पुरोला उतरकाशी
उत्तरकाशी जिले के सरनौल गांव में जन्मे महावीर रवांल्टा ने साहित्य की विभिन्न विद्याओं में कलम चलाते हुए देशभर की कई शिक्षण संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत वह सम्मानित महावीर रवांल्टा द्वारा रचनाओं का देशभर की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रशासन के साथ ही आकाशवाणी व दूरदर्शन से प्रसारण होता रहा है। आपके साहित्य पर अनेक विश्वविद्यालय में लघु शोध एवं शोध प्रबंध प्रस्तुत हो चुके हैं भाषा संस्थान के भाषा सर्वेक्षण उत्तराखंड पहाड़ नैनीताल के बहुभाषी शब्दकोश में रंवाल्टी भाषा पर कार्य करने के साथ ही रवांल्टी में लेखन और विभिन्न माध्यमों से प्रचारित और प्रकाशित करने की शुरुआत का श्रेय आपको ही जाता है श्यामसुंदर नागला स्मृति बालवाटिका बाल साहित्य सम्मान-2025 से होंगे अलंकृत।
रवाई घाटी की धरती से निकले सुप्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा अब राष्ट्रीय पटल पर एक और सम्मान की चमक बिखेरेंगे। उन्हें प्रतिष्ठित श्यामसुंदर नागला स्मृति बालवाटिका बाल साहित्य सम्मान-2025 से अलंकृत किया जाएगा। यह घोषणा ‘बालवाटिका’ मासिक पत्रिका के संपादक व संयोजक डॉ. भैरूं लाल गर्ग ने की।
यह सम्मान उन्हें 26वीं राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में मिलेगा, जो 4-5 अक्टूबर 2025 को विनायक विद्यापीठ, भूणास (भीलवाड़ा, राजस्थान) में आयोजित होगा। समारोह में देशभर से जुट रहे साहित्यकार भारतीय ज्ञान परंपरा और हमारा दायित्व विषय पर विचार-विमर्श करेंगे, वहीं बाल काव्य गोष्ठी भी आकर्षण का केंद्र होगी।
रचनाकार महावीर रवांल्टा अब तक 44 पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन से उनकी अनेक रचनाओं का प्रसारण हुआ है। विशेषकर बाल साहित्य में उनका योगदान अमूल्य माना जाता है।
सम्मान का लंबा सफर
बाल साहित्य के क्षेत्र में उन्हें पहले भी सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान (अल्मोड़ा), हेमराज भट्ट बालसखा सम्मान (जोशीमठ), डॉ. सुरेंद्र वर्मा बाल साहित्य शिखर सम्मान-2023 (सिरसा), विद्या देवी खन्ना बाल साहित्य सम्मान-2024 (मानिला) जैसे अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं।
शोध, नाटक और फिल्म तक पहुँची रचनाएँ
रवांल्टा की रचनाओं पर विश्वविद्यालयों में शोध प्रबंध हो चुके हैं। उनकी कहानियों पर नाट्य मंचन हुआ है और लघुकथा ‘तिरस्कार’ पर एक लघु फिल्म भी बन चुकी है।
रवाई बोली को दिलाई पहचान
सिर्फ हिन्दी ही नहीं, बल्कि रवांल्टा ने अपनी मातृभाषा रवांल्टी को भी राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का कार्य किया है। यही वजह है कि उनके सम्मान से न सिर्फ साहित्यकार, बल्कि पूरा रवाई क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
सेवा और साहित्य साथ-साथ
वर्तमान में महावीर रवांल्टा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं। सरकारी सेवा के साथ-साथ उनका साहित्यिक योगदान उन्हें अलग पहचान देता है।
