करड़ा गांव में देव डोलियों के सानिध्य में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ।
पुरोला।
कमल सिराईंर पट्टी पुरोला के करड़ा गांव में पहली बार आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ व कथा का देव डोलियों के सानिध्य में कलश शोभा यात्रा के साथ पारम्परिक ढोल बाजों से भव्य शुभारम्भ किया गया।
पुरोला के कमल सिराईं पट्टी के करड़ा गांव में बुधवार से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का पहली बार आयोजन का भव्य आयोजन का देव डोलियों के सानिध्य में शुभारम्भ किया गया प्रथम दिवस शुभारम्भ अवसर पर क्षेत्र के आराध्य शिकारू नाग महाराज, ओडारू-जखण्डी, राजा रघुनाथ व रुद्रेश्वर महाराज,श्रीगुल माहाराज,पांच पांडवों की देव डोलियों व देव प्रतीकों के सानिध्य में भव्य कलश शोभायात्रा का आयोजन किया गया तत्पश्चात कथा प्रवचन का शुभरम्भ किया गया।
गांव में पहली बार आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आयोजन के प्रथम दिवस पर कथा प्रवचन करते हुए क्षेत्र के प्रसिद्ध कथा वाचक व्यास शिव प्रसाद नौटियाल ने श्रीमद्भागवत का मत्म्य बताते हुए अठारह पुराणों,चार भेदों एवं ग्रंथों का सार बताते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े रहने से संस्कार युक्त समाज स्वच्छ बुद्धि व स्वस्थ चित-मन का निर्माण होता है जो शामुक्ति के साथ ही स्वस्थ समाज का निर्माण करता है। कहा कि जगत के कण कण में व्याप्त भगवान को प्रेम रूपी मथनी से मंथनें पर भगवान मिलते हैं भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं,अहम,घंमड,त्याग कर प्रेम रूपी मंथानी से स्वयं के मन को मंथों तो ईश्वर की प्राप्ति होगी है व समभाव जागृत होता है।
वंही व्यास जी श्री शिवप्रसाद ने श्रीमदभागवत में परम हशं, व्यास,नारदी हनुमंत पद्धतियों से भागवत कथा ज्ञान अर्जन उपदेश में मांता-पिता की सेवा को संसारिक जीवन में सबसे बडा पुण्य बताया। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मुख्य आयोजक पँ0 घनश्याम रतूड़ी व उनके परिजनों को आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए श्री व्यास जी ने कहा कि यह धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन की भागवत कृपा से ही प्राप्ति होती है।

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करड़ा गांव में देव डोलियों के सानिध्य में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ।पुरोला।कमल सिराईंर पट्टी पुरोला के करड़ा गांव में पहली बार आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ व कथा का देव डोलियों के सानिध्य में कलश शोभा यात्रा के साथ पारम्परिक ढोल बाजों से भव्य शुभारम्भ किया गया।पुरोला के कमल सिराईं पट्टी के करड़ा गांव में बुधवार से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का पहली बार आयोजन का भव्य आयोजन का देव डोलियों के सानिध्य में शुभारम्भ किया गया प्रथम दिवस शुभारम्भ अवसर पर क्षेत्र के आराध्य शिकारू नाग महाराज, ओडारू-जखण्डी, राजा रघुनाथ व रुद्रेश्वर महाराज,श्रीगुल माहाराज,पांच पांडवों की देव डोलियों व देव प्रतीकों के सानिध्य में भव्य कलश शोभायात्रा का आयोजन किया गया तत्पश्चात कथा प्रवचन का शुभरम्भ किया गया।गांव में पहली बार आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आयोजन के प्रथम दिवस पर कथा प्रवचन करते हुए क्षेत्र के प्रसिद्ध कथा वाचक व्यास शिव प्रसाद नौटियाल ने श्रीमद्भागवत का मत्म्य बताते हुए अठारह पुराणों,चार भेदों एवं ग्रंथों का सार बताते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े रहने से संस्कार युक्त समाज स्वच्छ बुद्धि व स्वस्थ चित-मन का निर्माण होता है जो शामुक्ति के साथ ही स्वस्थ समाज का निर्माण करता है। कहा कि जगत के कण कण में व्याप्त भगवान को प्रेम रूपी मथनी से मंथनें पर भगवान मिलते हैं भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं,अहम,घंमड,त्याग कर प्रेम रूपी मंथानी से स्वयं के मन को मंथों तो ईश्वर की प्राप्ति होगी है व समभाव जागृत होता है।वंही व्यास जी श्री शिवप्रसाद ने श्रीमदभागवत में परम हशं, व्यास,नारदी हनुमंत पद्धतियों से भागवत कथा ज्ञान अर्जन उपदेश में मांता-पिता की सेवा को संसारिक जीवन में सबसे बडा पुण्य बताया। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मुख्य आयोजक पँ0 घनश्याम रतूड़ी व उनके परिजनों को आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए श्री व्यास जी ने कहा कि यह धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन की भागवत कृपा से ही प्राप्ति होती है।कथा के प्रथम दिवस पर करड़ा गांव सहित कमल सिराईं क्षेत्र के गांव गांव से भागवत कथा प्रेमियों ने देव डोलियों का दर्शन कर पूजा अर्चना कर श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।इस अवसर पर भागवत महापुराण के मुख्य आचार्य गुरु प्रसाद सेमवाल सहित कुल पुरोहित नितिन नौटियाल, मुख्य आयोजक घनश्याम रतूड़ी,शांति प्रसाद,राम कृष्ण,मनोज रतूड़ी, व ग्राम प्रधान कुलवंती डोटियाल, जगमोहन सिंह रावत, जयेंद्र सिंह भंडारी, बुद्धि सिंह भंडारी, केशर सिंह,गब्बर सिंह,जयवीर सिंह रावत,गुरु प्रसाद, हरिमोहन डोटियाल आदि समस्त ग्रामवासी व देव डोलियों के माली,पुजारी व बजीर,दास आदि सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद रहे।
