परिवार राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। परिवार को संस्कारित और देशभक्त बनाने के लिए बच्चों को बड़ों का सम्मान, सात्विक दिनचर्या, और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दें। भारतीय संस्कृति, स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों और मातृभाषा के प्रति प्रेम जागृत कर उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ किया जा सकता है
परिवार का मुखिया जिस प्रकार अपने परिवार के सदस्यों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए भोजन, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करता है, उसी प्रकार उसका यह भी कर्तव्य है कि वह परिवार के सभी सदस्यों के आध्यात्मिक विकास का ध्यान रखे।
घर में उपासना, प्रार्थना, स्वाध्याय और सत्संग का वातावरण बनाना परिवार की सबसे बड़ी सेवा है। बच्चों और बड़ों में उपासना के प्रति रुचि जगाने का सबसे प्रभावी तरीका यह है कि परिवार का मुखिया स्वयं नियमित उपासना करे। जब बड़े अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, तब परिवार के अन्य सदस्य भी सहज ही प्रेरित होते हैं।संस्कारवान वातावरण में पले-बढ़े बच्चे जीवन में अपने कर्तव्यों का पालन करना सीखते हैं। बेटियाँ जहाँ भी जाएँगी, अपने सद्गुणों, शालीनता और कर्तव्यनिष्ठा से सबकी प्रिय बनेंगी। पुत्र भी माता-पिता, भाई-बहनों, पत्नी और बच्चों के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को समझेंगे, व्यसनों से दूर रहेंगे और परिवार को सुख, शांति तथा सम्मान प्रदान करेंगे।इसलिए प्रत्येक विचारशील अभिभावक का प्रयास होना चाहिए कि वह अपने बच्चों को आस्तिक, सदाचारी और संस्कारवान बनाए। ऐसे माता-पिता वास्तव में समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता होते हैं।
त्योहारों और पारिवारिक उत्सवों में मिल-जुलकर खुशी मनाएं।समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करने के लिए जरूरतमंदों की मदद करने और सामाजिक कार्यों में बच्चों को भी शामिल करें। परिवार में संस्कारों और राष्ट्रभक्ति के बीज बोने के लिए
अपने घर को उपासना, संस्कार और सद्भाव का मंदिर बनाएं तथा आने वाली पीढ़ी को श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की अमूल्य विरासत दें।