रामायण प्रसार प्रतिष्ठान अंबाला शहर द्वारा प्रकाशित बाल्मीकि रामायण संक्षिप्त कथा सार का सुप्रसिद्ध शिक्षाविद साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने रवांल्टी भाषा में अनुवाद कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आपको बताते चलें कि बाल्मीकि रामायण का संक्षिप्त कथासार गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के संस्कृत विभाग के उपाचार्य डॉ. विशाल भारद्वाज द्वारा किया गया है, रामायण प्रसार परिषद प्रतिष्ठान द्वारा विश्व प्रसिद्ध बाल्मीकि रामायण को विश्व की अनेक भाषाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के रूप में सुप्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा के द्वारा रवांल्टी भाषा में अनूदित किया गया है। उल्लेखनीय है की वर्तमान में रवांल्टी भाषा भारत की 870 भाषाओं में स्थान का चुकी है। जिसका श्रेय साहित्यकार महावीर रवांल्टा को जाता है।
आपको बताते चलें कि उत्तरकाशी जिले के सरनौल गांव में जन्मे महावीर रवांल्टा ने साहित्य की विभिन्न विद्याओं में कलम चलाते हुए अब तक 44 पुस्तकों का सृजन कर चुके हैं देशभर की कई शिक्षण संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत वह सम्मानित महावीर रवांल्टा द्वारा रचनाओं का देशभर की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रशासन के साथ ही आकाशवाणी व दूरदर्शन से प्रसारण होता रहा है। आपके साहित्य पर अनेक विश्वविद्यालय में लघु शोध एवं शोध प्रबंध प्रस्तुत हो चुके हैं भाषा संस्थान के भाषा सर्वेक्षण उत्तराखंड पहाड़ नैनीताल के बहुभाषी शब्दकोश में रंवाल्टी भाषा पर कार्य करने के साथ ही रवांल्टी में लेखन और विभिन्न माध्यमों से प्रचारित और प्रकाशित करने की शुरुआत का श्रेय आपको ही जाता है महावीर रवांल्टा द्वारा अब तक रवांल्टी भाषा में अनेक कविताएं,कहानियां,नाटक, रचें जा चुके हैं। गैणी जण आमार सुईन, और छपराल, रवांल्टा द्वारा प्रकाशित कविता संग्रह है आपकी लघु कथा, तिरस्कार,पर लघु फिल्म का निर्माण भी हो चुका है। महावीर को उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा रवांल्टी में उत्कृष्ट साहित्य सृजन एवं अनवरत सेवा के लिए आपको प्रतिष्ठित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान तथा गोविंद चातक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।