ष श्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल द्वारा विद्यालय की 70 छात्राओं को निःशुल्क ट्रैक सूट वितरित किए गए। यह आयोजन ईजा फाउंडेशन के सहयोग से सम्पन्न हुआ, जिसका उद्देश्य छात्राओं को शिक्षा और खेल के प्रति प्रोत्साहित करना तथा उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक तथ्य भी सामने आया—कल्पना कीजिए उन बच्चियों के बारे में जिनके पास न मां है, न बाप, न कोई सहारा। छोटी-सी उम्र में जिन्हें या तो घर से निकाल दिया गया या सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिया गया। ऐसे ही लाचार और बेबस बच्चों का सहारा बना है मातृ आंचल विद्यापीठ, हरिद्वार। यह संस्था इन बच्चियों को न केवल आश्रय प्रदान करती है बल्कि उन्हें सम्मान, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देने का कार्य भी कर रही है।
इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री सेमवाल ने कहा कि जीवन में खेलों का विशेष महत्व है। खेल-खेल में बच्चे टीम भावना, शारीरिक मजबूती और राष्ट्रप्रेम की भावना सीखते हैं, जिससे उनका सामाजिक, शारीरिक और शैक्षिक विकास होता है। उन्होंने यह भी कहा कि खेल विद्यार्थी जीवन का अभिन्न अंग हैं और बच्चों को प्रेम भावना तथा उत्साह के साथ खेलना चाहिए। आज भारत की बेटियां खेलों में भी विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं, इसलिए हमें बेटियों को शिक्षा के साथ खेलों में भी आगे बढ़ाना चाहिए।
यह भी उल्लेखनीय है कि श्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल इस विद्यालय को समय-समय पर सहायता प्रदान करते रहे हैं और इस अवसर पर भी उनके सहयोग से 70 से अधिक ट्रैक सूट बच्चियों को वितरित किए गए।
कार्यक्रम में साध्वी कमलेश भारती, स्पर्श गंगा टीम से रीता चमोली, मंजू मनु रावत, बिमला ढोड़ियाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
*आज मातृ आंचल कन्या विद्यापीठ की बच्चियों के बीच बिताया समय दिल को छू गया।**
जिन मासूम बेटियों के पास न मां है, न पिता—उनकी मुस्कुराहट ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।
ईजा फाउंडेशन के सहयोग से *मस्ती की पाठशाला* में 70 निःशुल्क ट्रैक सूट बांटने का सौभाग्य मिला।
ट्रैक सूट पहनते ही बच्चियों की आंखों में जो उत्साह चमका—वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
मैं मानता हूँ कि **शिक्षा और खेल मिलकर ही भविष्य बनाते हैं**, और मैं हमेशा इन बेटियों के साथ खड़ा रहूँगा।
**मातृ आंचल सिर्फ एक विद्यालय नहीं—इन बच्चियों का घर, परिवार और उम्मीद है।**
उनकी मुस्कान मेरे लिए प्रेरणा है, सेवा मेरा संकल्प।
