By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
Notification Show More
Font ResizerAa
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Reading: श्रीदेव ‘सुमन’ का जन्म 25 मई, 1916 को बमुण्ड पट्टी के जौल गांव में हुआ था। अन्याय के विरुद्ध अपने प्राण न्योछावर करने वाले ऐसे महान पुरुष को शत-शत नमन
Share
Font ResizerAa
Uttarakhand Ab TakUttarakhand Ab Tak
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Search
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • यूथ
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
उत्तराखंडटिहरीफीचर्डराजनीति

श्रीदेव ‘सुमन’ का जन्म 25 मई, 1916 को बमुण्ड पट्टी के जौल गांव में हुआ था। अन्याय के विरुद्ध अपने प्राण न्योछावर करने वाले ऐसे महान पुरुष को शत-शत नमन

Lokesh Badoni
Last updated: July 25, 2024 5:57 am
Lokesh Badoni Published July 25, 2024
Share
SHARE

25 जुलाई

अमर बलिदानी : श्रीदेव सुमन।

 

Contents
25 जुलाईअमर बलिदानी : श्रीदेव सुमन।श्रीदेव ‘सुमन’ का जन्म 25 मई, 1916 को बमुण्ड पट्टी के जौल गांव में हुआ था। श्रीमती तारादेवी इनकी माता गृहणी तथा इनके पिता श्री हरिराम बडोनी क्षेत्र के एक प्रसिद्ध वैद्य थे। प्रारम्भिक शिक्षा चम्बा और मिडिल तक की शिक्षा उन्होंने टिहरी से पाई। संवेदनशील हृदय होने के कारण वे ‘सुमन’ उपनाम से कवितायें लिखते थे।अपने गांव तथा टिहरी में उन्होंने राजा के कारिंदों द्वारा जनता पर किये जाने वाले अत्याचारों को देखा। 1930 में 14 वर्ष की किशोरावस्था में उन्होंने ‘नमक सत्याग्रह’ में भाग लिया। थाने में बेतों से पिटाई कर उन्हें 15 दिन के लिये जेल भेज दिया गया, पर इससे उनका उत्साह कम नहीं हुआ। अब तो जब भी जेल जाने का आह्वान होता, वे सदा अग्रिम पंक्ति में खड़े हो जाते।पढ़ाई पूरी कर वे हिन्दू नेशनल स्कूल, देहरादून में पढ़ाने लगे। इसके साथ ही उन्होंने साहित्य रत्न, साहित्य भूषण, प्रभाकर, विशारद जैसी परीक्षायें भी उत्तीर्ण कीं। 1937 में उनका कविता संग्रह ‘सुमन सौरभ’ प्रकाशित हुआ। वे हिन्दू, धर्मराज, राष्ट्रमत, कर्मभूमि जैसे हिन्दी व अंग्रेजी पत्रों के सम्पादन से जुड़े रहे। वे ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ के भी सक्रिय कार्यकर्ता थे। उन्होंने गढ़ देश सेवा संघ, हिमालय सेवा संघ, हिमालय प्रांतीय देशी राज्य प्रजा परिषद, हिमालय राष्ट्रीय शिक्षा परिषद आदि संस्थाओं की स्थापना की।1938 में विनय लक्ष्मी से विवाह के कुछ समय बाद ही श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित एक सम्मेलन में नेहरू जी की उपस्थिति में उन्होंने बहुत प्रभावी भाषण दिया। इससे स्वाधीनता सेनानियों के प्रिय बनने के साथ ही उनका नाम शासन की काली सूची में भी आ गया। 1939 में सामन्ती अत्याचारों के विरुद्ध ‘टिहरी राज्य प्रजा मंडल’ की स्थापना हुई और सुमन जी इसके मंत्री बनाये गये। इसके लिये वे वर्धा में गांधी जी से भी मिले। 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में वे 15 दिन जेल में रहे. 21 फरवरी, 1944 को उन पर राजद्रोह का मुकदमा ठोक कर भारी आर्थिक दंड लगा दिया गया।पर सुमन जी तो इसे अपना शासन मानते ही नहीं थे। उन्होंने अविचलित रहते हुए अपना मुकदमा स्वयं लड़ा और अर्थदंड की बजाय जेल स्वीकार की। शासन ने बौखलाकर उन्हें काल कोठरी में ठूंसकर भारी हथकड़ी व बेड़ियों में कस दिया। राजनीतिक बन्दी होने के बाद भी उन पर अमानवीय अत्याचार किए गये। उन्हें जानबूझ कर खराब खाना दिया जाता था। बार-बार कहने पर भी कोई सुनवाई न होती देख तीन मई, 1944 से उन्होंने आमरण अनशन प्रारम्भ कर दिया।शासन ने अनशन तुड़वाने का बहुत प्रयास किया पर वे अडिग रहे और 84 दिन बाद 25 जुलाई, 1944 को जेल में ही उन्होंने शरीर त्याग दिया। जेलकर्मियों ने रात में ही उनका शव एक कंबल में लपेट कर भागीरथी और भिलंगना नदी के संगम स्थल पर फेंक दिया।सुमन जी के बलिदान का अर्घ्य पाकर टिहरी राज्य में आंदोलन और तेज हो गया। एक अगस्त, 1949 को टिहरी राज्य का भारतीय गणराज्य में विलय हुआ। तब से प्रतिवर्ष 25 जुलाई को उनकी स्मृति में ‘सुमन दिवस’ मनाया जाता है। अब पुराना टिहरी शहर, जेल और काल कोठरी तो बांध में डूब गयी है पर नई टिहरी की जेल में वह हथकड़ी व बेड़ियां सुरक्षित हैं। हजारों लोग वहां जाकर उनके दर्शन कर उस अमर बलिदानी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।अन्याय के विरुद्ध अपने प्राण न्योछावर करने वाले ऐसे महान पुरुष को शत-शत नमन

श्रीदेव ‘सुमन’ का जन्म 25 मई, 1916 को बमुण्ड पट्टी के जौल गांव में हुआ था। श्रीमती तारादेवी इनकी माता गृहणी तथा इनके पिता श्री हरिराम बडोनी क्षेत्र के एक प्रसिद्ध वैद्य थे। प्रारम्भिक शिक्षा चम्बा और मिडिल तक की शिक्षा उन्होंने टिहरी से पाई। संवेदनशील हृदय होने के कारण वे ‘सुमन’ उपनाम से कवितायें लिखते थे।

अपने गांव तथा टिहरी में उन्होंने राजा के कारिंदों द्वारा जनता पर किये जाने वाले अत्याचारों को देखा। 1930 में 14 वर्ष की किशोरावस्था में उन्होंने ‘नमक सत्याग्रह’ में भाग लिया। थाने में बेतों से पिटाई कर उन्हें 15 दिन के लिये जेल भेज दिया गया, पर इससे उनका उत्साह कम नहीं हुआ। अब तो जब भी जेल जाने का आह्वान होता, वे सदा अग्रिम पंक्ति में खड़े हो जाते।

 

पढ़ाई पूरी कर वे हिन्दू नेशनल स्कूल, देहरादून में पढ़ाने लगे। इसके साथ ही उन्होंने साहित्य रत्न, साहित्य भूषण, प्रभाकर, विशारद जैसी परीक्षायें भी उत्तीर्ण कीं। 1937 में उनका कविता संग्रह ‘सुमन सौरभ’ प्रकाशित हुआ। वे हिन्दू, धर्मराज, राष्ट्रमत, कर्मभूमि जैसे हिन्दी व अंग्रेजी पत्रों के सम्पादन से जुड़े रहे। वे ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ के भी सक्रिय कार्यकर्ता थे। उन्होंने गढ़ देश सेवा संघ, हिमालय सेवा संघ, हिमालय प्रांतीय देशी राज्य प्रजा परिषद, हिमालय राष्ट्रीय शिक्षा परिषद आदि संस्थाओं की स्थापना की।

1938 में विनय लक्ष्मी से विवाह के कुछ समय बाद ही श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित एक सम्मेलन में नेहरू जी की उपस्थिति में उन्होंने बहुत प्रभावी भाषण दिया। इससे स्वाधीनता सेनानियों के प्रिय बनने के साथ ही उनका नाम शासन की काली सूची में भी आ गया। 1939 में सामन्ती अत्याचारों के विरुद्ध ‘टिहरी राज्य प्रजा मंडल’ की स्थापना हुई और सुमन जी इसके मंत्री बनाये गये। इसके लिये वे वर्धा में गांधी जी से भी मिले। 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में वे 15 दिन जेल में रहे. 21 फरवरी, 1944 को उन पर राजद्रोह का मुकदमा ठोक कर भारी आर्थिक दंड लगा दिया गया।

पर सुमन जी तो इसे अपना शासन मानते ही नहीं थे। उन्होंने अविचलित रहते हुए अपना मुकदमा स्वयं लड़ा और अर्थदंड की बजाय जेल स्वीकार की। शासन ने बौखलाकर उन्हें काल कोठरी में ठूंसकर भारी हथकड़ी व बेड़ियों में कस दिया। राजनीतिक बन्दी होने के बाद भी उन पर अमानवीय अत्याचार किए गये। उन्हें जानबूझ कर खराब खाना दिया जाता था। बार-बार कहने पर भी कोई सुनवाई न होती देख तीन मई, 1944 से उन्होंने आमरण अनशन प्रारम्भ कर दिया।

शासन ने अनशन तुड़वाने का बहुत प्रयास किया पर वे अडिग रहे और 84 दिन बाद 25 जुलाई, 1944 को जेल में ही उन्होंने शरीर त्याग दिया। जेलकर्मियों ने रात में ही उनका शव एक कंबल में लपेट कर भागीरथी और भिलंगना नदी के संगम स्थल पर फेंक दिया।

सुमन जी के बलिदान का अर्घ्य पाकर टिहरी राज्य में आंदोलन और तेज हो गया। एक अगस्त, 1949 को टिहरी राज्य का भारतीय गणराज्य में विलय हुआ। तब से प्रतिवर्ष 25 जुलाई को उनकी स्मृति में ‘सुमन दिवस’ मनाया जाता है। अब पुराना टिहरी शहर, जेल और काल कोठरी तो बांध में डूब गयी है पर नई टिहरी की जेल में वह हथकड़ी व बेड़ियां सुरक्षित हैं। हजारों लोग वहां जाकर उनके दर्शन कर उस अमर बलिदानी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

अन्याय के विरुद्ध अपने प्राण न्योछावर करने वाले ऐसे महान पुरुष को शत-शत नमन

You Might Also Like

श्वेता महारा सैल्यूट तिरंगा संगठन में उत्तराखंड राज्य महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष बनीं

सेवा संकल्प धारणी फाउंडेशन के तत्वावधान में 5 से 8 फरवरी तक उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का आगाज

देहरादून वार्ड नं. 38 के पण्डितवाड़ी में विराट हिंदू सम्मेलन का सम्पन्न

शंकर आश्रम बना आशा की किरण

देहरादून में ज़मीनी स्तर की प्रतिभाओं को निखारने के लिए ‘पेस्टल वीड क्रिकेट एकेडमी’ का उद्घाटन

Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • श्वेता महारा सैल्यूट तिरंगा संगठन में उत्तराखंड राज्य महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष बनीं
  • सेवा संकल्प धारणी फाउंडेशन के तत्वावधान में 5 से 8 फरवरी तक उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का आगाज
  • आगरा में होंगे लेजेंड लीग क्रिकेट के 3 मैच
  • राजस्थान में कैंसर के बढ़ते मामलों का जल्द से जल्द निदान
  • 12 शहर, 400 स्वयंसेवक: राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस पर शहरी कचरे से निपटने के लिए ‘द वी फाउंडेशन’ और ‘ग्रँट थॉर्नटन’ आए साथ

Recent Comments

No comments to show.

Categories

  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • संस्कृति
  • शिक्षा
"उत्तराखंड अब तक" हिंदी समाचार वेबसाइट है जो उत्तराखंड से संबंधित ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज, और संस्कृति को लेकर प्रस्तुत करती है।
Quick Link
  • उत्तराखंड
  • देश-विदेश
  • राजनीति
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Address: New Colony, Ranjawala, Dehradun – 248001
Phone: +91 9760762885
Email:
uttarakhandabtaknews@gmail.com
© Uttarakhand Ab Tak. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?