उत्तराखंड में बढ़ती वनाग्नि की घटनाएं चिंता का कारण बना है। उत्तराखंड के अधिकांश जनपदों के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में इजाफा हो रहा है जंगल की आग अब केवल क्षेत्रीय संकट न होकर वैश्विक समस्या बन गई है। उत्तराखंड में वनाग्नि की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पहली बार फॉरेस्ट फायर पर फीचर फिल्म बनी है जो कि वनों को आग से बचाने के संघर्ष पर आधारित विश्व की पहली हिंदी पिक्चर फिल्म है, फिल्म की कहानी विश्व पर्यावरण दिवस के एक कार्यक्रम से शुरू होती है जिसमें डीएफओ डायरी फॉरेस्ट वारियर्स 24 अक्टूबर को रिलीज हो गई है। और उत्तराखंड के देहरादून ऋषिकेश हरिद्वार आदि जगहों पर बड़ी संख्या में लोगों ने पसंद किया है, यह एपिसोड फिल्म उन लोगों की वीरता और संघर्ष को समर्पित थे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा की। डीएफओ डायरी फॉरेस्ट ,उत्तराखंड के घने जंगलों में पर्यावरण संरक्षण की कठिन संघर्ष पर केंद्रित है इसमें वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों की साहसिक कहानियों को जीवंत रूप में दर्शाया गया है, ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने फिल्म के पोस्ट का अनावरण किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे इस अवसर पर स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा प्रकृति मनुष्य और वन्य जीव की संरक्षक है पेड़ पौधे नदी ग्लोशियर पर्वत आदि से हमारा अस्तित्व है यदि प्रकृति के साथ हम छेड़ छाड़ करेंगे तो हमारा अस्तित्व खतेरे में पड़ जाएगा। फिल्म के लेखक निर्देशक महेश भट्ट निर्माता टी आर विज्जूलाल ने स्वामी चिदानंद सरस्वती से भेंट कर आशीर्वाद ग्रहण किया। आपको बताते चलें कि यह फिल्म उत्तराखंड के घने जंगलों में पर्यावरण संरक्षण के कठिन संघर्ष पर केंद्रित है और इस फिल्म वन रक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में वन संपदा को सुरक्षित रखा है, फिल्म के लेखक निर्देशक महेश भट्ट निर्माता टी आर संजू लाल कॉन्सेप्ट बीजू लाल पटकथा ऋतुराज , संगीत अमित सी कपूर विनायक कोचर मनु चौहान ने दिया है