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उत्तरकाशीउत्तराखंड

केदार घाटी मोरी के देवजानी पूर्वा की ओडी के पांच पांडव का एकदिवसीय यात्रा शिव नगरी लाखामंडल में किया जलाभिषेक ।

Lokesh Badoni
Last updated: February 23, 2025 11:05 pm
Lokesh Badoni Published February 23, 2025
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पुरोला उतरकाशी

https://uttarakhandabtak.com/wp-content/uploads/2025/02/VID-20250224-WA0139.mp4

ईष्टदेव कपिल मुनि खंडासुरी महाराज के छत्र छाया केदार घाटी देवजानी पूर्वा की ओडी के पांच पांडव का एकदिवसीय यात्रा के लिए शिव नगरी लाखामंडल में गये। वहां अभिषेक कर दर्शन किया।  पुजारी महिमानंद गौड़ व रामकृष्ण शर्मा माली ने कहा 

उत्तराखंड का आदिकालीन सभ्यताओं से गहरा नाता रहा है। यहाँ ऐसे अनेक स्थान मौजूद हैं, जहाँ ऐतिहासिक एवं पौराणिक काल के अवशेष बिखरे पड़े हैं। इन्हीं में एक स्थल है देहरादून जिले के जौनसार-बावर का लाखामंडल गाँव। माना जाता है कि द्वापर युग में दुर्योधन ने पाँचों पांडवों और उनकी माता कुंती को जीवित जलाने के लिए यहाँ लाक्षागृह का निर्माण किया था। एएसआइ को खुदाई के दौरान यहाँ मिले सैकड़ों शिवलिंग व दुर्लभ मूर्तियाँ इसकी तस्दीक करती हैं।

यमुना नदी के उत्तरी छोर पर स्थित देहरादून जिले के जौनसार-बावर का लाखामंडल गाँव ऐतिहासिक ही नहीं पौराणिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। समुद्रतल से 1372 मीटर की ऊँचाई पर स्थित लाखामंडल गाँव देहरादून से 128 किमी, चकराता से 60 किमी और पहाड़ों की रानी मसूरी से 75 किमी की दूरी पर है। लाखामंडल की प्राचीनता को कौरव-पांडवों से जोड़कर देखा जाता है।

https://uttarakhandabtak.com/wp-content/uploads/2025/02/VID-20250223-WA0169.mp4

मान्यता है कि कौरवों ने पांडवों व उनकी माता कुंती को जीवित जलाने के लिए ही यहाँ लाक्षागृह (लाख का घर) का निर्माण कराया था। स्थानीय लोग बताते हैं कि लाखामंडल में वह ऐतिहासिक गुफा आज भी मौजूद है, जिससे होकर पांडव सकुशल बाहर निकल आए थे। लोगों का कहना है कि इसके बाद पांडवों ने ‘चक्रनगरी’ में एक माह बिताया, जिसे आज चकराता कहते हैं। लाखामंडल के अलावा हनोल, थैना व मैंद्रथ में खुदाई के दौरान मिले पौराणिक शिवलिंग व मूर्तियाँ गवाह हैं कि इस क्षेत्र में पांडवों का वास रहा है।

कहते हैं कि पांडवों के अज्ञातवास काल में युधिष्ठिर ने लाखामंडल स्थित लाक्षेश्वर मंदिर के प्रांगण में जिस शिवलिंग की स्थापना की थी, वह आज भी विद्यमान है। इसी लिंग के सामने दो द्वारपालों की मूर्तियाँ हैं, जो पश्चिम की ओर मुँह करके खड़े हैं। इनमें से एक का हाथ कटा हुआ है। शिव को समर्पित लाक्षेश्वर मंदिर 12-13 वीं सदी में निर्मित नागर शैली का मन्दिर

Contents
पुरोला उतरकाशीईष्टदेव कपिल मुनि खंडासुरी महाराज के छत्र छाया केदार घाटी देवजानी पूर्वा की ओडी के पांच पांडव का एकदिवसीय यात्रा के लिए शिव नगरी लाखामंडल में गये। वहां अभिषेक कर दर्शन किया।  पुजारी महिमानंद गौड़ व रामकृष्ण शर्मा माली ने कहा उत्तराखंड का आदिकालीन सभ्यताओं से गहरा नाता रहा है। यहाँ ऐसे अनेक स्थान मौजूद हैं, जहाँ ऐतिहासिक एवं पौराणिक काल के अवशेष बिखरे पड़े हैं। इन्हीं में एक स्थल है देहरादून जिले के जौनसार-बावर का लाखामंडल गाँव। माना जाता है कि द्वापर युग में दुर्योधन ने पाँचों पांडवों और उनकी माता कुंती को जीवित जलाने के लिए यहाँ लाक्षागृह का निर्माण किया था। एएसआइ को खुदाई के दौरान यहाँ मिले सैकड़ों शिवलिंग व दुर्लभ मूर्तियाँ इसकी तस्दीक करती हैं।यमुना नदी के उत्तरी छोर पर स्थित देहरादून जिले के जौनसार-बावर का लाखामंडल गाँव ऐतिहासिक ही नहीं पौराणिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। समुद्रतल से 1372 मीटर की ऊँचाई पर स्थित लाखामंडल गाँव देहरादून से 128 किमी, चकराता से 60 किमी और पहाड़ों की रानी मसूरी से 75 किमी की दूरी पर है। लाखामंडल की प्राचीनता को कौरव-पांडवों से जोड़कर देखा जाता है।मान्यता है कि कौरवों ने पांडवों व उनकी माता कुंती को जीवित जलाने के लिए ही यहाँ लाक्षागृह (लाख का घर) का निर्माण कराया था। स्थानीय लोग बताते हैं कि लाखामंडल में वह ऐतिहासिक गुफा आज भी मौजूद है, जिससे होकर पांडव सकुशल बाहर निकल आए थे। लोगों का कहना है कि इसके बाद पांडवों ने ‘चक्रनगरी’ में एक माह बिताया, जिसे आज चकराता कहते हैं। लाखामंडल के अलावा हनोल, थैना व मैंद्रथ में खुदाई के दौरान मिले पौराणिक शिवलिंग व मूर्तियाँ गवाह हैं कि इस क्षेत्र में पांडवों का वास रहा है।कहते हैं कि पांडवों के अज्ञातवास काल में युधिष्ठिर ने लाखामंडल स्थित लाक्षेश्वर मंदिर के प्रांगण में जिस शिवलिंग की स्थापना की थी, वह आज भी विद्यमान है। इसी लिंग के सामने दो द्वारपालों की मूर्तियाँ हैं, जो पश्चिम की ओर मुँह करके खड़े हैं। इनमें से एक का हाथ कटा हुआ है। शिव को समर्पित लाक्षेश्वर मंदिर 12-13 वीं सदी में निर्मित नागर शैली का मन्दिर श्री खण्डासूरी महाराज मन्दिर समिति के अध्यक्ष पूर्व प्रधान सोबेन्द्र चोहान, ने शिव मन्दिर समिति के अध्यक्ष शुशील गौड़ व समस्त ग्राम वासियों का आभार व्यक्त किया श्री खण्डासूरी महाराज के माली प्रहलाद सिंह चौहान, समाज सेवी गजेन्द्र सिंह राष्ट्रवादी, मेघ सिंह तिलक गोविंद सिंह जयेन्द्र सिंह समस्त मातृशक्तिसहित सेंकड़ों लोग उपस्थित थे।

 श्री खण्डासूरी महाराज मन्दिर समिति के अध्यक्ष पूर्व प्रधान सोबेन्द्र चोहान, ने शिव मन्दिर समिति के अध्यक्ष शुशील गौड़ व समस्त ग्राम वासियों का आभार व्यक्त किया श्री खण्डासूरी महाराज के माली प्रहलाद सिंह चौहान, समाज सेवी गजेन्द्र सिंह राष्ट्रवादी, मेघ सिंह तिलक गोविंद सिंह जयेन्द्र सिंह समस्त मातृशक्तिसहित सेंकड़ों लोग उपस्थित थे।

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