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Reading: हिंदुत्व विचारधारा के जनक वीर सावरकर की जयंती पर शत् शत् नमन 
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हिंदुत्व विचारधारा के जनक वीर सावरकर की जयंती पर शत् शत् नमन 

Lokesh Badoni
Last updated: May 28, 2024 1:32 pm
Lokesh Badoni Published May 28, 2024
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      हिंदुत्व विचारधारा के जनक वीर सावरकर की जयंती पर शत शत नमन

   ============

*२८ मई/जन्म-दिवस*
===============÷
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म २८ मई,१८८३ को हुआ था. वे एक राष्ट्रवादी नेता थे. उन्हें प्रायः स्वातंत्र्यवीर, वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है. हिन्दू राष्ट्रवाद की राजनीतिक विचार धारा *हिन्दुत्व* को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय सावरकर को जाता है।

वे एक वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाटककार भी थे. उन्होंने परिवर्तित हिन्दुओं के हिन्दू धर्म को वापस लौटाने हेतु सतत् प्रयास किये एवं इसके लिए आन्दोलन चलाए. उनके राजनीतिक दर्शन में उपयोगितावाद, तर्कवाद, प्रत्यक्षवाद, मानवतावाद, सार्वभौमिकता, व्यवहारिकता और यथार्थवाद के तत्व थे।

सभी राष्ट्रवादियों को वीर विनायक दामोदर सावरकर के विषय में सब कुछ जानना चाहिए।

वीर सावरकर के प्रथम कीर्तिमान-

०१. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने १९०१ में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?

०२. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ…

०३. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में ०७ अक्तूबर १९०५ को वीर सावरकर ने जलाई थी…

०४. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…

०५. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के १६ वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और ११ जुलाई १९२१ को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया…

०६. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको १९०५ में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुरमाना किया… इसके विरोध में हड़ताल हुई… स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…

०७. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने १९०९ में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ नही ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया…

०८. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा *ग़दर* कहे जाने वाले संघर्ष को *’१८५७ का स्वातंत्र्य समर’* नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया…

०९. सावरकर पहले ऐसे
क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे *१८५७ का स्वातंत्र्य समर* पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था…

१०. ‘१८५७ का स्वातंत्र् समर’ विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंह ने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी… भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…

११. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई १९१० को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे…

१२. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नही मिला और बंदी बनाकर भारत लाया गया…

१३. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी…

१४. सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले- *”चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया.”

१५. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने काला पानी की सजा के समय १० वर्ष से भी अधिक समय तक आजादी के लिए कोल्हू चलाकर ३० पोंड तेल प्रतिदिन निकाला…

१६. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखी और ६००० पंक्तियाँ याद रखी…

१७. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर आजादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा…

१८. वीर सावरकर पहले विद्वान लेखक थे जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि-

आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता
यस्य भारत भूमिका.
पितृभू: पुण्यभूश्चैव स
वै हिन्दुरितीस्मृतः.’

अर्थात समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभू है जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भू है, जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है…

१९. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने ३० वर्षों तक जेलों में रखा तथा आजादी के बाद १९४८ में नेहरु सरकार ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया… देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था…

२०. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जब उनका २६ फरवरी १९६६ को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया कि वे संसद सदस्य नही थे जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था…

२१. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर थे जिनके मरणोपरांत २६ फरवरी २००३ को उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमे कभी उनके निधन पर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था…

२२. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे जिनके चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया…

२३. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया…
वीर सावरकर ने दस वर्ष आजादी के लिए काला पानी में कोल्हू चलाया था जबकि गाँधी ने कालापानी की उस जेल में कभी दस मिनट चरखा नही चलाया….

२४. महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी-देशभक्त, उच्च कोटि के साहित्य के रचनाकार, हिंदी-हिन्दू-हिन्दुस्थान के मंत्रदाता, हिंदुत्व के सूत्रधार वीर विनायक दामोदर सावरकर पहले ऐसे भव्य-दिव्य पुरुष, भारत माता के सच्चे सपूत थे, जिनसे अन्ग्रेजी सत्ता भयभीत थी, आजादी के बाद नेहरु की कांग्रेस सरकार से अब तक की कांग्रेस भयभीत है…..

२५. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया… पर आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी विरोधियों के घोर अँधेरे को चीरकर आज वीर सावरकर के राष्ट्रवादी विचारों का सूर्य उदय हो रहा है…

एक महान् राष्ट्रभक्त, अद्वितीय स्वतंत्रता सेनानी, अनुकर्णीय युगद्रष्टा और हिन्दू संस्कृति के प्रखर समर्थक वीर विनायक दामोदर सावरकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन्।

Contents
      हिंदुत्व विचारधारा के जनक वीर सावरकर की जयंती पर शत शत नमन   ============*२८ मई/जन्म-दिवस* ===============÷ विनायक दामोदर सावरकर का जन्म २८ मई,१८८३ को हुआ था. वे एक राष्ट्रवादी नेता थे. उन्हें प्रायः स्वातंत्र्यवीर, वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है. हिन्दू राष्ट्रवाद की राजनीतिक विचार धारा *हिन्दुत्व* को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय सावरकर को जाता है।वे एक वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाटककार भी थे. उन्होंने परिवर्तित हिन्दुओं के हिन्दू धर्म को वापस लौटाने हेतु सतत् प्रयास किये एवं इसके लिए आन्दोलन चलाए. उनके राजनीतिक दर्शन में उपयोगितावाद, तर्कवाद, प्रत्यक्षवाद, मानवतावाद, सार्वभौमिकता, व्यवहारिकता और यथार्थवाद के तत्व थे।सभी राष्ट्रवादियों को वीर विनायक दामोदर सावरकर के विषय में सब कुछ जानना चाहिए।वीर सावरकर के प्रथम कीर्तिमान-०१. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने १९०१ में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?०२. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ…०३. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में ०७ अक्तूबर १९०५ को वीर सावरकर ने जलाई थी…०४. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…०५. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के १६ वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और ११ जुलाई १९२१ को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया…०६. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको १९०५ में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुरमाना किया… इसके विरोध में हड़ताल हुई… स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…०७. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने १९०९ में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ नही ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया…०८. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा *ग़दर* कहे जाने वाले संघर्ष को *’१८५७ का स्वातंत्र्य समर’* नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया…०९. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे *१८५७ का स्वातंत्र्य समर* पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था…१०. ‘१८५७ का स्वातंत्र् समर’ विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंह ने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी… भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…११. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई १९१० को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे…१२. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नही मिला और बंदी बनाकर भारत 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