पुरोला उतरकाशी
रंवाई घाटी के कमल नदी के तट पर पुरोला में 41 देव डोलियां व 51 ब्यासगणों व वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा श्री अष्टादश महापुराण ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस की कथा का शुभारंभ आचार्य गोतम कृष्ण जी के द्वारा राम चरित मानस के प्रवचनों के साथ स्वरचित धार्मिक भजनों से भक्ती में डूबों दिया। उसके बाद मत्स्य पुराण के वक्ता आचार्य सुदामा गैरोला ने कहा भगवान कि कथा से ही हम अपना जीवन बदल सकते हैं भगवान का नाम स्मरण ही कलियुग की औषधि है। स्कंध पुराण के वक्ता आचार्य नोटियाल बृजेश ने कथा सुनाते हुए कहा भगवान की कथा श्रवण से धर्म अर्थ काम और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। आचार्य बृजेश ने सामाजिक कुरीतियां पर प्रहार करते हुए कहा धर्म अध्यात्म के मार्ग पर चलने ही समाज में सद्भावना समरसता का भाव व परिवर्तन सम्भव है। तत्पश्चात मुख्यब्यास हिमालय के सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री शिवप्रसाद नोटियाल जी ने विभिन्न क्षेत्रों से आयी देव डोलियां को प्रणाम करते हुए सभी जनता जनार्दन का अभिवादन के साथ शिव पुराण की तृतीय दिवस कि कथा का शुभारंभ किया। श्री मटिया महाशू राजा रघुनाथ महाराज की अध्यक्षता में चल रही श्री अष्टादश महापुराण की कथा सुनाते हुए कहा। भगवान शिव, जिन्हें महादेव , महाकाल आदि नामों से भी जाना जाते है, जो ब्रह्मांड को रूपांतरित करते हैं, दूसरों को बचाने के लिए विष पी जाते हैं, तथा अपनी पूरी शक्ति से सभी प्राणियों से प्रेम करते हैं, वे ही ब्रह्मांड को सही दिशा में चलाने तथा बुराई को समाप्त करने के लिए भी जिम्मेदार हैं। मुख्यब्यास आचार्य ने कहा शिव पुराण 18 पुराणों में से एक है जिसमें भगवान शिव की लीला कथाओं और इनकी पूजा विधि सहित शिवलिंग की उत्पत्ति और शिव भक्ति से संबंधित कथाएं हैं। शिव पुराण का पाठ आप कभी भी शुभ मुहूर्त में आयोजन कर सकते हैं। लेकिन सावन के महीने में शिव पुराण को पढना और सुनना बहुत ही पुण्यदायी होता है। मुख्यब्यास ने देवहूति कर्दम व भगवान श्री कपिल मुनि कि पावन कथा सुनाते हुए श्रोताओं को भक्ति के सागर में डूबो दिया। भारतीय संस्कृति कि महिमा का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। अन्य देशों की संस्कृतियाँ तो समय की धारा के साथ नष्ट हो रही हैं, किंतु भारतीय संस्कृति आदिकाल से ही अपने परंपरागत अस्तित्व के साथ जीवंत बनी हुई है। भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों के बाद भी अपने मूल स्वरूप में जीवित है, मुख्य वक्ता ने सामाजिक कुरीतियां पर प्रहार करते हुए कहा है कि विवाह जैसे पवित्र मंगल कार्यों में लोग दिखावे के चक्कर में शराब ,मांस तरह तरह के सलाद ने पहाड़ के रिती रिवाज परम्पराओं को विखंडित कर दिया है । जिसे हम सभी को बदलना होगा। उत्तराखण्ड देवभूमि में भी विवाह आदि मंगल कार्यों में शराब,मांस, दहेज जैसी कुरूतियां कलंक है, इन कुरीतियों को दूर करने हेतु समाज सेवी , शिक्षाविद्, गांव के प्रबुद्धजनों को आगे आकर समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। तभी हमारी संस्कृति अजर अमर हो सकती है और हम भगवान के भक्त कहलाने योग्य है।आचार्य श्री ने कहा धर्म अध्यात्म,भागवत कथा सत्संग से ही
सुख शान्ति समृद्धि व मानवता का विकास सम्भव है।और भारत के अध्यात्म,योग, गुरुकुल शिक्षा पद्धति से सम्पूर्ण मानवता का विकास से ही सम्भव है।
कथा में अष्टादश महापुराण ज्ञान यज्ञ आचार्य लोकेश बडोनी मधुर, आचार्य राजेन्द्र सेमवाल, यमुना पुत्र सुरेश उनियाल, आचार्य संजीव बडोनी, आचार्य संन्तोश खण्डूरी, भागवत के मर्मज्ञ शशिमोहन डोभाल यज्ञ के आचार्य प्रकाश बहुगुणा सहित यज्ञ के के संचालक डॉ चंद्रशेखर नौटियाल। समिति अध्यक्ष उपेन्द्र असवाल व सचिव बृजमोहन सजवाण विक्रम सिंह रावत , बहिन राजकुमारी,ओमप्रकाश नोटियाल, जोगेंद्र सिंह चौहान, राधाकृष्ण बडोनी लोकेश उनियाल राकेश पंवार सहित हजारों की संख्या मातृशक्ति श्रद्धालु उपस्थित थे।