देहरादून 2 सितम्बर – देहरादून में आईएसबीटी बाईपास स्थित संस्कृति विभाग उत्तराखण्ड के प्रेक्षागृह में मैती संस्था, हैस्को एवं उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वाधान में ‘बुग्याल दिवस 2026’ समारोह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री सुबोध उनियाल मा० कैबिनेट मंत्री – वन, चिकित्सा, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, निर्वाचन, विधायी एवं संसदीय कार्य उत्तराखण्ड सरकार, विशिष्ट अतिथि – हैस्को संस्थापक पद्म भूषण अनिल प्रकाश जोशी, उत्तराखण्ड की प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री जागर साम्राज्ञी बसंती बिष्ट, मैती संस्था के संस्थापक पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक, उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक दुर्गेश पंत उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस समय ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय में ग्लेशियरों का पिघलना, भूस्खलन, बादल फटने के कारण भयंकर बाढ़ एवं अन्य विभिन्न कारणों से सम्पूर्ण हिमालय पर मंडरा रहा पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का खतरा एक गम्भीर समस्या एवं बहुत बड़ी चिंता की बात है। इस समस्या को केवल सरकार के प्रयासों से हल नहीं किया जा सकता है, बल्कि आम नागरिकों एवं सरकार के संयुक्त प्रयासों से ही इस गम्भीर समस्या का हल निकाला जा सकता है। सेमीनार में सभी विशिष्ट अतिथियों एवं पर्यावरण के क्षेत्र में शोध कार्य करने वाले विभिन्न शिक्षण एवं अन्य संस्थानों के पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने बुग्यालों के अस्तित्व बचाये रखने के लिए विभिन्न सुझाव दिए। सेमिनार में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र -छात्राएं, संयुक्त नागरिक संगठन देहरादून एवं अन्य विभिन्न सामाजिक एवं नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर संयुक्त नागरिक संगठन देहरादून के शिष्टमंडल में शामिल श्री दिनेश भण्डारी, गिरीश चन्द्र भट्ट, नरेश चन्द्र कुलाश्री, अवधेश शर्मा, उमेश्वर सिंह रावत, राजीव शर्मा खनसाली एवं ठा० शेर सिंह थापली ने मा० कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल से भेंटकर उन्हें माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार उत्तराखण्ड के बुग्यालों के संरक्षण के लिए ठोस मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) तैयार करने हेतु लिखित सुझाव पत्र सौंपा गया। माननीय कैबिनेट मंत्री ने शिष्टमंडल को आश्वासन दिया कि संयुक्त नागरिक संगठन के द्वारा दिए गए सुझावों पर यथोचित विचार कर बुग्यालों के संरक्षण के उपायों में इन सुझावों को शामिल किया जाएगा।
