Reading:तमाम विपक्ष के एकजुट होने के झूठी अफवाहें और तानाशाही के डर को धता बताकर भी मतदाताओं ने एक बार फिर मोदी जी पर विश्वास दिखाया है! आचार्य लोकेश बडोनी
आपको बताते चलें कि भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही एनडीए जो न तो एंटी इनकम्बेंसी का शिकार हुई, और न ही तमाम विपक्ष के एकजुट होने के झूठी अफवाहें और तानाशाही के डर को धता बताकर भी मतदाताओं ने एक बार फिर मोदी जी पर विश्वास दिखाया है! फिर भी आश्चर्य यह है कि, इस जीत को भी हार की तरह प्रोजेक्ट किया जा रहा हैं।
अकेली बीजेपी 240 से ज्यादा सीटें ला रहीं हैं…वहीं कॉंग्रेस दस साल से सत्ता से दूर रहने के बाद भी 100 का आंकड़ा नहीं पार कर पाई हैं। उनके युवराज जो शहजादे हैं, वो आम आदमी बनकर सड़को पर निकल गए… *युवा नेता से गम्भीर प्रोढ़* बनकर उन्होंने हर तरह के *प्रलोभन और डर* दिखाए गए….*पर नतीजा यह है कि उनके अपने दम पर 100 सीट भी निकल नहीं पाई!
आज 3 सीट जीतने वाले भी उछल* रहे हैं..21 वाले मास्टर स्ट्रोक* के लिए रेडी हैं तो 16 वाले मजबूत* दिख रहे हैं! पर हम इन सबके बीच यह *भूल रहे* हैं कि यह *खेल मात्र बहुमत* का हैं।
लगातार *दस वर्षों तक राज* कर के *तीसरी बार सत्ता में आना संकेत है कि एक बड़ा वर्ग आज भी मोदी और एनडीए को चाहता* हैं।
साथ ही यह संकेत भी है कि जो *मतदाता आपको मत देते* हैं वो आपसे अपेक्षा रखते ही हैं…उन्हें पूरा करने की *जिम्मेदारी सरकार* की ही है।
यह चेतावनी हैं उन मतदाताओं* को भी है जो *आलस्य, डर या लोभ* में आकर अपने *मताधिकार का उपयोग नहीं* करते हैं!
सरकार को समझना चाहिए कि उनका *’कोर वोटर’ उनसे विकास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के साथ उनके साथ का विश्वास भी चाहता* हैं।
इस समय एक मजबूत विपक्ष की देश को जरूरत थी। यह आई ओपनर हैं। यह जरूरी था।
दोनो पार्टी के मतदाता ख़ुशी मना सकते हैं क्योंकि…न तो *ईवीएम में गड़बड़ी हुई, चुनाव आयोग भी न्यूट्रल रहा और कोई तानाशाही या डर भी नहीं रहा। अब रही अयोध्या की सीट की बात तो अक्सर जो राम को लायें है हम उनको लायेंगे कहने वाले लोगों को भगवान राम ने अपने घर से ठुकरा दिया है जंहा तक हम समझते हैं यह ग़लत है राजनीति में और चुनाव मे सभी बातें चलती है अब चुनाव समाप्त हो चुका है,राम ने पहले कृष्ण की तरह काम करने वाले नरेंद्र मोदी जी को कहा है कि मोदीजी कुछ दिनों तक राम की तरह काम करें कृष्ण और राम एक ही है लेकिन शब्द के साथ अर्थ और भाव काम को विभाजन कर देता है जंहा कृष्ण ने किसी का कहना नहीं माना लेकिन फिर भी कोई अनुचित कार्य नहीं किया शास्त्र संगत निति निर्धारित समय देकर सही बात को मानने के लिए बाध्य किया लेकिन यदि कोई नहीं माना तो सुदर्शन चक्र से सभी को अपना लोहा मनवाया, यंहा भी राम ने सहजता से सरलता पूर्वक विचार कर सभी को न्याय संगत नीति निर्धारित करते हुए सभी को सही काम करने के लिए अनुनय विनय करी लेकिन अंत मे धनुष बाण चढ़ाकर अपना क्रोध भी दिखाया ऐसा ही परिदृश्य भारत की राजनीति में भी खड़ा होता दिखाई दे रहा है मोदीजी एक बार कृष्ण की भूमिका में रहे अब वह राम की भूमिका में हैं इसलिए हम नित्यप्रति कहते हैं जयश्री राम जय श्री कृष्ण भजते रहो और आगे बढ़ते हो सकता है ईश्वर को यही मंजूर होगा ।। जय श्री राम