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DKMS-BMST ने आईआईटी कानपुर के अंतराग्नि-24 में स्टेम सेल दान करने के बारे में जागरूकता फैलाने की मुहिम शुरू की

Lokesh Badoni
Last updated: October 25, 2024 8:03 am
Lokesh Badoni Published October 25, 2024
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  • रजिस्ट्रेशन कार्यक्रम के दौरान, संभावित जीवनरक्षक के रूप में 350 से ज़्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया

कानपुर: ब्लड कैंसर के खिलाफ संघर्ष के लिए समर्पित एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन, DKMS BMST फाउंडेशन इंडिया ने भारत में ब्लड कैंसर के बढ़ते मामलों तथा उपचार के विकल्प के रूप में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की अहम भूमिका के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की अपनी कोशिशों को लगातार जारी रखा है। DKMS BMST फाउंडेशन इंडिया ने अपने इन्हीं प्रयासों के तहत देश के बेहद सम्मानित संस्थान, आईआईटी कानपुर के वार्षिक महोत्सव, अंतराग्नि 24 में स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्रेशन अभियान का संचालन किया। बीते 55 सालों से आयोजित यह कार्यक्रम एशिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सवों में से एक है, इसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। इस बार के आयोजन में 20,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
ब्लड कैंसर भी कैंसर का ही एक प्रकार है, जो खून के साथ-साथ बोन मैरो को प्रभावित करता है। हाल के वर्षों में इसके मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। अक्सर स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन को ऐसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की ज़िंदगी बचाने वाला उपचार विकल्प माना जाता है। इलाज के ज़रिये जान बचाने की इस प्रक्रिया में, मरीजों के शरीर में मौजूद बीमार या खराब हो चुके बोन-मैरो सेल्स को मैचिंग डोनर के स्वस्थ स्टेम सेल्स से बदल दिया जाता है। इस तरह मरीज के शरीर में सेहतमंद ब्लड स्टेम सेल्स बनने की शुरुआत होती है और उन्हें एक नई ज़िंदगी मिलती है। हालाँकि, मैचिंग स्टेम सेल डोनर ढूँढना काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि किसी मरीज को रजिस्ट्री पर मैचिंग डोनर मिलने की संभावना दस लाख में से केवल एक होती है।

भारत में हर साल 1 लाख से ज़्यादा लोगों में ब्लड कैंसर या खून से संबंधित बीमारियों का पता चलता है। ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की सफलता के लिए, मरीज को ऐसे को डोनर की जरूरत होती है जिनका HLA उनसे मेल खाता हो। बदकिस्मती से, भारत के सिर्फ 0.09% लोगों ने ही संभावित डोनर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया है। भारतीय मूल के मरीजों और डोनर्स के HLA (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) की खास विशेषताएँ होती हैं, जो ग्लोबल डेटाबेस में बहुत कम दिखाई देता है, और इसकी वजह से मरीज के लिए सबसे सही डोनर मिलना और भी मुश्किल हो जाता है।

DKMS के इस नेक काम के बारे में जागरूकता फैलाने में कानपुर के माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स ने बेहद अहम भूमिका निभाई। सौम्या टंडन, आयुषी अवस्थी, कानपुर स्टोरीज़ और सिद्धार्थ ठाकुर ने अपने-अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को स्टेम सेल का दान करने की अहमियत के बारे में बताया, साथ ही उन्हें संभावित स्टेम सेल डोनर के तौर पर DKMS-BMST में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रोत्साहित किया।

DKMS BMST फाउंडेशन इंडिया के सीईओ, पैट्रिक पॉल ने कहा, “आज के युवा बुलंद हौसले के साथ दुनिया में बदलाव लाना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “स्टेम सेल दान करने जैसा नेक काम उनके आदर्श के अनुरूप है। संभावित स्टेम सेल डोनर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराके, वे किसी को एक नई ज़िंदगी देने में सक्षम बन जाते हैं।”

DKMS-BMST भारत में ब्लड कैंसर तथा खून से संबंधित बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मदद के लिए विविधतापूर्ण और इसी उद्देश्य के लिए समर्पित स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री बनाने की दिशा में प्रयासरत है। अंतराग्नि 24 में उनकी भागीदारी, लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और नई पीढ़ी को जरूरतमंद लोगों के लिए संभावित जीवनरक्षक बनने हेतु प्रेरित करने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

संभावित स्टेम सेल डोनर के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन कराने की इच्छा रखने वाले भारतीयों की उम्र 18 से 55 साल के बीच होनी चाहिए, तथा उनकी सेहत अच्छी होनी चाहिए। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए तैयार होने के बाद, आपको बस एक सहमति फॉर्म भरना होगा और स्वैब के ज़रिये अपने गालों के अंदरूनी हिस्से के टिश्यू सेल्स को नमूने के तौर पर जाँच के लिए देना होगा। फिर आपके टिश्यू का नमूना विश्लेषण के लिए लेबोरेटरी में भेजा जाता है और उसे बिना नाम के स्टेम सेल डोनर के रूप में इंटरनेशनल सर्च प्लेटफ़ॉर्म पर सूचीबद्ध किया जाता है, ताकि आप मैचिंग स्टेम सेल डोनर के तौर पर किसी मरीज की मदद कर सकें। अगर आप डोनर बनने के योग्य हैं, तो आप www.dkms-bmst.org/register पर अपना होम स्वैब किट ऑर्डर करके ब्लड स्टेम-सेल डोनर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पहला कदम उठाएँ।

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