सम्पादकीय
अंग्रेजी शिक्षा – पद्धति के बढ़ते कुप्रभाव से विदेशी भाषा ने बच्चों को रट्टू और नकलची बना दिया है, तथा मौलिक कार्यों और विचारों के लिए सर्वथा अयोग्य बना दिया है। अंग्रेजी भाषा और मैकाले शिक्षा पद्धति की गुलामी का ही परिणाम है कि आज के विद्यार्थियों में कुछ उच्चछृंखलता ,अधीरता व मानसिक तनाव जैसी समस्या बढ़ रही है। मैकाले कहा करता था। यदि इस देश को हमेशा के लिए गुलाम बनाना चाहते हो तो हिंदुस्तान की स्वदेशी शिक्षा पद्धति को समाप्त कर उसके स्थान पर अंग्रेजी शिक्षा पद्धति लोओं। फिर इस देश में शरीर से तो हिंदुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे। जब वह लोग इस देश के विश्वविद्यालय से निकलकर शासन करेंगे तो वह शासन हमारे हित में होगा। यह मैंकाले का सपना था । आश्चर्य है की मैकाले शिक्षा पद्धति से प्रभावित भारतीय युवा आज खुद ही अपने को गुलामी अनैतिकता,अशांति देने वाले के सपनों को साकार करने में लगा है। अंग्रेजों का उद्देश्य था की भारतीय युवाओं को प्रोलोभन देकर बंदर की तरह जिंदगी भर अपने इशारों पर नचाना था। स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय शास्त्रों वेद पुराणों का ज्ञान अर्जित कर अंग्रेजों की इस पद्धति को निरर्थक साबित कर दिया। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा भारत के युवाओं को गर्व होना चाहिए कि वह ऐसी भारत मां की सौभाग्यशाली संतान है।जहां शास्त्रों वेदों उपनिषदों एवं सतगुरुओं का मार्गदर्शन सहज सुलभ है। आज ही प्राण कर लो कि हम अंग्रेजों की गुलामी नहीं करेंगे भारतीय शिक्षा पद्धति ही अपनाएंगे अपने ऋषियों महापुरुषों द्वारा चलायीं गयी सर्वोत्कृष्ट
गुरुकुल शिक्षा पद्धति अपनाकर जीवन को महान और तेजस्वी बनाएंगे, समग्र विश्व में अपनी संस्कृति की सुवास फैलायेंगे ।
गुरुकुल शिक्षा पद्धति अपनाकर जीवन को महान और तेजस्वी बनाएंगे, समग्र विश्व में अपनी संस्कृति की सुवास फैलायेंगे ।
