बड़कोट उतरकाशी
यमुनोत्री विधानसभा के बड़कोट में यमुना घाटी बाजगी समुदाय द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यातिथि जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष श्री गीताराम गौड़ व प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि पुरोला विधायक दुर्गेश लाल व वरिष्ठ भाजपा नेता डा. स्वराज विद्वान, भाजपा जिला महामंत्री परशुराम जगूडी, वरिष्ठ युवा नेता संदीप राणा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अतोल रावत उपस्थित थे। सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री गीताराम गौड़ ने कहा
बाजगी समाज केवल वादक नहीं,
संस्कृति के संवाहक हैं।उत्तराखंड राज्य निर्माण में बाजगी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र की एक प्राचीन, अलिखित और मौखिक संगीत विधा है, जिसे पारंपरिक रूप से ‘औजी’ बाजगी ‘दास’ समुदाय के लोग बजाते हैं। यह ज्ञान विशेष रूप से ढोल-दमाऊ वादन के माध्यम से विवाह, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों के समय पौराणिक लय और श्लोकों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
डोल सागर और बाजगी के बारे में
मूल और विधा: ढोल सागर एक प्राचीन ग्रंथ है जो मौखिक परंपरा से आगे बढ़ा है। यह ढोल वादन की कला है। (बाजगी/औजी)पारंपरिक रूप से, इस विधा के जानकरों को बाजगी, औजी, ढोली या दास कहा जाता है, जो विशेष वाद्ययंत्र ‘ढोल और दमाऊ’ बजाते हैं। गौड़ ने कहा है कि इसकी जड़ें शिव-शक्ति से जुड़ी हैं,आधुनिक समय में डीजे और ब्रास बैंड के बढ़ते प्रभाव और नई पीढ़ी के इस विधा से दूरी बनाने के कारण, यह समृद्ध कला अब लुप्त होने के खतरे में है।
ढोल सागर में न केवल वादन, बल्कि पृथ्वी की संरचना, 9 खंड, और पौराणिक कथाओं का भी वर्णन है, जिसे बाजगी अपनी पारंपरिक थाप से जीवित रखते हैं। राज्यमंत्री गीताराम गौड़ ने कहा बाजगी समुदाय को राज्य आन्दोलनकारी सूची में शामिल व संस्कृति विभाग से पेंशन दी ।सम्मान समारोह में एक माह की तनखा 51000.हजार रूपये भाजगी समुदाय संगठन को देने की घोषणा की है। मंच संचालन लोक गायक सुरेश भवानी ने किया।इस मौके पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अतोल रावत , अमित नोडियाल, युवा नेता गोपाल डोभाल,जिला महामंत्री परशराम जगूड़ी , भाजपा अनुसूचित जाति के पूर्व अध्यक्ष धर्मदास, जिलाअध्यक्ष अनुसूचित जाति मोर्चा राम प्रकाश जुड़ियाल , गायक सुन्दर प्रेमी श्रीदेव बडोनी,मनिष राणा आशु रावत सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।
बाजगी समाज केवल वादक नहीं,
संस्कृति के संवाहक हैं।उत्तराखंड राज्य निर्माण में बाजगी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र की एक प्राचीन, अलिखित और मौखिक संगीत विधा है, जिसे पारंपरिक रूप से ‘औजी’ बाजगी ‘दास’ समुदाय के लोग बजाते हैं। यह ज्ञान विशेष रूप से ढोल-दमाऊ वादन के माध्यम से विवाह, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों के समय पौराणिक लय और श्लोकों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
डोल सागर और बाजगी के बारे में
मूल और विधा: ढोल सागर एक प्राचीन ग्रंथ है जो मौखिक परंपरा से आगे बढ़ा है। यह ढोल वादन की कला है। (बाजगी/औजी)पारंपरिक रूप से, इस विधा के जानकरों को बाजगी, औजी, ढोली या दास कहा जाता है, जो विशेष वाद्ययंत्र ‘ढोल और दमाऊ’ बजाते हैं। गौड़ ने कहा है कि इसकी जड़ें शिव-शक्ति से जुड़ी हैं,आधुनिक समय में डीजे और ब्रास बैंड के बढ़ते प्रभाव और नई पीढ़ी के इस विधा से दूरी बनाने के कारण, यह समृद्ध कला अब लुप्त होने के खतरे में है।
ढोल सागर में न केवल वादन, बल्कि पृथ्वी की संरचना, 9 खंड, और पौराणिक कथाओं का भी वर्णन है, जिसे बाजगी अपनी पारंपरिक थाप से जीवित रखते हैं। राज्यमंत्री गीताराम गौड़ ने कहा बाजगी समुदाय को राज्य आन्दोलनकारी सूची में शामिल व संस्कृति विभाग से पेंशन दी ।सम्मान समारोह में एक माह की तनखा 51000.हजार रूपये भाजगी समुदाय संगठन को देने की घोषणा की है। मंच संचालन लोक गायक सुरेश भवानी ने किया।इस मौके पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अतोल रावत , अमित नोडियाल, युवा नेता गोपाल डोभाल,जिला महामंत्री परशराम जगूड़ी , भाजपा अनुसूचित जाति के पूर्व अध्यक्ष धर्मदास, जिलाअध्यक्ष अनुसूचित जाति मोर्चा राम प्रकाश जुड़ियाल , गायक सुन्दर प्रेमी श्रीदेव बडोनी,मनिष राणा आशु रावत सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।
