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उत्तराखंडसामाजिकहरिद्वार

सेवा भारती हरिद्वार का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम सेवा संस्कार, समरसता व वैदिक मंत्रोच्चार के सम्पन्न

Lokesh Badoni
Last updated: April 21, 2026 11:13 am
Lokesh Badoni Published April 21, 2026
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 हरिद्वार

सेवा भारती उत्तराखंड, जिला हरिद्वार का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम आज ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के ऑडिटोरियम में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष एडवोकेट संजय जैन ने की।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के पश्चात सेवा बस्ती के बच्चों ने स्वागत गीत का गायन किया।
प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र जी ने अपने 40 मिनट के सारगर्भित उद्बोधन में संघ के शताब्दी वर्ष और सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उनके वक्तव्य के प्रमुख अंश:

“सेवा भारती केवल एक संगठन नहीं, भारत के सनातन मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति है। हमारा शास्त्र कहता है: सर्वे भवन्तु सुखिनः। यही भाव लेकर डॉ. हेडगेवार जी ने 1925 में संघ का बीजारोपण किया था। आज 100 वर्ष बाद वह वटवृक्ष बन चुका है जिसकी छाया में सम्पूर्ण समाज बैठ सकता है।

सेवा का अर्थ केवल अभावग्रस्त को कुछ दे देना नहीं है। सच्ची सेवा वह है जो लेने वाले को देने वाला बना दे। आप संस्कार केंद्रों में जो बच्चे पढ़ रहे हैं, कल वे ही समाज के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। यही सेवा से समरसता और समरसता से संगठन का मार्ग है।

शताब्दी वर्ष में सरसंघचालक जी ने पंच परिवर्तन का मंत्र दिया है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि इन पांच संकल्पों को अपने जीवन में उतारें, पहला परिवर्तन: स्व का बोध*
हम अपनी जड़ों से कट रहे हैं। अपनी भाषा, अपना भोजन, अपनी वेशभूषा, अपने त्योहारों पर गर्व करना सीखें। जो समाज अपने स्व को भूल जाता है, वह काल के प्रवाह में बह जाता है। हर घर में सप्ताह में एक दिन सामूहिक भजन, रामायण या गीता का पाठ अवश्य हो। दूसरा परिवर्तन: सामाजिक समरसता*
हिंदू समाज एक शरीर है। शरीर के किसी अंग में पीड़ा हो तो पूरा शरीर बेचैन होता है। अस्पृश्यता, ऊंच-नीच का भाव हमारे समाज का कोढ़ है। इसे समाप्त करना ही होगा। सेवा बस्ती में जाएं, वहां के बच्चों को अपने घर भोजन पर बुलाएं, उनके साथ बैठकर खाएं। जब तक अंतिम व्यक्ति को गले नहीं लगाएंगे, तब तक भारत माता पूर्ण वैभव को प्राप्त नहीं करेगी। तीसरा परिवर्तन: कुटुंब प्रबोधन,पश्चिमी देशों में परिवार टूट रहे हैं। हमारा सौभाग्य है कि अभी भी हमारे यहां संयुक्त परिवार की परंपरा बची है। इसे बचाना है। माता-पिता का सम्मान, बड़ों की आज्ञा का पालन, बच्चों को संस्कार देना, यह हर घर का दायित्व है। मोबाइल और टीवी ने संवाद खत्म कर दिया है। हर परिवार शाम को एक घंटा ‘नो गैजेट आवर’ मनाए, साथ बैठे, बात करे।चौथा परिवर्तन: पर्यावरण संरक्षण*
हमारी संस्कृति में नदी को मां, पेड़ को देवता कहा गया है। गंगा मैली हो रही है, यह हम सबके लिए शर्म की बात है। हर स्वयंसेवक संकल्प ले कि वर्ष में कम से कम 5 पेड़ लगाएगा और उन्हें बड़ा करेगा। प्लास्टिक का उपयोग बंद करें। जल बचाएं। प्रकृति बचेगी तभी जीवन बचेगा। पांचवा परिवर्तन: नागरिक कर्तव्य*
अधिकार मांगने से पहले कर्तव्य निभाना सीखें। सड़क पर थूकना नहीं, कतार तोड़ना नहीं, बिजली-पानी बचाना, कर सही समय पर चुकाना, ये छोटे-छोटे काम ही राष्ट्र निर्माण हैं। स्वच्छ भारत केवल सरकार का काम नहीं, हर नागरिक का धर्म है।

सेवा भारती के कार्यकर्ता इन पांच बिंदुओं को सेवा बस्ती के हर घर तक ले जाएं। 2025 से 2026 का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का वर्ष नहीं, विस्तार का वर्ष है। हरिद्वार जिले में लक्ष्य है कि एक भी बस्ती ऐसी न बचे जहां सेवा कार्य न पहुंचा हो।

अंत में मैं इतना ही कहूंगा कि संघ ने 100 वर्ष में जो पौधा लगाया था, आज वह विशाल वृक्ष है। अब इस वृक्ष को फल देना है। वह फल है: समरस, समर्थ, स्वाभिमानी भारत। और यह कार्य सेवा के मार्ग से ही पूर्ण होगा।
जिला मंत्री श्रीमती सरिता सिंह ने वर्ष 2025-26 का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि हरिद्वार जिले की 34 सेवा बस्तियों में सेवा भारती द्वारा कुल 38 प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 22 संस्कार केंद्र, 19 सिलाई प्रशिक्षण एवं कमप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र, 6 सामाजिक कार्य,चलित चिकित्सालय के द्वारा हरिद्वार नगर की 11 सेवा बस्तियों में स्वास्थ्य सेवा कार्य, एक चिकित्सा केंद्र तथा 2 योग व आत्मरक्षा प्रशिक्षण सम्मिलित हैं। गत वर्ष में 1,350 बच्चों को निशुल्क शिक्षा सामग्री वितरित की गई। 420 महिलाओं को सिलाई एवं ब्यूटीशियन प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया गया। 76 निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 8,600 से अधिक रोगियों को लाभ पहुंचाया गया। बाढ़ प्रभावित लक्सर क्षेत्र में 1,100 परिवारों को राशन किट एवं 2,500 लोगों को कपड़े उपलब्ध कराए गए।मंच का संचालन अनमोल गर्ग जी एवं सरिता जी ने किया। ।हरिद्वार जिले के विभिन्न सेवा केन्द्रों के बालक बालिकाओं ने योग एवं धार्मिक सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
जिला मंत्री श्रीमती सरिता सिंह ने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी बंधु एवं भगिनियों एवं ऋषिकुल मैडिकल कॉलेज के महानिदेशक को परिसर के लिए धन्यवाद ज्ञपित किया। आरती जी के द्वारा
कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर प्रांत सेवा प्रमुख श्री पवन जी, प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रवीण गर्ग जी, प्रांत मंत्री श्री विमलकांत मिश्रा जी,सह प्रांत मंत्री अमरीष जी, सत्यप्रकाश बंगवाल जी, विभाग प्रचारक श्री राकेश जी, विभाग सेवा प्रमुख श्री वीर प्रताप जी, जिला संघ चालक श्री डॉ यतीन्द्र नागयान जी, डॉ नीता नागयान जी, नगर प्रचारक शुभम जी,नगर कार्यवाह डॉ अनुराग जी , सह नगर कार्यवाह बलदेव जी, अमित जी , संजय पंवार जी, जे पी जुयाल जी, कुलदीप जी, सुशील जी, विकास जैन जी, पिंकी अंथवाल जी,नीलम चौधरी जी,अजय शर्मा जी, अजय सिंह जी, हेमराज जी, आरती जी, शालिनी जी , योशिता जी, रेखा सैनी जी, उमा सिंघल जी, रोहित चौहान जी, आदेश चौहान जी, आशुतोष शर्मा जी, संदीप गोयल जी, संजीव जी , रेनू जी, अजय श्रीवास्तव जी,हरीश शर्मा जी,सुधा जी,सुभाष हंस जी एवं सभी केन्द्रों की शिक्षिकाएं एवं नगर व जिले के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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