Reading:41 देव डोलियां व 51 ब्यासगणों ब्राह्मणों व मटिया महाशू राजा रघुनाथ जी के सानिध्य में श्री अष्टादश महापुराण ज्ञान यज्ञ का कलश यात्रा के साथ हुआ शुभारंभ।
41 देव डोलियां व 51 ब्यासगणों ब्राह्मणों व मटिया महाशू राजा रघुनाथ जी के सानिध्य में श्री अष्टादश महापुराण ज्ञान यज्ञ का कलश यात्रा के साथ हुआ शुभारंभ।
रंवाई घाटी के कमल नदी के पावन तट पर पुरोला में 41 देव डोलियां व 51 ब्यासगणों व वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा कलश यात्रा के साथ श्री अष्टादश महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ । श्री मटिया महाशू राजा रघुनाथ महाराज की अध्यक्षता में श्री नागराज मन्दिर से बाजार चौराहे तक हजारों लोगों की उपस्थिति में कलश यात्रा कथा स्थल पर पहुंची। यज्ञ संचालक डॉ चंद्रशेखर नोटियाल ने कहा देवभूमि पुरोला एक बार फिर अध्यात्म और संस्कृति का केंद्र बन गई है यह आयोजन केवल धार्मिक क्रिया कलाप नहीं बल्कि जनमानस की आस्था सनातन परंपरा और लोक संस्कृति आस्था का जीवंत प्रमाण है। डा. शेखर ने कहा धर्म अध्यात्म का आध्यात्मिक चेतना जागृत हो और युवा पीढ़ी को भी अपने संस्कृति और परंपरा से जुड़ने कि प्रेरणा मिले। प्रथम दिवस की कथा के रूप में आचार्य किशोरी रतुडी ने एक घंटा श्रीमद्भागवत कथा से प्रारम्भ करते हुए गौकर्ण की पावन कथा सुनाई। उसके बाद मुख्यब्यास परम श्रद्धेय श्री शिवप्रसाद नौटियाल जी ने कथा का शुभारंभ करते हुए विभिन्न क्षेत्रों से आयी देव डोलियों का पूजन किया। मुख्यब्यास आचार्य श्री शिवप्रसाद नोटियाल जी ने कहा श्री अष्टादश महापुराण ज्ञान यज्ञ का उद्देश्य समरसता का भाव जगे हर सनातनी के अन्दर भक्ति श्रद्धा समर्पण का भाव जागृत हो। विश्व शांति मानव कल्याण के इस अष्टादश महापुराण यज्ञ का उद्देश्य भारत पुनः अपने गौरवशाली इतिहास को दोहरा सके और। हर जनमानस की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पुरोला की धरती ने पुनः अपने अध्यात्मिक वैभव को एक फिर दर्शाया है।
यज्ञ समिति के अध्यक्ष उपेन्द्र असवाल सचिव बृजमोहन सजवाण विक्रम रावत व ने मुख्य ब्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद ग्रहण किया इस अवसर पर आयोजिक समिति के पदाधिकारियों ने आवाहित देव डोलियों का पूजन करते हुए आशिर्वाद ग्रहण किया।यज्ञ के संचालक डॉ चंद्रशेखर नौटियाल ने यज्ञ के यजमानों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आए ब्यासगणों का पूजन व स्वागत करते हुए कहा “मानसिक संतुलन, इन्द्रिय संयम, तपस्या, शुचिता, सहनशीलता, सरलता, वैराग्य, सैद्धान्तिक और व्यावहारिक ज्ञान, संतोष, सत्यनिष्ठा और वेदों में दृढ़ विश्वास – ये ब्राह्मण के बारह गुण हैं। इनी गुणों से सर्वत्र ब्राह्मणों की पूजा होती है। इस अवसर पर यज्ञ के यजमान राकेश पंवार, राधाकृष्ण बडोनी। ओमप्रकाश नौडियाल। बहिन राजकुमारी बद्री प्रसाद नौडियाल । नगरपालिका अध्यक्ष बिहारी लाल शाह, पूर्व अध्यक्ष हरिमोहन नेगी सभासद सहित हजारों की संख्या में लोग मोजूद थे।