देहरादून 6/7/2024
देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय व शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखण्ड प्रांत के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय शैक्षिक कार्यशाला का शुभारंभ
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के क्षेत्रीय संयोजक जगराम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड प्रांत के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल न्यास के प्रांत संरक्षण प्रो. नीरज तिवारी,प्रांत अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार, एवं प्रदेश संयोजक डॉ अशोक कुमार मैदोला ने मां सरस्वती के चित्र पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया । कार्यक्रम में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय की तरफ से अतिथियों का स्वागत किया गया।
प्रांत संयोजक डॉ अशोक कुमार मैन्दोला ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के विकास यात्रा के क्रम में अवगत कराया कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में एन.सी.आर.टी की पुस्तकों में लगभग 75 आपत्तिजनक विषयों को लेकर के सड़क से लेकर न्यायपालिका तक की तक की यात्रा की ओर आज हमें एनसीआरटी की पुस्तक में परिवर्तन देखने को मिल रहा है उन्होंने कहा कि हमें समस्या पर नहीं समाधान की चर्चा करनी चाहिए न्यास शिक्षा बच्चा आंदोलन के तहत विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन कर समाज और राष्ट्र के हित में नित्य नए कार्यों को करने के लिए प्रतिबद्ध है
उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने कहा किसी देश का गौरवपूर्ण इतिहास एवं उसके पूर्वजों महापुरुषों के दिव्य जीवन वृत्त एवं देश की वर्तमान पीढ़ी का मार्गदर्शन कर उसे भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास पद पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं ।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के क्षेत्रीय संयोजक जगराम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड प्रांत के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल न्यास के प्रांत संरक्षण प्रो. नीरज तिवारी,प्रांत अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार, एवं प्रदेश संयोजक डॉ अशोक कुमार मैदोला ने मां सरस्वती के चित्र पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया । कार्यक्रम में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय की तरफ से अतिथियों का स्वागत किया गया।
प्रांत संयोजक डॉ अशोक कुमार मैन्दोला ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के विकास यात्रा के क्रम में अवगत कराया कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में एन.सी.आर.टी की पुस्तकों में लगभग 75 आपत्तिजनक विषयों को लेकर के सड़क से लेकर न्यायपालिका तक की तक की यात्रा की ओर आज हमें एनसीआरटी की पुस्तक में परिवर्तन देखने को मिल रहा है उन्होंने कहा कि हमें समस्या पर नहीं समाधान की चर्चा करनी चाहिए न्यास शिक्षा बच्चा आंदोलन के तहत विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन कर समाज और राष्ट्र के हित में नित्य नए कार्यों को करने के लिए प्रतिबद्ध है
उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने कहा किसी देश का गौरवपूर्ण इतिहास एवं उसके पूर्वजों महापुरुषों के दिव्य जीवन वृत्त एवं देश की वर्तमान पीढ़ी का मार्गदर्शन कर उसे भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास पद पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं ।
उन्होंने कहा आज के युग में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में भारी चुनौतियां हैं अनगिनत संघर्ष है चुनौतियों और संघर्षों से भरे दुर्गम जीवन पथ पर चलकर सफलता एवं समृद्धि अर्जित करना और और साथ ही मन की शांति भी प्राप्त करना यह सहज कार्य नहीं है। जीवन में समग्र सफलता भारतीय शिक्षा पद्धति व आध्यात्मिक विचारों एवं चिंतन से ही संभव हो सकता है। प्रांत कार्यवाह ने कहा विद्यार्थी देश के भविष्य के करंदर है जैसा आज का विद्यार्थी होगा वैसा ही आने वाले समय में देश का भविष्य होगा विद्यार्थियों को अपने कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वह विद्या अर्जन करें और देश और समाज के प्रति जागरूक बने ऐसे संस्कार ग्रहण करें जिनसे उनके मन में अपने देश की सभ्यता और संस्कृति के प्रति गौरव का विकास हो अपने देश के लिए जीने और अपने देश के लिए मरने का संकल्प पैदा हो।

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देहरादून 6/7/2024देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय व शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखण्ड प्रांत के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय शैक्षिक कार्यशाला का शुभारंभ
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के क्षेत्रीय संयोजक जगराम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड प्रांत के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल न्यास के प्रांत संरक्षण प्रो. नीरज तिवारी,प्रांत अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार, एवं प्रदेश संयोजक डॉ अशोक कुमार मैदोला ने मां सरस्वती के चित्र पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया । कार्यक्रम में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय की तरफ से अतिथियों का स्वागत किया गया।
प्रांत संयोजक डॉ अशोक कुमार मैन्दोला ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के विकास यात्रा के क्रम में अवगत कराया कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में एन.सी.आर.टी की पुस्तकों में लगभग 75 आपत्तिजनक विषयों को लेकर के सड़क से लेकर न्यायपालिका तक की तक की यात्रा की ओर आज हमें एनसीआरटी की पुस्तक में परिवर्तन देखने को मिल रहा है उन्होंने कहा कि हमें समस्या पर नहीं समाधान की चर्चा करनी चाहिए न्यास शिक्षा बच्चा आंदोलन के तहत विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन कर समाज और राष्ट्र के हित में नित्य नए कार्यों को करने के लिए प्रतिबद्ध है
उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने कहा किसी देश का गौरवपूर्ण इतिहास एवं उसके पूर्वजों महापुरुषों के दिव्य जीवन वृत्त एवं देश की वर्तमान पीढ़ी का मार्गदर्शन कर उसे भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास पद पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं ।उन्होंने कहा आज के युग में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में भारी चुनौतियां हैं अनगिनत संघर्ष है चुनौतियों और संघर्षों से भरे दुर्गम जीवन पथ पर चलकर सफलता एवं समृद्धि अर्जित करना और और साथ ही मन की शांति भी प्राप्त करना यह सहज कार्य नहीं है। जीवन में समग्र सफलता भारतीय शिक्षा पद्धति व आध्यात्मिक विचारों एवं चिंतन से ही संभव हो सकता है। प्रांत कार्यवाह ने कहा विद्यार्थी देश के भविष्य के करंदर है जैसा आज का विद्यार्थी होगा वैसा ही आने वाले समय में देश का भविष्य होगा विद्यार्थियों को अपने कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वह विद्या अर्जन करें और देश और समाज के प्रति जागरूक बने ऐसे संस्कार ग्रहण करें जिनसे उनके मन में अपने देश की सभ्यता और संस्कृति के प्रति गौरव का विकास हो अपने देश के लिए जीने और अपने देश के लिए मरने का संकल्प पैदा हो।प्रांत कार्यवाह ने कहा दुनियां को सभ्यता सद्भाव सुख और शांति का पाठ पढ़ाने वाला भारत है और हमें अपने देश पर गर्व और स्वाभिमान होना चाहिए ।
उन्होंने कहा।
विद्या धनम सर्व धनम प्रधानम्।।
विद्या (शिक्षा) सभी धनों में सर्व श्रेष्ठ है
विद्या रूपी शस्त्र से ही हम दुनिया को पराजित कर सकते हैं। और विश्वगुरु के पद पर आसीन हो सकतें हैं।
कार्यक्रम में समाज सेवी,शिक्षाविद् उपस्थित थे।
प्रांत कार्यवाह ने कहा दुनियां को सभ्यता सद्भाव सुख और शांति का पाठ पढ़ाने वाला भारत है और हमें अपने देश पर गर्व और स्वाभिमान होना चाहिए ।
उन्होंने कहा।
विद्या धनम सर्व धनम प्रधानम्।।
विद्या (शिक्षा) सभी धनों में सर्व श्रेष्ठ है
विद्या रूपी शस्त्र से ही हम दुनिया को पराजित कर सकते हैं। और विश्वगुरु के पद पर आसीन हो सकतें हैं।
कार्यक्रम में समाज सेवी,शिक्षाविद् उपस्थित थे।
उन्होंने कहा।
विद्या धनम सर्व धनम प्रधानम्।।
विद्या (शिक्षा) सभी धनों में सर्व श्रेष्ठ है
विद्या रूपी शस्त्र से ही हम दुनिया को पराजित कर सकते हैं। और विश्वगुरु के पद पर आसीन हो सकतें हैं।
कार्यक्रम में समाज सेवी,शिक्षाविद् उपस्थित थे।

