देहरादून
नेपाल में शासन प्रशासन के खिलाफ जनता का जो घातक ज्वार भाटा फटा वह होना ही था… क्योंकि जब शोषण भ्रष्टाचार उत्पीड़न का घड़ा भर जाता है तो ऐसे ही फटता है
परंतु इस प्रकार रोष आक्रोश जताने का तरीका गलत अनुचित रहा उसमें शायद जनता समझ नहीं पा रही की नुकसान सिर्फ और सिर्फ उनका ही होगा, अति नफरत एवं गुस्से में सोचने और समझने की शक्ति क्षीण हो ही जाती है।
इस रोष आक्रोश में उन्होंने अपने संसाधनों, अपनी धरोहर अपने रोजगार पर इतना बड़ा आहत किया है की जिसकी भरपाई में बहुत समय लगेगा।
बहुत लोगों का मानना है कि इसमें दूसरे देशों का हाथ है बिल्कुल हो सकता है संदेह की बात नहीं क्योंकि अगर अपने घर की दीवार ही कमजोर हो तो दुश्मन मौके की तलाश में रहता ही है।
*इस ताजा प्रकरण से एक बात अवश्य सीखने की है की समय रहते जनता का नियंत्रित तौर पर रोष जताना और सत्ताधारियों से सवाल करना आवश्यक है और सत्ता में बैठे लोगों को सुलगती चिंगारी से आने वाले समय पर अनियंत्रित घातक ज्वार भाटा फटने का भी एहसास होना चाहिए*। अतः समय रहते समस्याओं का उचित समाधान होना चाहिए यह जिम्मेदारी जिम्मेवार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की है जिसको समझना जरूरी है
अंत में नुकसान सिर्फ और सिर्फ जनता का ही है क्योंकि जिन्होंने भ्रष्टाचार से अपनी तीजोरिया भर ली है वह अपना बोरिया बिस्तर लपेटकर कहीं भी जा सकते हैं परंतु आम जनता जो अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारती आई है, मार रही है इसके दुष्परिणाम आगे वही भुगतेंगे, हम पूरे देश की बात नहीं करेंगे हम उत्तराखंड में रहते हैं इसलिए हम फिलहाल देवभूमि उत्तराखंड की बात करेंगे *गरीब पीड़ित प्रताड़ित व्यक्तियों की सर्वप्रथम उचित मदद होनी चाहिए मौजूदा सिस्टम को अच्छी तरह सुधारने की परम आवश्यकता है, मान सम्मान स्वाभिमान सभी का बना रहे ऐसी शुभअपेक्षा है* *न्यायोचित निर्णय का संकल्प समाधान का अंतिम विकल्प* । सादर भरत सिंह रावत
परंतु इस प्रकार रोष आक्रोश जताने का तरीका गलत अनुचित रहा उसमें शायद जनता समझ नहीं पा रही की नुकसान सिर्फ और सिर्फ उनका ही होगा, अति नफरत एवं गुस्से में सोचने और समझने की शक्ति क्षीण हो ही जाती है।
इस रोष आक्रोश में उन्होंने अपने संसाधनों, अपनी धरोहर अपने रोजगार पर इतना बड़ा आहत किया है की जिसकी भरपाई में बहुत समय लगेगा।
बहुत लोगों का मानना है कि इसमें दूसरे देशों का हाथ है बिल्कुल हो सकता है संदेह की बात नहीं क्योंकि अगर अपने घर की दीवार ही कमजोर हो तो दुश्मन मौके की तलाश में रहता ही है।
*इस ताजा प्रकरण से एक बात अवश्य सीखने की है की समय रहते जनता का नियंत्रित तौर पर रोष जताना और सत्ताधारियों से सवाल करना आवश्यक है और सत्ता में बैठे लोगों को सुलगती चिंगारी से आने वाले समय पर अनियंत्रित घातक ज्वार भाटा फटने का भी एहसास होना चाहिए*। अतः समय रहते समस्याओं का उचित समाधान होना चाहिए यह जिम्मेदारी जिम्मेवार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की है जिसको समझना जरूरी है
अंत में नुकसान सिर्फ और सिर्फ जनता का ही है क्योंकि जिन्होंने भ्रष्टाचार से अपनी तीजोरिया भर ली है वह अपना बोरिया बिस्तर लपेटकर कहीं भी जा सकते हैं परंतु आम जनता जो अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारती आई है, मार रही है इसके दुष्परिणाम आगे वही भुगतेंगे, हम पूरे देश की बात नहीं करेंगे हम उत्तराखंड में रहते हैं इसलिए हम फिलहाल देवभूमि उत्तराखंड की बात करेंगे *गरीब पीड़ित प्रताड़ित व्यक्तियों की सर्वप्रथम उचित मदद होनी चाहिए मौजूदा सिस्टम को अच्छी तरह सुधारने की परम आवश्यकता है, मान सम्मान स्वाभिमान सभी का बना रहे ऐसी शुभअपेक्षा है* *न्यायोचित निर्णय का संकल्प समाधान का अंतिम विकल्प* । सादर भरत सिंह रावत
