सम्पादकीय
जीवन वन में कभी तो परिस्थितियां अच्छी रहती हैं, और कभी-कभी बिगड़ भी जाती हैं। *”यदि आप अपनी परिस्थितियों को सुधारना चाहते हैं, तो उसके लिए आपको ईमानदारी एवं बुद्धिमत्ता पूर्वक पुरुषार्थ करना होगा।” “वर्तमान की खराब परिस्थितियों के लिए अपने भाग्य को दोष न दें। क्योंकि आपके भाग्य के कारण यह परिस्थितियां खराब नहीं हुई।”*
जिन परिस्थितियों में आपका जन्म हुआ, अर्थात जिस घर में परिवार में जिस गली मोहल्ले नगर प्रांत एवं देश में आपका जन्म हुआ, वह जरूर आपका पिछला भाग्य अर्थात पिछले कर्मों का फल है। *”लेकिन अब 4/5 वर्ष की उम्र के बाद जो आप पढ़ाई लिखाई करते हैं, पुरुषार्थ करते हैं, उससे वर्तमान परिस्थितियां बनती हैं। यह आपका नया भाग्य है, अर्थात इस जन्म के नये कर्मों का फल है। यदि जन्म के समय आपकी परिस्थितियां बहुत अच्छी नहीं थी, सामान्य थी, या कमजोर थी, तो इस जन्म में आप अपनी परिस्थितियां अपने नए पुरुषार्थ से सुधार सकते हैं। क्योंकि आप कर्म करने में स्वतंत्र हैं।”*
दूसरे पक्ष में, “यदि आलस्य और लापरवाही आदि दोष करेंगे, तो जन्म से मिली अच्छी परिस्थितियों को भी आप बिगाड़ सकते हैं। अर्थात वर्तमान परिस्थितियों को सुधारना या बिगाड़ना बहुत कुछ आपके अपने हाथ में है। कुछ कुछ दूसरे लोग भी आपकी परिस्थितियां सुधार या बिगाड़ सकते हैं। यदि दूसरे लोगों ने ठीक समय पर आपको सहयोग दिया, तो आपकी परिस्थितियां अच्छी हो जाएंगी। और यदि अपनी दुष्टता के कारण दूसरे लोगों ने आपकी हानि कर दी, तो आपकी परिस्थितियां बिगड़ जाएंगी। क्योंकि वे भी कर्म करने में स्वतंत्र हैं। उनके कर्मों का परिणाम भी आपको इस संसार में भोगना पड़ सकता है “इसलिए सब बातों का अच्छी प्रकार से विश्लेषण करें और वास्तविकता को ठीक प्रकार से पहचान कर आगे ईमानदारी एवं बुद्धिमत्ता से पुरुषार्थ करें। यदि आप ऐसा करेंगे, तो आपकी परिस्थितियां शीघ्र ही सुधर जाएंगी।”*
निराश होने या आलस्य करने से परिस्थितियां ठीक नहीं होंगी। इसलिए इन दोषों से बचें। थोड़ा धैर्य रखें। ईमानदारी एवं बुद्धिमत्ता से पुरुषार्थ करें। आपकी परिस्थितियां शीघ्र ही ठीक हो जाएंगी।
