इस मौके पर रावत हाॅस्पिटैलिटी की और से अतिथियों का शाल, पहाड़ी टोपी,कलेऊ की टोकरी भेंट की गई है। कार्यक्रम में उपस्थित जनों को सम्बोधित करते हुए दिनेश सेमवाल जी ने कहा है कि गढ़वाल की अनमोल धरोहरों को सहेजने और युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक कदम है हमें अपनी संस्कृत परंपराओं की विरासत को पुनः संवारने और सहने की जरूरत है । सेमवाल ने कहा जब तक हमारा मूल बिखरा रहेगा तब तक हम अपनी विरासत परंपराओं को नहीं बचा सकते। प्रांत कार्यवाह ने कहा प्रदेश की भावी पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक लोक विरासत और महान गढ़वाल की धरोहर कल्यों से परिचित हो सके, प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक लोक विरासत, लोकगीत, लोक नृत्य, सांस्कृतिक विविधता, प्रदेश का गौरवशाली इतिहास, पृथक राज्य आंदोलन, विभिन्न राजनीतिक, सांस्कृतिक व सामाजिक चेतना से जुड़े आंदोलन, प्रदेश का सामाजिक व आर्थिक विकास सहित प्रदेश की महान विभितियों की जीवनी से परिचित होंगे और हम अपने त्योहारों को परंपरागत तरीके से मना पाए इसके लिए हम सभी को इस प्रकार के कार्यक्रम समय-समय पर करने चाहिए। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्री किशोर उपाध्याय विधायक टिहरी ने कहा कि हम गंगा भागीरथी के मायके के लोग हैं हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर जागरूक होना होगा । उन्होंने रावत हाॅस्पिटैलिटी के संस्थापक सुरेन्द्र रावत, वीरेन्द्र रावत, गजेन्द्र सिंह रावत एवं परिवार को इस सराहनीय पहल के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी।
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