पुरोला/उत्तरकाशी।
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रामा सिराईं पट्टी के आराध्य देव “कपिल मुनि महाराज व खंडासुरि महाराज” का मेला शनिवार को गुन्दियांट गांव थान पर बड़े हर्षाेल्लास व धूमधाम से मनाया गया। मेले में गत वर्षाे की भांति इस वर्ष अधिक भीड़ तो जुटी लेकिन, बारिश ने मेलार्थियों का आंनद किरकिरा कर दिया।देवता के पुजारी महादेव नोटियाल ने विधिवत पूजादृअर्चना कर ग्रामीणों व दूर दराज से आए हुए मेलार्थियों को अपना आशीर्वाद दिया। आपको बताते चलें कि श्रावन मेलों की शुरुआत ग्राम रौन से होती है। 21 गते श्रावण 5 अगस्त को रौन 22 गते को रामा में थोक की जातर मनाई जाती है, जिसमें बैष्टी,पोरा, कन्डियाल गांव,डिकाल गांव व आस पास गांव के लोग डोल दमाउ रणसिंघा के साथ हजारों की संख्या में रामा की जातर में आते हैं। तब कपुवा लगता है। उसके बाद पोरा, कन्डियाल गांव,डिकाल गांव में मेलो का आयोजन होता है। विशेष रूप से रौन गांव के ग्रामीणों द्वारा डोल बाजु के साथ मन्दिर की परिक्रमा रास के द्वारा लगायी जाती है। और 26 व 27 गते श्रावण गुन्दियाट गांव मेलों के साथ मेलों की समाप्ति होती है।आयोजित मेले के साथ कपिल मुनि महाराज व खंडासुरी महाराज के सावन के मेलों का समापन हो जाता है। मेले कफुवा का आयोजन भी किया जाता है। मेले में दुकानदारों द्वारा , जलेबी पकोड़ी अन्य दुकानें सजाई गई थी, जिससे ग्रामीणों ने खूब खरीददारी की। पुजारी पूरण भक्त नोटियाल ने कहा इस प्रकार के आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।इस वर्ष मेले में हजारों की भीड़ होने थी परन्तु बारिश के अधिक होने से मेलों का आनंद किरकिरा हो गया है। वहीं विरेन्द्र नोटियाल ने कहा यह एक पुरानी परंपरा है।इस परंपरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है जिसमें क्षेत्रीय नृत्य और संगीत प्रस्तुतियां शामिल थी। गगन नोटियाल ने कहा रंवाई की संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है इस मेले के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।मेले में विरेन्द्र नोटियाल, पूर्व प्रधान दीपक नोटियाल,आशीष नौटियाल,अनुराग नोटियाल,गगन नोटियाल, हरीश, रमेश विजल्वाण,नवनीत विजल्वाण महेश नोटियाल, नितिन पंवार राष्ट्रवादी , पंकज राणा, मनमोहन बडोनी, अनूप विजल्वाण , जगमोहन विजलवाण, तुषार नोटियाल,शम्भू प्रसाद विजल्वाण , राजेश, विजल्वाण,गौरव नोटियाल,निरज विजलवाण, अनूप नोटियाल, अनूप नोटियाल, ग्रीस नोटीयाल मोहित नौटियाल,राजेन्द्र चौहान,बाजगी प्रेमदास सहित रामा सिंराई कमल सिंराई व दूर दराज से सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे ।
रामा सिराईं पट्टी के आराध्य देव “कपिल मुनि महाराज व खंडासुरि महाराज” का मेला शनिवार को गुन्दियांट गांव थान पर बड़े हर्षाेल्लास व धूमधाम से मनाया गया। मेले में गत वर्षाे की भांति इस वर्ष अधिक भीड़ तो जुटी लेकिन, बारिश ने मेलार्थियों का आंनद किरकिरा कर दिया।
देवता के पुजारी महादेव नोटियाल ने विधिवत पूजादृअर्चना कर ग्रामीणों व दूर दराज से आए हुए मेलार्थियों को अपना आशीर्वाद दिया। आपको बताते चलें कि श्रावन मेलों की शुरुआत ग्राम रौन से होती है। 21 गते श्रावण 5 अगस्त को रौन 22 गते को रामा में थोक की जातर मनाई जाती है, जिसमें बैष्टी,पोरा, कन्डियाल गांव,डिकाल गांव व आस पास गांव के लोग डोल दमाउ रणसिंघा के साथ हजारों की संख्या में रामा की जातर में आते हैं। तब कपुवा लगता है। उसके बाद पोरा, कन्डियाल गांव,डिकाल गांव में मेलो का आयोजन होता है। विशेष रूप से रौन गांव के ग्रामीणों द्वारा डोल बाजु के साथ मन्दिर की परिक्रमा रास के द्वारा लगायी जाती है। और 26 व 27 गते श्रावण गुन्दियाट गांव मेलों के साथ मेलों की समाप्ति होती है।
आयोजित मेले के साथ कपिल मुनि महाराज व खंडासुरी महाराज के सावन के मेलों का समापन हो जाता है। मेले कफुवा का आयोजन भी किया जाता है। मेले में दुकानदारों द्वारा , जलेबी पकोड़ी अन्य दुकानें सजाई गई थी, जिससे ग्रामीणों ने खूब खरीददारी की। पुजारी पूरण भक्त नोटियाल ने कहा इस प्रकार के आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।इस वर्ष मेले में हजारों की भीड़ होने थी परन्तु बारिश के अधिक होने से मेलों का आनंद किरकिरा हो गया है। वहीं विरेन्द्र नोटियाल ने कहा यह एक पुरानी परंपरा है।

इस परंपरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है जिसमें क्षेत्रीय नृत्य और संगीत प्रस्तुतियां शामिल थी। गगन नोटियाल ने कहा रंवाई की संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है इस मेले के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।मेले में विरेन्द्र नोटियाल, पूर्व प्रधान दीपक नोटियाल,आशीष नौटियाल,अनुराग नोटियाल,गगन नोटियाल, हरीश, रमेश विजल्वाण,नवनीत विजल्वाण महेश नोटियाल, नितिन पंवार राष्ट्रवादी , पंकज राणा, मनमोहन बडोनी, अनूप विजल्वाण , जगमोहन विजलवाण, तुषार नोटियाल,शम्भू प्रसाद विजल्वाण , राजेश, विजल्वाण,गौरव नोटियाल,निरज विजलवाण, अनूप नोटियाल, अनूप नोटियाल, ग्रीस नोटीयाल मोहित नौटियाल,राजेन्द्र चौहान,बाजगी प्रेमदास सहित रामा सिंराई कमल सिंराई व दूर दराज से सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे ।

