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गोधन न्याय योजना के तहत पंचगव्य का महत्व
हमारे धार्मिक ग्रंथो में पंचगव्य की काफी महत्ता है पंचगव्य का शाब्दिक अर्थ है -गाय से हमें प्राप्त होने वाले पांच उत्पाद मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण शुद्धि की दृष्टि से इसका वैज्ञानिक आधार भी स्पष्ट है परंतु इसे अंधविश्वास मानकर हम इसे भूलते जा रहे हैं पंचगव्य में गाय के दूध दही घृत गोबर के रस गोमूत्र के मिश्रित द्रव्य को पंचगव्य नाम दिया गया है क्योंकि यह पंचगव्य कई रोगों का नाश करता है इसलिए हमारे ऋषि मुनियों ने इसे धर्म से जोड़ दिया है हमें मालूम होते हुए भी की इसमें गोबर का रस पड़ा है हम बेझिझक इसे पी लेते हैं अमेरिका ने भी पंचगव्य पर काफी वैज्ञानिक खोज की है वह भी इस बात से सहमत हैं ।
निम्न रोगों पर उपयोगी है: लकवा रोग में पुराना सर दर्द दिमाग में रक्त के थक्के साइनस आंखों के रोग कोमा कैंसर आदि मे हितकारी है जितने भी ऐसे रोग हैं जिन्हें न्यूरोलॉजिस्ट भी चिकित्सा से ठीक नहीं कर पाते ऐसे रोगी भी इसके प्रयोग से स्वास्थ्य प्राप्त कर लेते हैं इसका कारण है कि ऐसे रोगियों में दिमाग में रक्त के थक्के जम जाते हैं जिन्हें साधारण अंग्रेजी दवाएं हटा नहीं पाती है देसी गाय का घी 20-25 दिनों में सूक्ष्म रूप में ऊर्ध्वजत्रुगत स्रोत्सो मैं पहुंच कर खोल देता है हवन के समय भी देसी गाय का घी प्रयोग करने से आग के संपर्क में आकर सूक्ष्म रूप में स्वांश के साथ पहुंचकर शाखाओं में पहुंच जाता है यह बिंदु जमे हुए रक्त के थक्के से अवरोध हुए को खोल देता है तथा इन रोगों से पीड़ित रोगी 3 महीने में ठीक हो जाते हैं लकवा के रोगी जिनकी उंगलियां मुड़ी हुई रह जाती हैं पुराना सर दर्द साइनस आंखों के रोग कोमा कैंसर आदि में लाभकारी है पुराना जुकाम जिसमें बिंदु तेल का प्रयोग करवाया जाता है रोगी को इससे कष्ट होता है इस द्रव का प्रयोग करने से रोगी को कोई कष्ट नहीं होता अपित तो लाभ ही होता है कोमा में गए व्यक्ति यहां तक की कैंसर रोग में यह बिंदु उत्तम कार्य करता है इसके साथ रोग अनुसार अन्य दवाई भी दें।
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सम्पादक आचार्य लोकेश बडोनी मधुर पुरोला उतरकाशी
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