By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
Notification Show More
Font ResizerAa
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Reading: त्याग समर्पण का व्रत है करवा चौथ
Share
Font ResizerAa
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Search
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Blog

त्याग समर्पण का व्रत है करवा चौथ

Lokesh Badoni
Last updated: October 20, 2024 9:03 am
Lokesh Badoni Published October 20, 2024
Share
SHARE

 

सम्पादकीय

हमारे देश में व्रत एक नही अनेक होते है इनमें महिलाओं के व्रत पुरूषो के व्रत की अपेक्षा अधिक कठोर होते हैं। इन महिलाओं के व्रतों में भी करवा चौथ, तिलवा, कजरी तीज, हरछठ, जैसे व्रत बहुत कठिन हैं। तिलवा और हरछठ का व्रत महिलाएँ पुत्र के कल्याणार्थ रहती है जबकि कजलरी तीज व करवाचौथ का व्रत सुहाग के कल्याणार्थ होता है। इसमें सुबह से चन्द्रमा निकलने तक निराहार यहाँ तक कि पानी भी नहीं पीती हैं। गौर करने की बात है कि महिलाएँ कोई भी व्रत अपने कल्याणार्थ नही बल्कि सभी पति पुत्र के मंगल के लिये करती है।पुरूष कभी नारी के लिये कोई व्रत नही करता है। आज के बदलते समय में लोग नारी को खिलौना मानकर खेल रहे हैं। लोग भूल रहे हैं कि नारी ही अर्द्धांगिनी के साथ ही सृष्टि का मूल और शक्ति स्वरूपा है। नारी को ही घर की लक्ष्मी एवं पालक कहा जाता है लेकिन आजकल सोशल मीडिया के जमाने भाई लोग करवा चौथ को मजाक बनाकर सूचनाओं को प्रसारित कर नारी शक्ति का अपमान कर रहें हैं। कोई कहता है कि आज जरा संभालकर रहना, भूखी शेरनी खतरनाक होती है तो कोई पत्नी के सामने उसके साथ भूखा रहने का नाटक जरूर करो लेकिन बाहर जाकर खूब खाओ लेकिन पत्नी की चोरी से। एक तरफ तो भारतीय नारी आधुनिकता के दौर के बावजूद दिन भर भूखी प्यासी रहकर अपने सुहाग यानी पति परमेश्वर के दीर्घायु शतायु होने की कामना करती है वहीं वह जिस पति के लिये त्याग करती है वहीं मजाक व धोखाधड़ी पर आ जाता है और पत्नी के सामने व्रत रखने का नाटक और बाहर जाकर चोरी से खाता पीता है। लेकिन वह भूल रहा है कि- कोई देखे या न देखे,भगवान तो देखता ही है। कहते हैं कि करवाचौथ और ईद के चाँद का इन्तजार बहुत कठिन होता है। वैसे करवाचौथ के बारे में बताया गया है कि इसमें विघ्न विनाशक गणेश जी की पूजा व व्रत सुहागिन महिलाएँ अपने पति के दीर्घायु के लिये करती हैं ।कहते हैं कि प्राचीन काल में एक ब्राह्मण के सात पुत्र और एक पुत्री वीरमती थी।करवाचौथ के दिन वह अपने मायके में व्रत थी और भूख बर्दाश्त नहीं कर सकी और बेहोश होकर गिर गयी। कहते हैं कि भाइयों ने उसका मुँह पानी से धोकर चलनी से दीया दिखाकर कहा कि वह देखो चन्द्रमा निकल आया है। इतना सुनते ही वह जल्दी से अर्घ देकर खाने पर बैठ गयी ।पहले कौर में बाल निकला दूसरे मे छींक हुयी और तीसरे कौर में ससुराल से बुलावा आ गया कि पति मर गया है। इस पर जब रोना पीटना शुरू हुआ तो संयोग से इन्द्राणी वहाँ आ गयी और कहा कि तुमने व्रत तोड़ा है जिससे तुम्हारे पति की मृत्यु हुयी है। अब तुम साल के बारहो चौथ करवा के रूप मे रहो तो तुम्हारा पति पुनः जीवित हो जायेगा। इसी तरह करवाचौथ व्रत को लेकर तरह तरह की कहानियां बताई गई है और सभी कहानियों में करवाचौथ के महत्व को बताया गया है।साथियों! करवाचौथ का व्रत नारी अपने लिये नही बल्कि अपने पति परमेश्वर के लिये सच्चे दिल एवं श्रद्धा विश्वास से करती है और उगते चांद की रोशनी में पति परमेश्वर का चेहरा छलनी से देखकर उनके हाथ पानी पीकर अपना व्रत समाप्त करती है। प्रायः पत्नी से दूर रहने वाले लोग करवाचौथ के दिन अपने घर उपहार लेकर जरूर आतें है। धन्य सुहागिन भारतीय नारिया और धन्य हैं हमारी सनातन व्यवस्था और जय हो नारीशक्ति की।

You Might Also Like

टेक्सेला और जीआरडी ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष सरदार राजा सिंह ओबराय का निधन

एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, देहरादून ने देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गणतंत्र दिवस

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने विकासखंड डुंडा के सुदूरवर्ती गांव सिंगोट में ग्रामीणों द्वारा बनाई गई मत्स्य उत्पादन इकाई का स्थलीय किया निरीक्षण। 

विकासखंड नौगांव, के अंतर्गत गढ़ अंबेडकर हल्का वाहन मार्ग को मोटर मार्ग का सुदृढ़ीकरण एवं डामरीकरण कार्य (लंबाई 5.025 किमी, लागत ₹468.59 लाख) के पूर्ण होने पर क्षेत्र वासियों ने लोकार्पण एवं सम्मान समारोह में पुरोला विधायक दुर्गेश लाल को किया सम्मानित

राज्यमंत्री विरेन्द्र दत्त सेमवाल: पहाड़ों की संजीवनी से राजनीति और उद्योग की बुलंदी तक

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • ओलंपस हाई में प्री-प्राइमरी विद्यार्थियों के लिए दीक्षांत समारोह आयोजित
  • रियलमी ने उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा साक्षरता बढ़ाने के लिए IIT कानपुर के C3iHub के साथ साझेदारी की
  • मोरी ब्लाक के फिताडी गांव में अग्ग्निनकांड: प्रभावितों के बीच पहुंचे जिलाधिकारी व विधायक दुर्गेश लाल
  • ब्लाक मुख्यालय चकराता में जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष युवा राज्यमंत्री गीताराम गौड़ ने चार साल बेमिसाल की उपलब्धियां गिनाईं।
  • नन्हे मुन्ने बच्चों के डिग्री एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त कर चेहरे खिले

Recent Comments

No comments to show.

Categories

  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • शिक्षा
"उत्तराखंड अब तक" हिंदी समाचार वेबसाइट है जो उत्तराखंड से संबंधित ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज, और संस्कृति को लेकर प्रस्तुत करती है।
Quick Link
  • उत्तराखंड
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Address: New Colony, Ranjawala, Dehradun – 248001
Phone: +91 9760762885
Email:
uttarakhandabtaknews@gmail.com
© Uttarakhand Ab Tak. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?