By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
Notification Show More
Font ResizerAa
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Reading: उत्तराखंड के बारहनाजा मिलेट्स के उत्पादन को नए तौर- तरीकों से उत्पादित करने तथा पर्वतीय क्षेत्र को फल – पट्टी के रूप में डेवलप करने की सरकार की बड़ी पहल : गणेश जोशी
Share
Font ResizerAa
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Search
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड के बारहनाजा मिलेट्स के उत्पादन को नए तौर- तरीकों से उत्पादित करने तथा पर्वतीय क्षेत्र को फल – पट्टी के रूप में डेवलप करने की सरकार की बड़ी पहल : गणेश जोशी

Lokesh Badoni
Last updated: April 18, 2025 9:07 am
Lokesh Badoni Published April 18, 2025
Share
SHARE

नीतिगत और संस्थागत दोनों तरह के सहयोग से इसका वैज्ञानिक पद्धति से उत्पादन करने को किसानों को किया जा रहा है प्रेरित

देहरादून। कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि बारहनाजा मिलेट्स उत्पादन उत्तराखंड की मौलिक पहचान रही है। इसी को देखते हुए सरकार ने मंडुवा, कौणी, झंगोरा जैसे मिलेट्स को पुनः आधुनिक और वैज्ञानिक तौर – तरीकों से उत्पादित करने के लिए उत्तराखंड मिलेट्स पॉलिसी 2025 – 26 लाई है। जो 11 पर्वतीय जनपदों में लागू होगी।

मंत्री ने कहा कि इसी तरह से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र को फल- पट्टी के रूप में डेवलप करने के लिए कीवी और ड्रैगन फ्रूट्स जैसे आधुनिक फलों के उत्पादन तथा सेब के उत्पादन को विस्तारित करने के लिए सरकार द्वारा किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। इसी के चलते सरकार ने उत्तराखंड कीवी नीति, ड्रैगन फ्रूट्स खेती योजना, मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना और सेब की तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना लाई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से पहाड़ में लोगों को स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार मिलेगा जो पलायन जैसी समस्या की रोकथाम में भी प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से सहायक सिद्ध होगा।

 

उत्तराखण्ड स्टेट मिलेट्स पालिसी 2025-26

इस पालिसी के अन्तर्गत दो चरणो में कार्य किया जायेगा।

प्रथम चरण में 24 विकास खण्डों में 30000 हैक्टेयर क्षेत्रफल पर

2025-26 से 2027-28 तक कार्य किया जाएगा।

द्वितीय चरण में 44 विकासखण्डों में 40000 है० क्षेत्रफल पर 2028-29 से 2030-31 तक कार्य किया जाएगा।

मिलेट् पॉलिसी प्रदेश के 11 जनपदों में लागू होगी।

उत्तराखण्ड स्टेट मिलेट्स पॉलिसी के अन्तर्गत कुल रु० 134.89 करोड की कार्य योजना का संचालन किया जायेगा।

इसमें मण्डुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना फसलों को सम्मिलित किया गया है।

जिसके तहत चयनित मिलेट फसलों के बीज एंव जैव उर्वरक को 80 प्रतिशत अनुदान पर कृषकों को वितरित किया जायेगा।

कृषकों को मिलेट्स की बुवाई करने पर प्रोत्साहन धनराशि दी जायेगी।

पंक्ति बुवाई पर रु0 4000 प्रति हैक्टेयर तथा सीधी बुवाई पर रु0 2000 प्रति हैक्टेयर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

समूह को मिलेट्स फसलों के अन्तग्रहण पर रू 150 कुंटल के स्थान पर रु० 300 प्रति कुंटल कुन्तल की दर से प्रोत्साहन धनराशि का भुगतान किया जायेगा।

प्रत्येक वर्ष मिलेट्स पॉलिसी के तहत विकासखण्ड स्तर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए 02 कृषक समूह को पुरस्कृत किया जायेगा।

प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर 01 मिलेट प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की जायेगी।

मिलेट्स फसलो के संवर्धन और प्रोत्साहन के लिए प्रदेश में न्यूट्री हब की एक परियोजना प्रबंधन ईकाई गठित की जाऐगी।

इसमें थर्ड पार्टी आडिट का भी प्रावधान किया गया है।

योजना के तहत 3 लाख से अधिक किसानों को लाभ देने का लक्ष्य है।

श्रीअन्न फूड पार्क की स्थापना के लिए भी कार्य किया जाऐगा।

 

उत्तराखण्ड कीवी नीति

प्रस्तावित नीति वर्ष 2025-26 से 2030-31 (6 वर्ष) तक रहेगी।

कीवी उद्यान स्थापना के लिए कुल लागत 12 लाख प्रति एकड़ का 70 प्रतिशत राजसहायता का प्राविधान किया गया है। जिसमें 30 प्रतिशत लाभार्थी का अंश होगा।

हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर को छोड़कर राज्य के शेष 11 जनपदों में इस नीति का क्रियान्वयन किया जायेगा।

कीवी पालिसी के अन्तर्गत कुल रु0 894 करोड की कार्ययोजना का संचालन किया जायेगा। न्यूनतम भूमि 02 नाली (0.04है0) तथा अधिकतम भूमि 100 नाली (2है0) की पात्रता होगी।

कीवी नीति के तहत 3500 हैक्टेयर क्षेत्रफल को आच्छादित किये जाने का लक्ष्य है, जिसमे करीब 17500 किसान लाभान्वित होंगे।

वर्तमान में राज्य के लगभग 683 हैक्टेयर के क्षेत्रफल में 382 मैट्रिक टन कीवी का उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान उत्पादन को बढ़ाकर 33000 मैट्रिक टन एवं उत्पादकता को बढ़ाकर लगभग 08 मैट्रिक टन प्रति हैक्टेयर करने का लक्ष्य प्रस्तावित है।

 

ड्रैगन फ्रूट खेती की योजना

प्रस्तावित योजना वर्ष 2025-26 से 2027-28 (3 वर्ष) तक रहेगी।

यह योजना राज्य के 07 जनपदों (उधमसिंहनगर, हरिद्वार, नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, देहरादून, टिहरी) में लागू होगी।

राज्य में ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को आधुनिक / वैज्ञानिक पद्यति के माध्यम से बढ़ावा दिये जाने हेतु मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजनान्तर्गत स्वीकृत की गयी है।

प्रस्तावित योजना में उद्यान स्थापना के लिए 08 लाख प्रति एकड़ का 80 प्रतिशत राजसहायता का प्राविधान है एवं शेष 20 प्रतिशत कृषक द्वारा वहन किया जाएगा।

न्यूनतम भूमि 05 नाली (0.10है0) तथा अधिकतम भूमि 20 नाली (0.40है0) की पात्रता होगी।

आगामी तीन वर्षों में योजना के लिए 15 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गयी है।

वर्तमान में राज्य के लगभग 35 एकड़ क्षेत्रफल में 70 मै०टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन किया जा रहा है।

प्रस्तावित योजना में वर्तमान परिदृश्य एवं राज्य में ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन की अपार सम्भावनाओं के दृष्टिगत जनपद उधमसिंहनगर, नैनीताल, बागेश्वर, हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी एवं टिहरी को चयनित किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक 228 एकड क्षेत्रफल का आच्छादन किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें 12 से 15 मैट्रिक टन प्रति हैक्टेयर की उत्पादकता रहेगी।

इसमें राज्य के लगभग 450 कृषक लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (CMFME)

उत्तराखण्ड राज्य द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के अन्तर्गत पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों को दिनाँक 22.09.2022 के पश्चात मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (CMFME) के अर्न्तगत अतिरिक्त 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम रू0 5 लाख टॉपअप दिया जा रहा है।

पूर्व में इस योजनान्तर्गत सार्टिंग / ग्रेडिंग इकाईयों को सम्मिलित नहीं किया गया था।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) योजनान्तर्गत राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दिनाँक 22.09.2022 के पश्चात (जनपद- उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा का समस्त क्षेत्र, नैनीताल पर्वतीय क्षेत्र (हल्द्वानी व रामनगर को छोड़कर समस्त क्षेत्र), देहरादून पर्वतीय क्षेत्र (सहसपुर, रायपुर, डोईवाला व विकासनगर को छोड़कर समस्त क्षेत्र) में स्थापित सार्टिंग / ग्रेडिंग इकाईयों को भी मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (CMFME) के अन्तर्गत अतिरिक्त 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम रू0 5.00 लाख टॉपअप दिया जाऐगा।

इस योजना की स्वीकृति के बाद कुल 780 इकाईयों को लाभ मिलेगा।

इन इकाईयो की स्थापना से पर्वतीय क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा और पलायन रुकेगा।

राज्य में सेब के तुड़ाई उपरान्त प्रबन्धन योजना

इस योजनान्तर्गत 07 वर्षों (वर्ष 2024-25 से 2031-32) में रू0 129.97 करोड़ की धनराशि का प्राविधान है, जिसमें 22 सी०ए० स्टोरेज एवं 180 सार्टिंग ग्रेडिंग इकाईयों की स्थापना का लक्ष्य है।

यह योजना 11 जनपदों के 76 विकासखण्डों में संचालित होगी।

इस योजनान्तर्गत सार्टिंग ग्रेडिंग इकाई स्थापना के लिए व्यक्तिगत क्षेत्र में 15 प्रतिशत व एफपीओ इत्यादि के लिए 35 प्रतिशत टॉपअप दिया जाना है।

वर्ष 2026-27 में व्यक्तिगत क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत एवं एफपीओ इत्यादि के लिए 70 प्रतिशत राजसहायता होगी।

Control Atmosphere Cold Storage (CA Storage) के लिए व्यक्तिगत क्षेत्रों, पंजीकृत फर्म, पार्टनरशिप फर्मों के लिए कुल 50 प्रतिशत अर्थात अधिकतम कुल रू0 4 करोड़ की राजसहायता प्रदान किया जाना है।

FPOS, SHGS, आदि के लिए 70 प्रतिशत राजसहायता अर्थात रू0 5.70 करोड़ लाख दिया जाना है।

सी०ए० स्टोरेज के लिए स्वयं की भूमि होनी चाहिए या 30 वर्षों की लीज होनी चाहिए।

सार्टिंग ग्रेडिंग इकाई के लिए स्वयं की भूमि होनी चाहिए या 15 वर्षों की लीज होनी चाहिए।

योजना के तहत 22 सीए स्टोरेज और 180 सार्टिंग ग्रेडिंग इकाई स्थापना का लक्ष्य है।

1000 मैट्रिक टन सेब उत्पादक क्षेत्र में सार्टिंग ग्रेडिंग इकाई स्थापित की जाऐगी।

5000 मैट्रिक टन सेब उत्पादक क्षेत्र में सी०ए० स्टोरेज इकाई स्थापित की जाऐगी।

अगले 07 वर्षों में सेब की अति सघन बागवानी योजना के तहत 5000 हैक्टेयर क्षेत्रफल को आच्छादित किया जाऐगा, जिसमें 25 मैट्रिक टन प्रति हैक्टेयर की उत्पादकता होगी।

You Might Also Like

फ्रंटियर ज्वेलर्स एक्सक्लूसिव ने रचा इतिहास, लगातार दूसरे वर्ष जीता राष्ट्रीय पुरस्कार

डीआईटी यूनिवर्सिटी में आचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी ने युवाओं को किया प्रेरित

उत्तराखंड में श्री श्री वेलबीइंग का पहला सेंटर देहरादून में हुआ शुरू

प्रथम श्वास फाउंडेशन ने रचा सेवा का नया कीर्तिमान, मात्र दो महीनों में 8 जनहितकारी परियोजनाओं की सफल श्रृंखला पूरी

पूर्व जिलाध्यक्ष सत्येन्द्र राणा को प्रदेश कार्यकारी सदस्य भाजपा मनोनीत होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • फ्रंटियर ज्वेलर्स एक्सक्लूसिव ने रचा इतिहास, लगातार दूसरे वर्ष जीता राष्ट्रीय पुरस्कार
  • डीआईटी यूनिवर्सिटी में आचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी ने युवाओं को किया प्रेरित
  • उत्तराखंड में श्री श्री वेलबीइंग का पहला सेंटर देहरादून में हुआ शुरू
  • एनएनईएफ और एनएससीबी मेडिकल कॉलेज ने मध्य प्रदेश के पहले सिकल सेल वेलनेस हब का उद्घाटन किया
  • प्रथम श्वास फाउंडेशन ने रचा सेवा का नया कीर्तिमान, मात्र दो महीनों में 8 जनहितकारी परियोजनाओं की सफल श्रृंखला पूरी

Recent Comments

No comments to show.

Categories

  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • शिक्षा
"उत्तराखंड अब तक" हिंदी समाचार वेबसाइट है जो उत्तराखंड से संबंधित ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज, और संस्कृति को लेकर प्रस्तुत करती है।
Quick Link
  • उत्तराखंड
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Address: New Colony, Ranjawala, Dehradun – 248001
Phone: +91 9760762885
Email:
uttarakhandabtaknews@gmail.com
© Uttarakhand Ab Tak. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?