सम्पादकीय
।। अध्यात्म गंगा ।।
संसार का नियम है कि जिस शरीर का जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु तो होगी ही। ऐसे ही अन्य वस्तुओं पर भी यह नियम लागू होता है, कि जो जो भी वस्तु बनती है, वह एक न एक दिन नष्ट अवश्य होती है।
फिर भी जब मनुष्यों के संबंध में हम देखते हैं, तो ऐसा पता चलता है कि कुछ लोगों का तो मरण होता है, और कुछ लोगों का स्मरण होता है। तो यह जानना चाहिए, कि *”किसका मरण होता है, और किसका स्मरण होता है?
इस प्रश्न का उत्तर है कि जो स्वार्थी व्यक्ति होता है, उसका तो मरण होता है। और जो परोपकारी व्यक्ति होता है उसका स्मरण होता है।जैसे श्री रामचंद्र जी ,श्री कृष्ण जी महर्षि पतंजलि जी महर्षि गौतम जी महर्षि कणाद जी महर्षि दयानन्द जी महारानी लक्ष्मीबाई जी माता जीजाबाई जी इत्यादि। इन सब महापुरुषों का स्मरण होता है। इनका शरीर छूटे हुए सैंकड़ों हजारों लाखों वर्ष बीत गए, तो भी आज तक इनका स्मरण होता है। यह इसीलिए होता है, कि ये लोग स्वार्थी नहीं, बल्कि परोपकारी थे।
अतः आज भी जो जो व्यक्ति स्वार्थी होंगे, उनका मरण हो जाएगा। और जो जो लोग देश धर्म समाज के लिए कार्य करेंगे, सेवा परोपकार आदि उत्तम कर्म करेंगे, उनका आज भी स्मरण होता है, और आगे भी होता रहेगा।
फिर भी जब मनुष्यों के संबंध में हम देखते हैं, तो ऐसा पता चलता है कि कुछ लोगों का तो मरण होता है, और कुछ लोगों का स्मरण होता है। तो यह जानना चाहिए, कि *”किसका मरण होता है, और किसका स्मरण होता है?
इस प्रश्न का उत्तर है कि जो स्वार्थी व्यक्ति होता है, उसका तो मरण होता है। और जो परोपकारी व्यक्ति होता है उसका स्मरण होता है।जैसे श्री रामचंद्र जी ,श्री कृष्ण जी महर्षि पतंजलि जी महर्षि गौतम जी महर्षि कणाद जी महर्षि दयानन्द जी महारानी लक्ष्मीबाई जी माता जीजाबाई जी इत्यादि। इन सब महापुरुषों का स्मरण होता है। इनका शरीर छूटे हुए सैंकड़ों हजारों लाखों वर्ष बीत गए, तो भी आज तक इनका स्मरण होता है। यह इसीलिए होता है, कि ये लोग स्वार्थी नहीं, बल्कि परोपकारी थे।
अतः आज भी जो जो व्यक्ति स्वार्थी होंगे, उनका मरण हो जाएगा। और जो जो लोग देश धर्म समाज के लिए कार्य करेंगे, सेवा परोपकार आदि उत्तम कर्म करेंगे, उनका आज भी स्मरण होता है, और आगे भी होता रहेगा।
