चिन्यालीसौड़ के तुल्याडा गांव महक रहा है सुगन्धित फुलों की खेती से। आपको बताते चलें। यहां के एक युवक ने फूलों की खेती को रोजगार का बनाया साधन। ग्राम तुल्याडा में व्यापक पैमाने पर खिले फूल विवाह समारोह, बर्थडे पार्टी, डेकोरेशन व अन्य शुभ कार्यो में अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं। चिन्यालीसौड़ के तुल्याडा निवासी बालकराम नोटियाल फूलों की खेती कर प्रगतिशील किसानके रूप में अपने पहचान बना चुके हैं। 28 वर्षीय नवयुवक कृषि विज्ञान केन्द्र व नाबार्ड की और से बैज्ञानिक पद्धति और सुझाव की मदत के लिए फूलों की व्यापक खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जिसमें उन्होंने इजराइल कृषि तकनीकी का इस्तेमाल भी किया है।नवयुवक बालकराम ने बताया है कि वर्ष 2021 में 5 नाली जमीन पर गेंदा, पूसाचेति,व ग्लैडस गुलदस्ता आदि फूलों की खेती करना शुरू किया नाबार्ड संस्था की ओर से एक बार हिमाचल जाने का अवसर मिला था जहां पोलीहाउस में खेती देखकर उन्होंने फूलों की खेती करने का निर्णय लिया । फिर इंटरनैट के माध्यम से भी पोली हाउस के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया । इस दौरान उन्होंने पौध लगाने से लेकर कटिंग खाद्य आदि बिंदुओं को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र में लगने वाले प्रशिक्षण शिविर में जाकर अध्ययन भी किया। शुरुआती दिनों में 400 फुल प्रतिदिन का उत्पादन रहा लेकिन धीरे-धीरे फूलों की खेती ने विस्तार और व्यापक रूप लेते हुए अब उत्तरकाशी और टिहरी जनपद के बाजारों में फूलों को बेच रहे हैं । अच्छी आमदनी मिल रही है।

कृषक बालकराम बताते हैं । कि पहले सब्जी, मशरूम ,एलोवेरा और लेमन जूस के साथ भी फिशफार्मिंग का काम शुरू किया था। बालक राम बताते हैं कि यदि पलायन को रोकना है तो नवयुवको को ग्राम स्तर पर स्वरोजगार के बारे में जानकारी देनी होगी। छोटे छोटे किसानों को प्रोत्साहित करना होगा। पहाड़ का नवयुवक मेहनती तो बहुत होता है। लेकिन संसाधनों व मार्गदर्शन की कमी के कारण शहरों की और पलायन करता है, सरकार को पहाड़ी उत्पादनों को उगाने के लिए व अच्छी मार्केट व छोटे छोटे किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। कृषक बालकराम नोटियाल को उत्तराखंड प्रगतिशील किसान के रूप में सम्मानित भी किया गया है।

कृषक बालकराम बताते हैं । कि पहले सब्जी, मशरूम ,एलोवेरा और लेमन जूस के साथ भी फिशफार्मिंग का काम शुरू किया था। बालक राम बताते हैं कि यदि पलायन को रोकना है तो नवयुवको को ग्राम स्तर पर स्वरोजगार के बारे में जानकारी देनी होगी। छोटे छोटे किसानों को प्रोत्साहित करना होगा। पहाड़ का नवयुवक मेहनती तो बहुत होता है। लेकिन संसाधनों व मार्गदर्शन की कमी के कारण शहरों की और पलायन करता है, सरकार को पहाड़ी उत्पादनों को उगाने के लिए व अच्छी मार्केट व छोटे छोटे किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। कृषक बालकराम नोटियाल को उत्तराखंड प्रगतिशील किसान के रूप में सम्मानित भी किया गया है।

