“जीवन में अनेक बार मानसिक विचारों के तूफान आते रहते हैं। मन में विचारों की उथल पुथल होती रहती है।” “कभी-कभी भौतिक परिस्थितियां भी बदल जाती हैं। व्यक्ति जैसा सोचता है, हर बार वैसा उसके जीवन में हो नहीं पाता।”*
जब उसके मन में इस प्रकार से विचारों का तूफान आता है, तो अनेक बार वह घबरा जाता है। दिशाहीन या दिग्भ्रमित हो जाता है।”* वह सोचता है कि *”अब मैं क्या करूं?कहां जाऊं? मेरा भविष्य कैसे सुधरेगा इत्यादि?”*
*”तो ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए। धैर्य रखना चाहिए। धैर्य में बहुत शक्ति होती है। वह व्यक्ति को किसी भी वैचारिक तूफान के आगे टिकने की क्षमता देता है।”*
*”इसलिए अपने जीवन में धैर्य नामक गुण को अवश्य धारण करें। किसी भी परिस्थिति में घबराएं नहीं। ईश्वर को साक्षी मानकर शुद्ध मन से ईश्वर से प्रार्थना करें, और धैर्य पूर्वक शांति से विचार करें। तब कोई न कोई समाधान अवश्य ही निकल आएगा, और आपकी समस्या हल हो जाएगी।”*
*धैर्य को हर किसी के जीवन का एक अभिन्न अंग माना जाता है। चूँकि यह आनंद और खुशी पाने का एक बेहतरीन उपाय हो सकता है, इसलिए धैर्यवान व्यक्ति किसी भी विषम या समस्याग्रस्त परिस्थिति में शांत रह सकता है। इस प्रकार, कोई भी व्यक्ति अत्यधिक परेशान करने वाली और निराशाजनक परिस्थितियों में अपने धैर्य के स्तर को बढ़ाने का अभ्यास कर सकता है*
“शाब्दिक समाधान प्राप्त होने पर यदि आप उस पर आचरण नहीं करेंगे, तो भी आपकी समस्या हल नहीं हो पाएगी। अर्थात जो समाधान प्राप्त हो, उसके अनुकूल आपको आचरण भी करना होगा, तभी आपकी समस्या पूरी तरह से हल हो पाएगी।