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जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने विकासखंड डुंडा के सुदूरवर्ती गांव सिंगोट में ग्रामीणों द्वारा बनाई गई मत्स्य उत्पादन इकाई का स्थलीय किया निरीक्षण। 

Lokesh Badoni
Last updated: January 28, 2026 1:51 am
Lokesh Badoni Published January 28, 2026
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सिंगोट (उत्तरकाशी) 27 जनवरी 2026

 

Contents
सिंगोट (उत्तरकाशी) 27 जनवरी 2026जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मंगलवार सायं विकासखंड डुंडा के सुदूरवर्ती गांव सिंगोट में ग्रामीणों द्वारा सहकारिता विभाग से जुड़कर गठित श्री नागराजा मत्स्य जीवी उत्पादन सहकारी समिति द्वारा बनाई गई मत्स्य उत्पादन इकाई का स्थलीय निरीक्षण किया।यह समिति आज आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार की सशक्त मिसाल बन चुकी है। समिति द्वारा बड़े पैमाने पर ट्राउट मछली का उत्पादन किया जा रहा है जिसकी आपूर्ति मुख्य रूप से आईटीबीपी मातली और जिले के स्थानीय बाजार में की जा रही है। समिति को पहले बीज विभाग से उपलब्ध कराई जाती थी किंतु विभागीय प्रशिक्षण मिलने के बाद अब समिति स्वयं मछली बीज उत्पादन कर रही है तथा अन्य उत्पादकों को भी 5 रुपए प्रतिपीस की दर से स्थानीय बाजारों में उपलब्ध करा रही है। समिति ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मत्स्य विभाग से 44 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। वर्तमान में समिति से 34 सदस्य जुड़े हैं, जबकि इसके अतिरिक्त 14 अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ा गया है।गांव में ही आजीविका सृजन के उद्देश्य से समिति द्वारा 20 ट्राउट मछली टैंक और 6 स्थानीय मछली टैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रतिवर्ष 20 से 22 लाख रुपये का उत्पादन हो रहा है। ट्राउट मछली 60 हजार रुपये प्रति क्विंटल तथा स्थानीय मछली 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है।जिलाधिकारी ने कहा कि यह एक अत्यंत सफल इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल है जिसे मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना और राज्य की अन्य योजनाओं के समन्वय से विकसित किया गया है। यहां पॉलीहाउस, हॉर्टिकल्चर और मत्स्यपालन का एक साथ सफल संचालन हो रहा है। जिले के ऐसे क्षेत्र जहां ट्राउट मछली के उत्पादन के अनुकूल वातावरण है वहां इस मॉडल को एक बेंचमार्क मानकर अन्य काश्तकारों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि तकनीकी सहायता और सरकारी योजनाओं के माध्यम से उनकी आर्थिकी मजबूत बनें।इस दौरान सहायक निदेशक मत्स्य नीतीश कुमार उपस्थित रहे।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मंगलवार सायं विकासखंड डुंडा के सुदूरवर्ती गांव सिंगोट में ग्रामीणों द्वारा सहकारिता विभाग से जुड़कर गठित श्री नागराजा मत्स्य जीवी उत्पादन सहकारी समिति द्वारा बनाई गई मत्स्य उत्पादन इकाई का स्थलीय निरीक्षण किया।

यह समिति आज आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार की सशक्त मिसाल बन चुकी है। समिति द्वारा बड़े पैमाने पर ट्राउट मछली का उत्पादन किया जा रहा है जिसकी आपूर्ति मुख्य रूप से आईटीबीपी मातली और जिले के स्थानीय बाजार में की जा रही है। समिति को पहले बीज विभाग से उपलब्ध कराई जाती थी किंतु विभागीय प्रशिक्षण मिलने के बाद अब समिति स्वयं मछली बीज उत्पादन कर रही है तथा अन्य उत्पादकों को भी 5 रुपए प्रतिपीस की दर से स्थानीय बाजारों में उपलब्ध करा रही है।

 समिति ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मत्स्य विभाग से 44 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। वर्तमान में समिति से 34 सदस्य जुड़े हैं, जबकि इसके अतिरिक्त 14 अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ा गया है।

गांव में ही आजीविका सृजन के उद्देश्य से समिति द्वारा 20 ट्राउट मछली टैंक और 6 स्थानीय मछली टैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रतिवर्ष 20 से 22 लाख रुपये का उत्पादन हो रहा है। ट्राउट मछली 60 हजार रुपये प्रति क्विंटल तथा स्थानीय मछली 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है।

जिलाधिकारी ने कहा कि यह एक अत्यंत सफल इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल है जिसे मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना और राज्य की अन्य योजनाओं के समन्वय से विकसित किया गया है। यहां पॉलीहाउस, हॉर्टिकल्चर और मत्स्यपालन का एक साथ सफल संचालन हो रहा है। जिले के ऐसे क्षेत्र जहां ट्राउट मछली के उत्पादन के अनुकूल वातावरण है वहां इस मॉडल को एक बेंचमार्क मानकर अन्य काश्तकारों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि तकनीकी सहायता और सरकारी योजनाओं के माध्यम से उनकी आर्थिकी मजबूत बनें।

इस दौरान सहायक निदेशक मत्स्य नीतीश कुमार उपस्थित रहे।

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