उत्तरकाशी
उतरकाशी के धराली गाँव में आई भीषण आपदा के बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने नर सेवा नारायण सेवा व समाज है आराध्या हमारा सेवा है आराधना के मूलमंत्र के साथ सेवा कार्यों का दायित्व संभाल लिया है। मंदिर परिसर में बचे हुए लोगों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
भोजन स्थल तक पहुँचने का मार्ग कीचड़, पानी और कठिन चढ़ाई से भरा हुआ है, लेकिन स्वयंसेवक पत्थरों पर चलते हुए अपने कंधों पर राशन की बोरियाँ ढोकर सामग्री पहुँचा रहे हैं।
आपदा के तुरंत बाद से ही स्वयंसेवक सक्रिय थे, किंतु धराली में प्रवेश की अनुमति उन्हें 10 अगस्त को मिली। वहाँ पहुँचकर उन्होंने एक सहायता केंद्र स्थापित किया, ताकि प्रभावित परिवारों तक राहत व पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

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उत्तरकाशीउतरकाशी के धराली गाँव में आई भीषण आपदा के बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने नर सेवा नारायण सेवा व समाज है आराध्या हमारा सेवा है आराधना के मूलमंत्र के साथ सेवा कार्यों का दायित्व संभाल लिया है। मंदिर परिसर में बचे हुए लोगों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था की जा रही है।भोजन स्थल तक पहुँचने का मार्ग कीचड़, पानी और कठिन चढ़ाई से भरा हुआ है, लेकिन स्वयंसेवक पत्थरों पर चलते हुए अपने कंधों पर राशन की बोरियाँ ढोकर सामग्री पहुँचा रहे हैं।आपदा के तुरंत बाद से ही स्वयंसेवक सक्रिय थे, किंतु धराली में प्रवेश की अनुमति उन्हें 10 अगस्त को मिली। वहाँ पहुँचकर उन्होंने एक सहायता केंद्र स्थापित किया, ताकि प्रभावित परिवारों तक राहत व पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा सके।धराली में हुए इस विनाश के बाद पुनर्वास में अभी लंबा समय लगना तय है, लेकिन सेवा भाव से प्रेरित स्वयंसेवक दिन-रात प्रभावितों के साथ खड़े हैं। इस अवसर पर विभाग संघचालक गुलाब नेगी,चतर सिंह जिला संयोजक देवि आपदा,डाॅ. जगदीश चौहान, जिला विद्यार्थी परिषद प्रमुख अनूप भंडारी जिला प्रचार प्रमुख हरेन्द राणा, अभिषेक राणा, जयप्रकाश, मनवीर, उत्तम, जितेन्द्र नत्थी, ओमेंद्र आदि सेंकड़ों स्वयंसेवक उपस्थित थे।
