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भारत माता के सपूत वीर क्रान्तिकारी शहीद-ऐ-आज़म भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस पर शत-शत नमन

Lokesh Badoni
Last updated: March 23, 2025 9:39 pm
Lokesh Badoni Published March 23, 2025
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 सम्पादकीय

भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु*
शत् शत् नमन
*२३ मार्च,१९३१/ बलिदान दिवस*
====================
२३ मार्च,१९३१ को अंग्रेज़ी सरकार ने भारत के तीन सपूतों – भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी पर लटका दिया था. स्वतंत्रता की लड़ाई में स्वयं को देश की वेदी पर चढ़ाने वाले यह नायक हमारे आदर्श हैं।

शहीद-ऐ-आज़म भगतसिंह का जन्म २८ सितम्बर १९०७ को हुआ था.१४ वर्ष की आयु में ही भगतसिंह ने सरकारी स्कूलों की पुस्तकें और कपड़े जला दिये थे।

महात्मा गाँधी ने जब चौरीचौरा काण्ड के बाद असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने की घोषणा की तो भगतसिंह का अहिंसावादी विचारधारा से मोहभंग हो गया. उन्होंने १९२६ में देश की आज़ादी के लिए नौजवान भारत की स्थापना की।

हिन्दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, संस्कृत, पंजाबी, बंगला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिन्तक और विचारक भगतसिंह भारत में समाजवाद के पहले व्याख्याता थे. भगतसिंह अच्छे वक्ता, पाठक और लेखक भी थे. उन्होंने *अकाली* और *कीर्ति* नामक दो अखबारों का सम्पादन भी किया।

जेल में भगतसिंह व उनके साथियों ने ६४ दिनों तक भूख हड़ताल की. उनके एक साथी यतीन्द्र नाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिये थे।

भगतसिंह तथा बटुकेश्वर दत्त ने ०८ अप्रैल १९२९ को केन्द्रीय असेम्बली में एक खाली स्थान पर बम फेंका था. इसके पश्चात् उन्होंने स्वयं गिरफ्तारी देकर अपना सन्देश दुनिया के सामने रखा।

उनकी गिरफ्तारी के पश्चात् उन पर एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी साण्डर्स की हत्या का मुकदमा चला. लगभग दो वर्ष मुकदमा चलने के पश्चात् २३ मार्च १९३१ को भगतसिंह, सुखदेव, तथा राजगुरु को फाँसी दे दी गई।

शहीद सुखदेव : सुखदेव का जन्म १५ मई,१९०७ को पंजाब के लायलपुर में हुआ जो अब पाकिस्तान में है. भगतसिंह और सुखदेव के परिवार लायलपुर में पास-पास ही रहने से दोनों वीरों में गहरी दोस्ती थी तथा साथ ही दोनों लाहौर नेशनल कॉलेज के छात्र थे. साण्डर्स हत्याकाण्ड में भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव साथ थे।

शहीद राजगुरु : २४ अगस्त,१९०८ को पुणे जिले के खेड़ा में राजगुरु का जन्म हुआ. शिवाजी की छापामार शैली के प्रशंसक राजगुरु लाला लाजपत राय के विचारों से भी प्रभावित थे।

पुलिस की बर्बर पिटाई से लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए राजगुरु ने १९ दिसम्बर, १९२८ को भगतसिंह के साथ मिलकर लाहौर में अंग्रेज़ सहायक पुलिस अधीक्षक जेपी साण्डर्स को गोली मार दी थी और स्वयं ही गिरफ्तार हो गये थे।

ऐसे भारत माता के सपूत वीर क्रान्तिकारी शहीद-ऐ-आज़म भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस पर देश उन्हें कोटि-कोटि नमन् करता है।

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