By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
Notification Show More
Font ResizerAa
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Reading: उत्तराखंड वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने घायल युवा जंगली हाथी को उसके झुंड से मिलाया
Share
Font ResizerAa
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Search
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने घायल युवा जंगली हाथी को उसके झुंड से मिलाया

Lokesh Badoni
Last updated: October 31, 2026 4:04 am
Lokesh Badoni Published October 31, 2026
Share
SHARE
  • वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञों ने उत्तराखंड वन विभाग के पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर युवा हाथी के उपचार में सहयोग दिया। संयुक्त प्रयासों से हाथी दोबारा खड़ा होने में सक्षम हुआ और अपने झुंड से जा मिला।

देहरादून: वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक सुखद सफलता के तहत, उत्तराखंड के पीपल पड़ाव वन रेंज में एक गहरे गड्ढे में फँसे लगभग आठ वर्षीय जंगली हाथी को उत्तराखंड वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के संयुक्त प्रयासों से बचाया गया, उसका उपचार किया गया और अंततः उसे उसके झुंड से मिलने में सफलता मिली। 25 अक्टूबर की रात इस हाथी को लगभग एक मीटर गहरे गड्ढे से बाहर निकाला गया था। हालाँकि, सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बावजूद वह स्वयं खड़ा नहीं हो पा रहा था। वन विभाग की पशु चिकित्सा टीम ने उसका उपचार शुरू किया और उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी। बाद में, अतिरिक्त विशेषज्ञता और सहायता के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञों को भी इस प्रयास में शामिल किया गया।

वाइल्डलाइफ एसओएस की एक टीम घटनास्थल पर पहुँची और वन विभाग के पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर हाथी की स्थिति का आकलन किया तथा आगे के उपचार की योजना बनाई। जाँच में उसकी पीठ के ऊपरी हिस्से में सूजन पाई गई। एक्स-रे में कोमल ऊतकों में चोट की आशंका जताई गई, जिसमें रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से के प्रभावित होने की संभावना भी थी। हाथी अपने चारों पैरों को हिला पा रहा था, लेकिन अगले पैरों पर शरीर का भार नहीं संभाल पा रहा था और स्वयं खड़ा होने में असमर्थ था।

वन विभाग की पशु चिकित्सा टीम के साथ मिलकर काम करते हुए, वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञों ने हाथी को आवश्यक सहायक उपचार प्रदान किया। इसमें शरीर में पानी की कमी दूर करने के लिए तरल पदार्थ देना, प्रभावित हिस्से पर लेजर थेरेपी, दर्द प्रबंधन और घाव की ड्रेसिंग शामिल थी। जेसीबी और स्लिंग की मदद से हाथी को खड़ा करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन शुरुआती कोशिश में वह अपने शरीर का भार संभालने में असमर्थ रहा।

उपचार और लगातार निगरानी के दौरान हाथी की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई देने लगे। उसने लगभग 8–10 किलोग्राम हरा चारा और 15–20 लीटर पानी का सेवन किया। इसके बाद जेसीबी और स्लिंग की मदद से किए गए एक अन्य प्रयास में हाथी बिना किसी सहारे के स्वयं खड़ा होने में सफल रहा। हालाँकि, उसके दाहिने अगले पैर में सूजन और लंगड़ाहट देखी गई, जिसके लिए पशु चिकित्सा टीम ने आवश्यक उपचार और निगरानी जारी रखी। उसे हरा चारा और गन्ना भी दिया गया। एक बेहद उत्साहजनक घटनाक्रम में, हाथी बाद में अपने झुंड की ओर चला गया और उससे जा मिला।

उत्तराखंड वन विभाग के डीएफओ एवं भारतीय वन सेवा के अधिकारी श्री उमेश चंद्र तिवारी ने कहा, “जब हाथी को गड्ढे से बाहर निकाला गया, तब उसका स्वयं खड़ा न हो पाना हमारी टीम के लिए बड़ी चिंता का विषय था। हमारे पशु चिकित्सकों ने लगातार उसकी देखभाल की और आवश्यक उपचार प्रदान किया। वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञों को इस प्रयास में शामिल करने से उपचार को और मजबूती मिली। हाथी को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होते और अंततः अपने झुंड से मिलते देखना हम सभी के लिए बेहद सुखद अनुभव है। हम इस पूरे प्रयास में वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा दिए गए सहयोग और विशेषज्ञता की सराहना करते हैं। यह घटना वन्यजीव आपात स्थितियों में आपसी सहयोग के महत्व को भी दर्शाती है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस में संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक बैजू राज एम.वी. ने कहा, “यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति थी, खासकर इसलिए क्योंकि गड्ढे से सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बावजूद हाथी स्वयं खड़ा नहीं हो पा रहा था। हमारी टीम ने उत्तराखंड वन विभाग के पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर उसके उपचार में सहयोग दिया और उसकी गतिशीलता वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किया। जिस क्षण हाथी बिना किसी सहारे के स्वयं खड़ा हुआ, वह हम सभी के लिए बेहद उत्साहजनक था। इसके बाद उसका अपने झुंड से जा मिलना इस पूरे प्रयास का सबसे सुखद परिणाम है। हम वन विभाग की सक्रिय पहल और इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उसके साथ मिलकर काम करने के अवसर के लिए आभारी हैं।”

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा, “हर वन्यजीव बचाव अभियान अपने साथ कई चुनौतियाँ लेकर आता है, लेकिन किसी घायल वन्यजीव को स्वस्थ होकर वापस उसके प्राकृतिक परिवेश में लौटते देखना सबसे अधिक सुखद होता है। इस युवा हाथी का सफर, गड्ढे में फँसे होने और स्वयं खड़े न हो पाने से लेकर दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने और अपने झुंड से मिलने तक, यह दर्शाता है कि सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हम उत्तराखंड वन विभाग की वन्यजीव कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं और इस प्रयास में उसकी टीम के साथ मिलकर काम करने पर गर्व महसूस करते हैं। हाथी का अपने झुंड के साथ वापस होना हम सभी के लिए सबसे बड़ी खुशी की बात है।”

यह सफल अभियान समय पर पशु चिकित्सा सहायता, विशेषज्ञता और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय के महत्व को दर्शाता है। हाथी की शुरुआती स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन उत्तराखंड वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के संयुक्त प्रयासों से उसे दोबारा खड़े होने और अपने प्राकृतिक सामाजिक समूह यानी झुंड में लौटने में मदद मिली।

वाइल्डलाइफ एसओएस देशभर में वन विभागों और अन्य सरकारी प्राधिकरणों के साथ मिलकर वन्यजीव बचाव, पशु चिकित्सा देखभाल, पुनर्वास और संरक्षण के क्षेत्र में काम करता है। उत्तराखंड वन विभाग के साथ यह सहयोग एक बार फिर दर्शाता है कि वन्यजीव आपात स्थितियों में सरकारी विभागों और विशेषज्ञ संरक्षण संगठनों के बीच तालमेल किस तरह वन्यजीवों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में मददगार साबित हो सकता है।

You Might Also Like

विख्यात एवं विश्व प्रसिद्ध सितार वादक ध्रुव बेदी के सितार से निकली हर तरंग ने “विरासत” को बना दिया दीवाना

विशिष्ठ अतिथि विधायक सविता कपूर ने बढ़ाई महोत्सव-मेले की शोभा

डीआईटी विश्वविद्यालय ने डिज़ाइन उत्कृष्टता एवं उद्योग तत्परता कार्यक्रम के लिए केपीएमजी इन इंडिया के साथ किया करार

टीएचडीसीआईएल, ऋषिकेश में नए श्रम कोड पर राष्ट्रीय सम्मेलन ‘विमर्श-2026’ का आयोजन

मधुर बहार से महक उठी विरासत की सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • उत्तराखंड वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने घायल युवा जंगली हाथी को उसके झुंड से मिलाया
  • द किंग्स स्कूल कैंटरबरी, बेंगलुरु ने नन्हे बच्चों को अपनी खास पोशन लैबोरेटरी में आमंत्रित किया
  • विख्यात एवं विश्व प्रसिद्ध सितार वादक ध्रुव बेदी के सितार से निकली हर तरंग ने “विरासत” को बना दिया दीवाना
  • विशिष्ठ अतिथि विधायक सविता कपूर ने बढ़ाई महोत्सव-मेले की शोभा
  • डीआईटी विश्वविद्यालय ने डिज़ाइन उत्कृष्टता एवं उद्योग तत्परता कार्यक्रम के लिए केपीएमजी इन इंडिया के साथ किया करार

Recent Comments

No comments to show.

Categories

  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • शिक्षा
"उत्तराखंड अब तक" हिंदी समाचार वेबसाइट है जो उत्तराखंड से संबंधित ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज, और संस्कृति को लेकर प्रस्तुत करती है।
Quick Link
  • उत्तराखंड
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Address: New Colony, Ranjawala, Dehradun – 248001
Phone: +91 9760762885
Email:
uttarakhandabtaknews@gmail.com
© Uttarakhand Ab Tak. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?