अप्रैल 2026 से भारत की जनसंख्या जनगणना शुरू होने जा रही है जो कि 2027 तक पुरी हो जाएगी। अतः आप सभी से आग्रह करता हूं कि जनगणना अधिकारी शीघ्र ही आपके गांव गली मोहल्ला में जाकर आपसे जानकारी एकत्र करने के लिए मिलेंगे।जब आप सभी से आपकी मातृभाषा पूछी जाएगी और और उसके बाद आपसे यह पूछा जाएगी कि आप कौन-कौन सी भाषाएं जानते हैं तो कृपया संस्कृत को भी उन्हें भाषाओं में अवश्य शामिल करें जिन्हें आप जानते हैं। यद्यपि हम सभी संस्कृत बोल नहीं पाते फिर भी हम प्रतिदिन अपनी प्रार्थना जप तप पूजा पाठ स्तुति श्लोक तथा सभी धार्मिक मांगलिक अनुष्ठान में इसका उपयोग करते हैं। आपको बताते चलें कि पिछली जनगणना के अनुसार पूरे देश में संस्कृत बोलने वालों की संख्या मात्र 2000 थी जबकि अरबी और फारसी बोलने वालों की संख्या बहुत अधिक है। उन सभी भाषाओं के विकास के लिए उन्हें सरकार के द्वारा वित्तीय सहायता भी मिलती है। मित्रों यदि संस्कृत को लुफ्त भाषा घोषित कर दिए गए तो हमारी प्राचीन धर्म ग्रंथ वेद पुराण उपनिषद आदि का प्रकाशन बंद हो सकता है हम अपनी जड़ों से कम जाएंगे और अंततः पूजा अर्चना तक सीमित हो जाएंगे। आपको बताते चलें कि संस्कृत सम्पूर्ण भारत में लिखी, पढ़ी, बोली तथा समझे जाने वाली भाषा है , यद्यपि इसके प्रयोग करने वालों की सङ्ख्या अन्य नवीन भारतीय भाषाओं की सङ्ख्या से कम हैं तथापि संस्कृत ही एक मात्र भाषा है जो प्राचीन काल से लेकर वर्त्तमान काल तक सुव्यवस्थित रूप से सम्पूर्ण भारतवर्ष में चली आ रही है। और संस्कृत भाषा का स्वरूप अत्यंत प्राचीन, वैज्ञानिक, समृद्ध और परिष्कृत (संस्कारित) है। जिसे देवभाषा और ‘देववाणी’ भी कहा जाता है। यह ॠग्वेद जैसे प्राचीन ग्रंथों की भाषा है, जो व्याकरण के नियमों (पाणिनि द्वारा रचित) से बंधी है। इसमें वैदिक और लौकिक दो मुख्य रूप मिलते हैं, जो स्पष्ट और व्यवस्थित हैं। इस भाषा को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि यदि संस्कृत को लुप्त भाषा घोषित कर दिया गया तो संभव है कि हम संस्कृत को हमेशा के लिए खो देंगे। अतः आप सभी से आग्रह है कि हमारी जागरूकता और प्रयास ही संस्कृत को जीवित रख सकते हैं। और पुनः अपने गौरवशाली इतिहास को दोहरा सकें और हम सभी स्वाभिमान और गर्व महसूस कर सकें।