पुरोला उतरकाशी
सम्पादकीय
आचार्य लोकेश बडोनी
प्राचीन काल से ही नवरात्रि को हम एक धार्मिक उत्सव के रूप में मनाते आए हैं क्योंकि इसके साथ हम सब की आस्था जुड़ी हुई है। हम यह भी जानते हैं कि नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख उत्सवों में से एक है, जिसे समूचे देश में अति चाव और उत्साह से मनाया जाता है। किंतु हम में से अनेक इस बात से अनभिज्ञ होंगे कि यह त्योहार अलग अलग ऋतुओं में वर्ष में पाँच बार मनाया जाता है। यह हैं, चैत्र नवरात्रि, आषाढ़ नवरात्रि, शरद नवरात्रि और पौष/माघ नवरात्रि। इनमें से शरद नवरात्रि वर्षा ऋतु (शरद ऋतु का आरंभ) में तथा चैत्र नवरात्रि (वसंत ऋतु में), अधिक महत्वपूर्ण हैं। आपको बताते चलें कि 2026 में चैत्र नवरात्रि और विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। चैत्र नवरात्रि की समाप्ति 27 मार्च 2026 को होगी। चैत्र नवरात्रि देवी शक्ति की उपासना का पर्व है, जो वसंत ऋतु के आरंभ और हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है और कई क्षेत्रों में इसे हिंदू नववर्ष का प्रारंभ माना जाता है।
सालभर में चार बार नवरात्रि होती है, जिसमें से दो नवरात्रि गुप्त नवरात्रि होती है, जो आम जनों के लिए नहीं होता। बाकी दो नवरात्रियों में से एक चैत्र नवरात्रि होती है जो साल के शुरुआत में मनाई जाती है और दूसरी शारदीय नवरात्रि होती है जो साल के अंत में मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नौ दिनों तक चलता है। इस नवरात्रि में केवल माँ शक्ति के नौ रूपों की ही पूजा नहीं होती, बल्कि बसंत ऋतु का स्वागत भी होता है। यह समय प्रकृति में नई ऊर्जा और जीवन का संचार करता है। पौराणिकता मान्यता के अनुसार देवताओं को परास्त करने वाले महिषासुर नामक असुर का वध करने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को संयोजित किया, जिससे माँ दुर्गा प्रकट हुईं। नौ दिनों और रातों के भीषण युद्ध के बाद, माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। और
भगवान राम ने रावण के विरुद्ध युद्ध करने से पहले देवी दुर्गा की पूजा की थी, जिससे उन्हें शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त हुआ। इस पर्व पर
नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की पूजा होती है।
वैज्ञानिक और ऋतु के आधार पर नवरात्रि साल में दो मुख्य बार (चैत्र और आश्विन) आती है, जो ऋतु परिवर्तन के समय (संधि काल) में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपवास का महत्व बताती है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसलिए इसे सृजन और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। चैत्र नवरात्रि हमें नववर्ष, नवचेतना और देवी शक्ति का संगम प्रदान करती है। यह पर्व हमें जीवन में नए संकल्प लेने, धर्म का पालन करने और शक्ति के साथ करुणा का संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी से होता है, जो भगवान राम के जन्मोत्सव का दिन है। रामनवमी का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सत्य और धर्म की विजय निश्चित है।
सालभर में चार बार नवरात्रि होती है, जिसमें से दो नवरात्रि गुप्त नवरात्रि होती है, जो आम जनों के लिए नहीं होता। बाकी दो नवरात्रियों में से एक चैत्र नवरात्रि होती है जो साल के शुरुआत में मनाई जाती है और दूसरी शारदीय नवरात्रि होती है जो साल के अंत में मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नौ दिनों तक चलता है। इस नवरात्रि में केवल माँ शक्ति के नौ रूपों की ही पूजा नहीं होती, बल्कि बसंत ऋतु का स्वागत भी होता है। यह समय प्रकृति में नई ऊर्जा और जीवन का संचार करता है। पौराणिकता मान्यता के अनुसार देवताओं को परास्त करने वाले महिषासुर नामक असुर का वध करने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को संयोजित किया, जिससे माँ दुर्गा प्रकट हुईं। नौ दिनों और रातों के भीषण युद्ध के बाद, माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। और
भगवान राम ने रावण के विरुद्ध युद्ध करने से पहले देवी दुर्गा की पूजा की थी, जिससे उन्हें शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त हुआ। इस पर्व पर
नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की पूजा होती है।
वैज्ञानिक और ऋतु के आधार पर नवरात्रि साल में दो मुख्य बार (चैत्र और आश्विन) आती है, जो ऋतु परिवर्तन के समय (संधि काल) में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपवास का महत्व बताती है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसलिए इसे सृजन और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। चैत्र नवरात्रि हमें नववर्ष, नवचेतना और देवी शक्ति का संगम प्रदान करती है। यह पर्व हमें जीवन में नए संकल्प लेने, धर्म का पालन करने और शक्ति के साथ करुणा का संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी से होता है, जो भगवान राम के जन्मोत्सव का दिन है। रामनवमी का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सत्य और धर्म की विजय निश्चित है।
