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श्रीमद्भागवत महापुराण जीवन ग्रंथ है। इसमें भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास पथपर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं। आचार्य सुरेश उनियाल

Lokesh Badoni
Last updated: June 5, 2024 12:35 pm
Lokesh Badoni Published June 5, 2024
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 पुरोला उतरकाशी

विश्व शांति मानव कल्यार्थ के उत्थान लिए आयोजित सुप्रसिद्ध मन्दिर पुरोला में यमुना गोलोक धाम के तत्वावधान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के षट दिवस की कथा सुनाते हुए यमुना पुत्र आचार्य सुरेश उनियाल ने कहा भगवान की कथा,भजन ,भगवत नाम का आश्रय लेने वालों से भगवान सहज ही प्रसन्न होकर उन्हें भवसागर से पार लगा देते है। आचार्य श्री ने कहा हम लोग जिस स्थूल पृथ्वी पर रहते हैं ,उसकी रक्षा – दीक्षा केवल इस पृथ्वी के लोगों द्वारा ही नहीं होती, बल्कि सूक्ष्म और कारण जगत के देवता उप देवता एवं संत महापुरुष इसकी रक्षा दीक्षा में लगे रहते हैं । और वह पृथ्वी पर धर्म ज्ञान सुख और शांति के साम्राज्य का विस्तार करते हैं। उन्होंने कहा श्रीमद्भागवत महापुराण एक दिव्य जीवन ग्रन्थ है। इसमें जीवन का संपूर्ण दर्शन है, जीवन के प्रश्नों के उत्तर हैं, जीवन एवं जगत की समस्याओं के समाधान है और सफल, सार्थक, समृद्ध एवं शांतिपूर्ण जीवन जीने के व्यावहारिक सूत्र हैं आचार्य श्री ने नन्दादिका गोकुल छोड़कर वृन्दावनगमन, कालियनाग दमन, वेणु गीत, गोपी गीत अक्रूरागमन की कथा सुनाते हुए श्रोताओं को सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अपनी लीलाओं के माध्यम से जीवन के प्रत्येक पक्ष को प्रस्तुत किया है। भगवान के जीवन चरित्र में निहित संदेशों को हृदयंगम कर मनुष्य अपना सर्वांगीण व अध्यात्म विकास कर सकता है। जीवन में विपरीत परिस्थितियां आयें । संकट आ घेरें,चुनौतियां आ खड़ी हो । तो ऐसे समय में अविचलित रहकर उनसे कैसे विजय प्राप्त करनी है।

https://uttarakhandabtak.com/wp-content/uploads/2024/06/VID-20240605-WA0394.mp4

यह सब भगवान ने अपने कार्यों के माध्यम से बताया है विविध लीला प्रसंग में भगवान ने यह संकेत दिया है की अलग-अलग समस्याओं से निपटने के लिए अलग-अलग युक्ति से काम लेना चाहिए । आचार्य श्री ने कहा अंत काल में भगवान का स्मरण वही व्यक्ति करता है जो जीवन पर्यंत भगवान की भक्ति करता रहा हो । भक्ति के लिए अलग से समय देने की जरूरत नहीं है, कर्म करते हुए प्रभु नाम का स्मरण करते रहो । बस इतना ही पर्याप्त है ।ऐसा करते हुई ही मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है। और निश्चित ही हमारे जीवन यात्रा निर्विघ्न संपन्न होगी। और हम भी प्रभु कृपा से धर्म ,अर्थ, काम,मोक्ष प्राप्त कर सकेंगे।

कथा के मण्डपाचार्य पंण्डित अनील विजल्वाण, पंण्डित मोहन लाल बडोनी, घनश्याम विजल्वाण, राधेश्याम विजल्वाण,बद्री प्रसाद नोडियाल, जयवीर रावत, बृजमोहन चौहान,मदन नेगी, प्रकाश कुमार, आदि सहित मातृशक्ति भक्तजन उपस्थित थे।

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