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पुरोला उतरकाशी 12/6/2026रामा सिराईं(रंवाई घाटी ) के आराध्य ईष्टदेव श्री कपिल मुनि खंडासूरी महाराज के भव्य मंदिर की शिखर कलश स्थापना मूल थान ग्राम गुंदियाट गांव में दिनांक 15/6/2026से 17/06/2026 आयोजित किया जा रहा है। जिसमें गुन्दियाट गांव,रौन, छानिका, डिकाल गांव ,अंन्दुणी आदि गांवों के त्रिदिवसीय अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है जिसमें दूर दराज से भी भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलेगी और स्थानीय लोक-संस्कृति भजन संध्या आदि भी देखने को मिलेगी।17/6/2026 को कलश व ध्वजा स्थापना करने के बाद समिति के द्वारा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा, इस पावन अवसर पर दूर दराज से भक्त और ध्याणी अपने इष्ट देवताओं के दर्शन करेंगे। आपको बताते चलें कि श्री कपिल मुनि महाराज ऋषि और सांख्य दर्शन के प्रणेता थे, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। कपिल मुनि महाराज ने सांख्य शास्त्र के ज्ञान द्वारा अपनी माता देवहूति का उद्धार किया भागवत महापुराण के अनुसार
इंद्रदेव ने यज्ञ का घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। राजा सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को खोजते हुए वहाँ पहुँचे और कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इस पर क्रोधित होकर मुनि ने अपनी योग अग्नि से उन सभी पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया।बाद में, राजा सगर के वंशज भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए घोर तपस्या की और देवी गंगा को पृथ्वी पर लाए। गंगा के पवित्र जल और कपिल मुनि की कृपा से ही उन साठ हजार पुत्रों की आत्मा को मुक्ति मिली।इस प्रकार से भगवान कपिल मुनि महाराज के पावन दर्शन से ज्ञान योग व समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
पुरोला उतरकाशी 12/6/2026
रामा सिराईं(रंवाई घाटी ) के आराध्य ईष्टदेव श्री कपिल मुनि खंडासूरी महाराज के भव्य मंदिर की शिखर कलश स्थापना मूल थान ग्राम गुंदियाट गांव में दिनांक 15/6/2026से 17/06/2026 आयोजित किया जा रहा है। जिसमें गुन्दियाट गांव,रौन, छानिका, डिकाल गांव ,अंन्दुणी आदि गांवों के त्रिदिवसीय अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है जिसमें दूर दराज से भी भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलेगी और स्थानीय लोक-संस्कृति भजन संध्या आदि भी देखने को मिलेगी।
17/6/2026 को कलश व ध्वजा स्थापना करने के बाद समिति के द्वारा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा, इस पावन अवसर पर दूर दराज से भक्त और ध्याणी अपने इष्ट देवताओं के दर्शन करेंगे। आपको बताते चलें कि श्री कपिल मुनि महाराज ऋषि और सांख्य दर्शन के प्रणेता थे, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। कपिल मुनि महाराज ने सांख्य शास्त्र के ज्ञान द्वारा अपनी माता देवहूति का उद्धार किया भागवत महापुराण के अनुसार
इंद्रदेव ने यज्ञ का घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। राजा सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को खोजते हुए वहाँ पहुँचे और कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इस पर क्रोधित होकर मुनि ने अपनी योग अग्नि से उन सभी पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया।बाद में, राजा सगर के वंशज भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए घोर तपस्या की और देवी गंगा को पृथ्वी पर लाए। गंगा के पवित्र जल और कपिल मुनि की कृपा से ही उन साठ हजार पुत्रों की आत्मा को मुक्ति मिली।इस प्रकार से भगवान कपिल मुनि महाराज के पावन दर्शन से ज्ञान योग व समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
इंद्रदेव ने यज्ञ का घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। राजा सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को खोजते हुए वहाँ पहुँचे और कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इस पर क्रोधित होकर मुनि ने अपनी योग अग्नि से उन सभी पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया।बाद में, राजा सगर के वंशज भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए घोर तपस्या की और देवी गंगा को पृथ्वी पर लाए। गंगा के पवित्र जल और कपिल मुनि की कृपा से ही उन साठ हजार पुत्रों की आत्मा को मुक्ति मिली।इस प्रकार से भगवान कपिल मुनि महाराज के पावन दर्शन से ज्ञान योग व समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

