बड़कोट : यमुनोत्री
बड़कोट के ग्राम डण्डाल गांव में समस्त ग्रामवासीयों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस की पावन कथा सुनाते हुए हिमालय के सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक आचार्य शिवप्रसाद नौटियाल ने गोकुल में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव कि पावन कथा सुनाते हुए कहा है कि जब नंद बाबा को मालूम हुआ कि उनके यहां पुत्र हुआ है तो उसके आनंद का ठिकाना नहीं रहा । ब्राह्मणों एवं ग्वालवालों को बुलाकर बड़ी खुशी के साथ प्रभु का जन्मोत्सव मनाया गया ब्रज में रिद्धि सिद्धि ने डेरा पहले ही डाल रखा था ।गोपियों ने सच-संवरकर खूब गीत गाये, वे मगन होकर नाची। ब्रिज को खुशी से सराबोर कर रही है ।आनंद रस की वर्षा हो रही है ब्रज की धरा पर। आचार्य श्री ने कहा जन्मोत्सव कथा में बड़ा सुंदर रहस्य है एक दिव्य जीवन संदेश है दुनियादारी के कामों में उत्सवों में व्यस्त रहकर यदि परमात्मा को भूल जाओगे तो जीवन की गाड़ी पलट जाएगी। यदि चाहते हो कि जीवन की गाड़ी ठीक रहे। व्यवस्थित रहे तो परमात्मा के साथ रहकर संसार के कार्य करो और परमात्मा के साथ उत्सव बनाओ भगवान को अलग करके नहीं।प्रभु को केंद्र में रखो उन्हीं का ध्यान करते हुए कर्म करो। कथाओं को केवल पढ़ो सुनो नहीं उन पर चिंतन मनन करो और उन्हें आचरण में उतारों।यही भागवत का एक दिव्य संदेश है।
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बड़कोट : यमुनोत्रीबड़कोट के ग्राम डण्डाल गांव में समस्त ग्रामवासीयों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस की पावन कथा सुनाते हुए हिमालय के सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक आचार्य शिवप्रसाद नौटियाल ने गोकुल में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव कि पावन कथा सुनाते हुए कहा है कि जब नंद बाबा को मालूम हुआ कि उनके यहां पुत्र हुआ है तो उसके आनंद का ठिकाना नहीं रहा । ब्राह्मणों एवं ग्वालवालों को बुलाकर बड़ी खुशी के साथ प्रभु का जन्मोत्सव मनाया गया ब्रज में रिद्धि सिद्धि ने डेरा पहले ही डाल रखा था ।गोपियों ने सच-संवरकर खूब गीत गाये, वे मगन होकर नाची। ब्रिज को खुशी से सराबोर कर रही है ।आनंद रस की वर्षा हो रही है ब्रज की धरा पर। आचार्य श्री ने कहा जन्मोत्सव कथा में बड़ा सुंदर रहस्य है एक दिव्य जीवन संदेश है दुनियादारी के कामों में उत्सवों में व्यस्त रहकर यदि परमात्मा को भूल जाओगे तो जीवन की गाड़ी पलट जाएगी। यदि चाहते हो कि जीवन की गाड़ी ठीक रहे। व्यवस्थित रहे तो परमात्मा के साथ रहकर संसार के कार्य करो और परमात्मा के साथ उत्सव बनाओ भगवान को अलग करके नहीं।प्रभु को केंद्र में रखो उन्हीं का ध्यान करते हुए कर्म करो। कथाओं को केवल पढ़ो सुनो नहीं उन पर चिंतन मनन करो और उन्हें आचरण में उतारों।यही भागवत का एक दिव्य संदेश है।आचार्य श्री ने कहा दशम स्कंध भागवत का भगवान का हृदय है। इसमें भगवान श्री कृष्ण के जन्म का प्रसंग उनकी मधुर लीलाओं का मनमोहक वर्णन एवं दिव्य चरित्र का बहुत ही ललित वर्णन है। आचार्य श्री ने कहा श्री वेदव्यास जी ने कृपा करके कलयुग के मनुष्यों के सोच- विचार चिंतन- चरित्र एवं व्यवहार का जो चित्रण आज से हजारों वर्ष पूर्ण कर दिया था। आज हमारी आंखों के सामने ठीक वही दृश्य उपस्थित होता है । हम सबको इससे प्रेरणा लेकर हमें अपना सुधार करना चाहिए।कथा में समस्त ग्रामवासीयों व मातृशक्ति ने रवांई की पारांम्परीक परिवेश में कृष्ण जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कथा के मण्डपाचार्य मुन्सीराम बैलवाल , आचार्य कैलाश उनियाल, शंकर सेमवाल, हरिशरण उनियाल, संगीताचार्य रामस्वरूप थपलियाल, शुशील उनियाल, आदि हजारों की संख्या में मातृशक्ति भक्तजन श्रोता उपस्थित थे।
आचार्य श्री ने कहा दशम स्कंध भागवत का भगवान का हृदय है। इसमें भगवान श्री कृष्ण के जन्म का प्रसंग उनकी मधुर लीलाओं का मनमोहक वर्णन एवं दिव्य चरित्र का बहुत ही ललित वर्णन है। आचार्य श्री ने कहा श्री वेदव्यास जी ने कृपा करके कलयुग के मनुष्यों के सोच- विचार चिंतन- चरित्र एवं व्यवहार का जो चित्रण आज से हजारों वर्ष पूर्ण कर दिया था। आज हमारी आंखों के सामने ठीक वही दृश्य उपस्थित होता है । हम सबको इससे प्रेरणा लेकर हमें अपना सुधार करना चाहिए।

