।। सम्पादकीय ।।
जन्म से ही प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर द्वारा बहुत सी सुविधाएं मिली हैं। यह उसका भाग्य है, अर्थात उसके पूर्व जन्म के कर्म का फल है। परंतु अब इस जन्म में यदि वह परिश्रम करेगा, तो उसका वर्तमान जीवन का भाग्य भी हीरे के समान चमक सकता है।”*
ईश्वर ने तो पिछले कर्मों के आधार पर जन्म से ही बहुत सुविधाएं दी हैं। अच्छे-अच्छे माता-पिता दिए। अच्छी बुद्धि दी। अच्छा शरीर दिया। बुद्धि मन इंद्रियां आदि सब स्वस्थ हैं। घर में खाने पीने की सुविधा भी ठीक है। कोई गरीबी नहीं है। माता-पिता पढ़े लिखे हैं। समझदार हैं। बुद्धिमान हैं। अच्छे संस्कारी हैं। तो इतनी सुविधाएं तो बच्चे को जन्म से ही मिल गई।” “अब आगे उसका काम है कि इन सुविधाओं से और अधिक उन्नति करना।
जैसे किसी व्यापारी के पास यदि कुछ पूंजी हो, और उसे वह व्यापार में निवेश करे। फिर आगे पुरुषार्थ भी बुद्धिमत्ता पूर्वक करे, तो वह बहुत सा धन और आगे भी कमा लेता है।
इसी प्रकार से जो आपको जन्म से सुविधाएं मिली हैं। यह तो जीवन की उन्नति में एक प्रकार से आपका पूंजी निवेश है। अब आगे जो सावधानी ईमानदारी और बुद्धिमत्ता से आप पुरुषार्थ करेंगे, उससे व्यापारी के समान और अधिक अच्छी विद्या धन सुविधाएं सुख संपत्ति आदि प्राप्त करेंगे।” “अब यह आप पर निर्भर करता है, कि आप पूर्व जन्म के कर्मों से प्राप्त सुविधाओं के आधार पर आगे कितना पुरुषार्थ करते हैं और आगे कितनी उन्नति करते हैं!
*”यदि आप भाग्य भरोसे बैठे रहेंगे, और यह सोचेंगे, कि जो हमारी किस्मत में लिखा है, वह तो हमें मिल ही जाएगा.”* तो ऐसा कुछ नहीं लिखा है। आप अपना जीवन व्यर्थ में खो देंगे, और सारा जीवन दुखी रहेंगे।
इसके विपरीत यदि आप नया पुरुषार्थ परिश्रम बुद्धिमत्ता पूर्वक करेंगे, तो निश्चित रूप से अपने भाग्य को हीरे के समान चमका लेंगे। अतः पुरुषार्थी बनें, आलसी नहीं।
