।। सम्पादकीय।।
सरल, अधिक सरल, और बहुत सरल। कठिन, अधिक कठिन, और बहुत कठिन। ये सब अपेक्षा से होते हैं। तुलनात्मक दृष्टि से माने जाते हैं।कुछ कार्य बहुत सरल होते हैं, जैसे झाड़ू लगाना आदि। कुछ कार्य उससे कुछ अधिक कठिन होते हैं, जैसे कपड़े धोना, भोजन बनाना आदि। कुछ कार्य और अधिक कठिन होते हैं, जैसे कपड़े सिलना, बिना दुर्घटना किए मोटर गाड़ी चलाना इत्यादि। कुछ काम उससे भी अधिक कठिन होते हैं, जैसे मकान बनाना, धन कमाना आदि। और कुछ काम बहुत ही कठिन होते हैं, जैसे किसी के हृदय में अपने रहने की जगह बनाना।
अधिकतर मनुष्यों का यह स्वभाव होता है, कि वे सरल काम करना पसंद करते हैं, कठिन काम से बचते हैं। कठिन काम नहीं करना चाहते।
*”परंतु अपवाद रूप से कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो पूर्व जन्मों के विशेष संस्कारी होते हैं, उन्हें तो अधिक अधिक कठिन कार्यों को करने में ही आनंद आता है। वे बड़े उत्साह और पूरी शक्ति से अधिक अधिक कठिन कार्यों को करते हैं। वे वीर पुरुष कहलाते हैं।” “इसलिए ऐसे लोगों को बहुत सम्मान प्रतिष्ठा, बहुत अधिक पुण्य, सुख शांति आनंद आदि मिलता है।
उन बहुत अधिक कठिन कार्यों में से एक कार्य यह भी है, कि *”दूसरों के हृदय में अपना निवास स्थान बनाना।” “जो जो हिम्मत वाले हों, वीर पुरुष हों, वे इस चुनौती को स्वीकार करें। कठिन तपस्या करें, जीवन भर आनंदित रहें, और अगले जन्म में भी इस कठिन तपस्या का फल प्राप्त करें। अर्थात ईश्वर उन्हें अगले जन्म में भी बहुत अच्छा मनुष्य जीवन प्रदान करेगा।
इस कार्य में सफलता पाने के लिए बहुत अधिक ईमानदारी सच्चाई निश्छल व्यवहार सरलता सेवा नम्रता सभ्यता दानशीलता सहयोग की भावना एवं सहानुभूति आदि गुण चाहिएं। जो स्वयं को वीर पुरुष मानते हों, वे अपने अंदर इन गुणों को धारण करें, और अपने जीवन को सफल बनाएं।
अधिकतर मनुष्यों का यह स्वभाव होता है, कि वे सरल काम करना पसंद करते हैं, कठिन काम से बचते हैं। कठिन काम नहीं करना चाहते।
*”परंतु अपवाद रूप से कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो पूर्व जन्मों के विशेष संस्कारी होते हैं, उन्हें तो अधिक अधिक कठिन कार्यों को करने में ही आनंद आता है। वे बड़े उत्साह और पूरी शक्ति से अधिक अधिक कठिन कार्यों को करते हैं। वे वीर पुरुष कहलाते हैं।” “इसलिए ऐसे लोगों को बहुत सम्मान प्रतिष्ठा, बहुत अधिक पुण्य, सुख शांति आनंद आदि मिलता है।
उन बहुत अधिक कठिन कार्यों में से एक कार्य यह भी है, कि *”दूसरों के हृदय में अपना निवास स्थान बनाना।” “जो जो हिम्मत वाले हों, वीर पुरुष हों, वे इस चुनौती को स्वीकार करें। कठिन तपस्या करें, जीवन भर आनंदित रहें, और अगले जन्म में भी इस कठिन तपस्या का फल प्राप्त करें। अर्थात ईश्वर उन्हें अगले जन्म में भी बहुत अच्छा मनुष्य जीवन प्रदान करेगा।
इस कार्य में सफलता पाने के लिए बहुत अधिक ईमानदारी सच्चाई निश्छल व्यवहार सरलता सेवा नम्रता सभ्यता दानशीलता सहयोग की भावना एवं सहानुभूति आदि गुण चाहिएं। जो स्वयं को वीर पुरुष मानते हों, वे अपने अंदर इन गुणों को धारण करें, और अपने जीवन को सफल बनाएं।
