लाखामंडल पुरोला उतरकाशी
शिव नगरी लाखामंडल में सनातन सेवा समिति द्वारा विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजित किया गया जिसमें मुख्यवक्ता के रूप में महामण्डलेश्वर रूपेन्द्र प्रकाश जी महाराज व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड प्रांत के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया इस अवसर पर जौनसार बावर के सुप्रसिद्ध लोक गायक अत्तर शाह और रेशमा शाह ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।इस अवसर पर सनातन सेवा समिति लाखामंडल ने सामाजिक क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वालो को सम्मानित किया गया है नाई का काम करने वाले ,कुटुंब प्रबोधन के संयुक्त परिवार, वाद्य यंत्र बजाने वाले,काष्ठ कला वाले बढई आदि को हिन्दू सम्मेलन के मंच के माध्यम से सम्मानित किया गया
लाखामंडल क्षेत्र 11 ऐसे संयुक्त परिवार जिनका अब तक का इतिहास है कि जब से उनका आदि पुरुष यहां आये तक बटे नहीं है वह परिवार कई पीढियां से एक ही छत के नीचे रहते है और प्यार प्रेम से रहते हैं ऐसे 11 परिवारों को सम्मानित किया गया है। मुखवक्ता महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज ने सम्बोधित करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से ही सामाजिक परिवर्तन व देश की प्रगति सम्भव है।सामाजिक समरसता एक ऐसा समाज बनाने का लक्ष्य रखती है जहाँ विविधता का सम्मान हो और सभी एक साथ मिलकर शांति और समृद्धि से रहें।
लाखामंडल क्षेत्र 11 ऐसे संयुक्त परिवार जिनका अब तक का इतिहास है कि जब से उनका आदि पुरुष यहां आये तक बटे नहीं है वह परिवार कई पीढियां से एक ही छत के नीचे रहते है और प्यार प्रेम से रहते हैं ऐसे 11 परिवारों को सम्मानित किया गया है। मुखवक्ता महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज ने सम्बोधित करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से ही सामाजिक परिवर्तन व देश की प्रगति सम्भव है।सामाजिक समरसता एक ऐसा समाज बनाने का लक्ष्य रखती है जहाँ विविधता का सम्मान हो और सभी एक साथ मिलकर शांति और समृद्धि से रहें।
मुख्यातिथि के रूप में प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने कहा हिन्दू संयुक्त परिवार जिसमें एक साथ एक ही घर में कई पीढ़ियों के लोग रहते हैं जिनकी रसोई,पूजा पाठ एवं संपत्ति सामूहिक होती है,
संयुक्त परिवार वह है जिसमें तीन या अधिक पीढ़ियों के सदस्य (जैसे दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, और उनके बच्चे) एक ही घर में, एक साथ रहते हैं, एक ही रसोई में भोजन करते हैं, और संपत्ति व संसाधनों को साझा करते हैं, जहाँ मुखिया (आमतौर पर सबसे बड़ा पुरुष) निर्णय लेता है और सभी मिलकर भावनात्मक और आर्थिक जिम्मेदारियाँ निभाते हैं, जिससे ‘हम’ की भावना मजबूत होती है.
संयुक्त परिवार वह है जिसमें तीन या अधिक पीढ़ियों के सदस्य (जैसे दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, और उनके बच्चे) एक ही घर में, एक साथ रहते हैं, एक ही रसोई में भोजन करते हैं, और संपत्ति व संसाधनों को साझा करते हैं, जहाँ मुखिया (आमतौर पर सबसे बड़ा पुरुष) निर्णय लेता है और सभी मिलकर भावनात्मक और आर्थिक जिम्मेदारियाँ निभाते हैं, जिससे ‘हम’ की भावना मजबूत होती है.
दिनेश सेमवाल ने कहा समाज के सभी वर्गों में प्रेम, समानता, और भाईचारे को बढ़ावा देती है, जिससे राष्ट्र में शांति, एकता, और समावेशी विकास आता है; यह जाति, धर्म, या वर्ग के भेदभाव को मिटाकर सभी को समान अवसर देती है, जिससे सामाजिक बुराइयाँ दूर होती हैं और राष्ट्र का मजबूत निर्माण होता है, जो कि लोकतंत्र और आर्थिक प्रगति के लिए ज़रूरी है। उन्होंने कहा पंच परिवर्तन से ही हम लोग दुनियां में अपना गौरव स्थापित करेंगें। सेमवाल ने कहा
स्व का बोध अपनी संस्कृति, परंपराओं और आत्म-शक्ति को पहचानना और आत्मनिर्भर बनना, जिससे देश की मेहनत को सम्मान मिले और आर्थिक रूप से सशक्त बनें।
नागरिक कर्तव्य (नागरिक शिष्टाचार): अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना और कानूनों का पालन करना, जिससे राष्ट्र समृद्ध और उन्नत हो।
पर्यावरण वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रकृति की रक्षा करना, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे और सृष्टि का संरक्षण हो।
सामाजिक समरसता (सामाजिक सद्भाव): जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के भेद को मिटाकर सभी को समान मानना और सामाजिक सद्भाव स्थापित करना, जिससे ऊँच-नीच समाप्त हो।
कुटुंब प्रबोधन टूटते परिवारों को जोड़ना, बच्चों में अच्छे संस्कार डालना और भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना, क्योंकि सशक्त परिवार ही सशक्त समाज की नींव हैं। इस अवसर पर सह विभाग कार्यवाह अरुण, जिला कार्यवाह दिनेश बडोनी, जिला संघचालक कबूल, ग्राम विभाग संयोजक गोंविद राणा,सह जिला कार्यवाह पूलम पंवार,अजीत, खण्ड कार्यवाह दिनेश, वर्ग कार्यवाह संजय रावत, विजय पाल, राज्यमंत्री गीताराम गौड़ विधायक दुर्गेश लाल,दिवान चौहान, सरदार सिंह चौहान, विजय सिंह आदि सेंकड़ों की संख्या में मातृशक्ति व कार्यकर्ता उपस्थित थे।
स्व का बोध अपनी संस्कृति, परंपराओं और आत्म-शक्ति को पहचानना और आत्मनिर्भर बनना, जिससे देश की मेहनत को सम्मान मिले और आर्थिक रूप से सशक्त बनें।
नागरिक कर्तव्य (नागरिक शिष्टाचार): अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना और कानूनों का पालन करना, जिससे राष्ट्र समृद्ध और उन्नत हो।
पर्यावरण वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रकृति की रक्षा करना, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे और सृष्टि का संरक्षण हो।
सामाजिक समरसता (सामाजिक सद्भाव): जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के भेद को मिटाकर सभी को समान मानना और सामाजिक सद्भाव स्थापित करना, जिससे ऊँच-नीच समाप्त हो।
कुटुंब प्रबोधन टूटते परिवारों को जोड़ना, बच्चों में अच्छे संस्कार डालना और भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना, क्योंकि सशक्त परिवार ही सशक्त समाज की नींव हैं। इस अवसर पर सह विभाग कार्यवाह अरुण, जिला कार्यवाह दिनेश बडोनी, जिला संघचालक कबूल, ग्राम विभाग संयोजक गोंविद राणा,सह जिला कार्यवाह पूलम पंवार,अजीत, खण्ड कार्यवाह दिनेश, वर्ग कार्यवाह संजय रावत, विजय पाल, राज्यमंत्री गीताराम गौड़ विधायक दुर्गेश लाल,दिवान चौहान, सरदार सिंह चौहान, विजय सिंह आदि सेंकड़ों की संख्या में मातृशक्ति व कार्यकर्ता उपस्थित थे।
