शिवरात्रि एक रात है जो सृष्टि के कल्याण, शिव-शक्ति के मिलन और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का उत्सव मनाती है, जिसमें भक्त रातभर जागकर शिव-स्मरण करते हैं। आपको बताते चलें कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी शुभ रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था. साल भर में 12 शिवरात्रियां आती हैं, लेकिन महाशिवरात्रि को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.
यमुना घाटी के रामा सिराई में स्थित सिद्धपीठ कमलेश्वर महादेव मन्दिर में सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है।
कमलेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना व जलाभिषेक को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। शिव भजनों की गूंज व हर-हर महादेव के जयकारों के साथ हजारों लोगों ने मन्दिर में पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक किया। इस बार मन्दिर में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ उमड़ रही है। पुजारी पंडित रमेश विजलवाण ने कहा यह पौराणिक शिव मंदिर सम्पूर्ण रंवाई घाटी के आस्था का केंद्र है। यहां पुरोला, मोरी, नौगांव सहित बनाल, ठकराल, जौनपुर, जौनसार तक से श्रद्धालु मनौती मांगने आते हैं तथा शिवरात्रि के अलावा श्रावण मास में लोग पाठ-पूजा के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। जलाभिषेक करते हैं। पूजा अर्चना एवं जलाभिषेक के लिए सुबह से ही भगवान शिव के द्वार पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लंबी कतार में खड़े श्रद्धालु अपनी-अपनी बारी का इंतजार करते रहे, जिसके बाद बारी आने पर विधिवत पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया तथा भगवान शिव से सुख समृद्धि एवं खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त किया।