गंगा व युमनाघाटी के आराध्य देवता सेम मुखेम आस्था का केन्द्र है हर तीसरे वर्ष होने वाले मेले में यमुना घाटी के राम सिंराई ,पुरोला, मोरी नौगांव, बड़कोट से हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ भगवान श्री कृष्ण की क्रीडास्थली की देव यात्रा करते हैं इस अवसर पर ऐतिहासिक सेम मुखेम में 25 और 26 नवंबर को दो दिवसीय मेले का आयोजित किया जाएगा जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही है। 25 नवंबर को मडभागी सौंड में शेमनाग राजा भगवान की ध्वजा पताका फहराने के बाद कार्यक्रमों की शुरुआत होगी, घाटी से सेम मुखेम की यात्रा पर जाने वाले अधिकांश श्रद्धालु 23 को प्रस्थान करने की तैयारी कर रहे हैं जबकि निजी और प्राइवेट वाहनों से सीधे मडभागी सौड पहुंचने वाले श्रद्धालु 24 को प्रस्थान करेंगे।
आपकों बताते चलें कि सेम मुखेम का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा है, जब भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को हराकर सेम मुखेम में रहने का आदेश दिया था। यह भी माना जाता है कि उन्होंने स्थानीय राजा गंगू रमोला से रहने के लिए जगह मांगी थी, लेकिन मना करने पर उन्होंने रमोला के पशुओं को पत्थर बना दिया था। बाद में, माफी मांगने पर रमोला ने स्वयं इस मंदिर का निर्माण करवाया, जहाँ आज भी भगवान कृष्ण की पूजा नागराजा के रूप में होती है।